Haunted [part 28 ]

सभी बच्चे इतिहास की जानकारी में जुटे थे, तभी उन्हें ऐसा एहसास होने लगा ,जैसे -कोई उन्हें खींच रहा है, कुछ समझ नहीं पाए ,उनके साथ यह क्या हो रहा है ? उन्होंने खुद पुस्तक से पूछा- यह हमारे साथ क्या हो रहा है ?

 उसने जवाब दिया -शायद ,तुम्हें कोई बुला रहा है। यह भूतों का इतिहास तो इतना बड़ा है ,इतना डरावना है , इसको पढ़ने और समझने में, कई दिन या कई बरस भी लग सकते हैं, तुम  कभी भी आकर इसमें से   इसमें जानकारी ले सकते हो ,किंतु अब तुम्हें जाना होगा। वह अपने वाक्य भी पूरे नहीं कर पाई थी ,कि बच्चे वहां से गायब हो गए। 

 कुछ देर पश्चात ,वह मोना डायन के सामने खड़े थे , वह उन्हें गुस्से से देख रही थी। क्या तुम इस स्कूल में मजा मस्ती करने के लिए ही आए हो ,कुछ सीखना नहीं है ,पढ़ना नहीं है उन्हें डांटते हुए बोली। बच्चे उसके गुस्से को पहले ही देख चुके थे , उस समय तो स्कूल के प्रधानाचार्य ने बचा लिया, किंतु उन्हें इस समय बचाव के लिए कोई नजर नहीं आ रहा था। चलो !अपनी क्लास में जाओ ! कहकर वहां से गायब हो गई। 

 मोना के गायब होने पर, बच्चों को आश्चर्य हुआ, उसकी डांट भूल कर सोचने लगे -क्या हम भी इस तरह गायब हो सकते हैं ? 


तन्मय ने गायब होने का प्रयास किया किंतु हो ना सका, तब वह बोला-मोना डायन ,ठीक ही कह रही थी -हमें बहुत कुछ सीखने की आवश्यकता है , चलो, अब हम अपनी क्लास में जाते हैं किंतु समझ नहीं आ रहा ,किस क्लास में जाना है और कहां जाना है ? 

तभी उस विद्यालय की बूढी ''सुपरवाइजर मारिया'' उन्हें दिखी, उसने अपने काँपते शब्दों से पूछा -क्या कोई परेशानी है ?

हम कहां जाएं ,कहां पढ़ने बैठें ? कुछ समझ में नहीं आ रहा है ,यह दीवारें भी सरकती रहती हैं एक जगह पर नहीं टिकती , निम्मी परेशानी से बोली। 

किसी भी परेशानी की कोई आवश्यकता नहीं उन्होंने बड़े प्यार से कहा , यहां कोई नियम लागू नहीं है, तुम्हारा जहां मन हो, वहीं चले जाओ ! जो चाहे सीख सकते हो। यहां पर बच्चों को पूर्णतः  आजादी है। यह सुनकर बच्चों को बहुत खुशी हुई ,किन्तु  यह नहीं जानते थे -कि हमें क्या सीखना है और हम क्या सीख सकते हैं ? अब सभी बच्चों ने ,एक साथ मिलकर निर्णय लिया या तो हम एक ही जैसी चीज सीखेंगे या अलग-अलग क्लास में जाएंगे। जैसे ही एक दीवार खिसकी  कि बच्चे उसके अंदर घुस गए। वहां पर एक नई ही अध्यापिका थी , जो बहुत मोटी और भद्दी  थी , उसके लंबे लंबे नाखून थे, बाल बिखरे हुए ,बेतरतीब थे , उसने किसी जादूगर की तरह नुकीली टोपी पहनी हुई थी , बात करते समय बार-बार ही ही ही ही करके हंस रही थी। जैसे ही उसने बच्चों को देखा, अपने पास आने का इशारा किया। बच्चे घबराए से उसकी करीब गए , वह फिर से हंसी- ही ही ही ही ही ही और अपना परिचय देने लगी -मेरा नाम हिम्बा चुड़ैल है , आज मेरी क्लास में बच्चे झाड़ू का उपयोग करना सीखेंगे , किस तरह झाड़ू को अपने नियंत्रण में करके , उसके द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा सकते हैं।

 निम्मी को ये कार्य अच्छा लगा, बोली -मैं यह सीखूँगी। बाकी बच्चे कहने लगे -नहीं, हमें यह नहीं सीखना है हमें कुछ और सीखना  है , उनके इतना कहते ही ,वो वहां से गायब हो गए। वह समझ नहीं पा रहे थे कि हम कहां से कहां जा रहे हैं ?

तभी एक दरवाजा और खुला और बच्चे उसके अंदर प्रवेश कर गए , तभी बच्चे डेविड की क्लास में चले गए , जो एक पिशाच था , उसकी आंखें इतनी ख़तरनाक थीं  कि बच्चे उसे देखते ही डर गए , उसके बाल सुनहरे थे,उसकी आँखें किसी बिल्ली की तरह चमक रही थीं।  देखने में वह ,शांत स्वभाव का लग रहा था , एक नजर उसने बच्चों की तरफ देखा और पूछा ?क्या सीखना चाहोगे ? किसी के शरीर पर काबू करना या फिर किसी के दिमाग पर काबू करना या फिर दोनों ही , अफरोज और टॉम  दोनों ही एकसाथ बोले -हमें यह सीखना है। उनके इतना कहते ही, तन्मय रोहित और सूरज गायब हो गए। 



तन्मय  और रोहित ने  मोना डायन से आंखों से सम्मोहित करने वाली शक्ति सीखना चाही ,वहीँ सूरज तो अलग ही दुनिया में था। उसने काला जादू करने वालों से बचने की विद्या सीखी ,उन से कैसे बचना है ? आज का दिन बच्चों के लिए बहुत ही रोमांचक रहा , सभी ने कुछ ना कुछ सीखा। 

जब सभी आपस में मिले तो सबने अपने-अपने अनुभव ,एक दूसरे को बताएं , निम्मी ने झाड़ू पर उड़ने का प्रयास किया हालांकि वह भी ठीक से उड़ नहीं पा रही थी, उसे देखकर एकाएक तन्मय को हंसी सूझी और बोला -देखो !''पापा की भूतनी भी उड़ रही है।''

रोहित ने उसकी लाइनें  ठीक की -'' पापा की परी होता है पापा की भूतनी नहीं। ''

किंतु अब तो यह भूत बनी हुई है, फिर भूतनी ही हुई ना ,कहते हुए हंसने लगा। उसकी बातों का आशय समझकर ,अन्य दोस्त भी हंसने लगे किन्तु निम्मी उनसे रुष्ट हो गयी ,उसे लगा ,ये लोग मेरी ,ठीक से न उड़ पाने के कारण हंसी उड़ा रहे हैं। निम्मी मुँह फुलाकर बैठ गयी। 

तभी तन्मय बोला -अब देखो ,मैं इसे कैसे सम्मोहित करता हूँ ,कहते हुए ,उसने निम्मी से कहा -मेरी आँखों में देखो ! 

तभी निम्मी हंसने लगी ,और बोली -कहाँ हैं  ?आँखें ! किनमें देखूं ?

उसकी बातों से तन्मय उदास हो गया ,ये सही तो कह रही है ,अब हमारी आँखें कहाँ हैं ? हम कैसे किसी को सम्मोहित कर सकते हैं ? कल मुझे इस विषय में मोना डायन  से बात करनी होगी।

 तभी रोहित बोला -तुमने ध्यान नहीं दिया, उन्होंने सम्मोहन के लिए एक मंत्र भी बताया था। जिन लोगों की आंखें नहीं होती हैं ,उनको आप कैसे सम्मोहित करेंगे ? इसका उन्होंने मंत्र बताया था , कहते हुए उसने ,वह मंत्र उसे सुनाया। तब तन्मय  को अपनी गलती का एहसास हुआ, और उसने कहा -आगे से मैं ध्यान से सब सीख लूंगा। तब सभी बच्चों ने निर्णय लिया , हम बारी-बारी से सभी कक्षाओं में जाएंगे, हर विद्या में पारंगत तो नहीं हो सकते किंतु थोड़ा थोड़ा सभी सीखना  है। आज सभी बच्चों को ,सीखने में बड़ा ,मजा आया। अभी बच्चे ,उस सुनसान इलाके में ,जहाँ थोड़े पहाड़ नजर आ रहे थे ,टहल  रहे थे और बातें भी कर रहे थे। तभी अफ़रोज की दृष्टि ,एक ओर जाकर टिक गयी। 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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