अमृता बड़ी चालाकी से, अपनी संपत्ति के कागजों पर हस्ताक्षर करा कर, अपनी संपत्ति यश से वापस ले लेती है। अमृता के सामने यश और कीर्ति दोनों अनजान बने हुए थे, वो नहीं जानते थे कि अमृता उनके रिश्ते को जानती है , उनके मुंह से ही,उनके रिश्ते सच्चाई कहलवाने के लिए , अमृता उनके रिश्ते को बदनाम करना चाहती है। वो उनके रिश्ते को एक नया ही मोड़ दे देती है , ताकि वह अपने मुंह से स्वयं सच्चाई कुबूल करें। चार महीने की मेहनत के पश्चात आखिरकार, अमृता की सारी संपत्ति उसके अपने नाम हो गई और उसने यश से तलाक के कागज पर भी, हस्ताक्षर करवा लिए। तब वह कीर्ति और यश से जानना चाहती है- कि वह किस लिए उसको धोखा दे रहे थे ? उसको धोखा देने का उनका क्या उद्देश्य है ? तब क्रोध में आकर, यश उससे बताता है -उसने कभी उससे प्यार किया ही नहीं , उसने उसे कभी धोखा दिया ही नहीं वरन जिस तरह की वह लड़की थी उसका उसने लाभ अवश्य उठाया। इस बात से अमृता बहुत क्रोधित हो जाती है , यश भी, उस पर हाथ उठाने के लिए आगे बढ़ता है। तब अमृता उसे समझा देती है -कि भूल से भी यह कार्य मत कर देना ,वरना जेल में चक्की पीसते नजर आओगे।
मैं क्यों चक्की पीसूँगा ? मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया ,न ही तुम्हारे पास मेरे विरुद्ध कोई सबूत है ,यश चिल्लाकर बोला।
सबूत !मैं अपने आप में ख़ुद हूँ ,तुम जैसा धोखेबाज मैंने आज तक नहीं देखा ,इधर मुझसे शादी ,उधर मेरे टुकड़ों पर अपनी ,उस' बीवी के पिल्लों को पाल रहे हो'। जबकि मैं जानती थी ,कि तुम शादीशुदा हो फिर भी मैंने तुमसे प्यार किया ,अपना सबकुछ तुम्हें सौंप दिया और तुम मुझे तभी से धोखा देते आ रहे हो। यहाँ मैं अपमान के घूंट भर रही थी और वहां अपने परिवार को पाल रहे थे।
अपनी जबान को लगाम दो !वे मेरे बच्चे हैं।
हम्म !तिरस्कार से बोली - तुम्हारी तरह ही हरामी होंगे।
तुम हद से बाहर जा रही हो !
तुमने भी तो अपनी हद पार कर दी ,इस लड़की [कीर्ति ]के कहने पर तुमने मेरे विरुद्ध षड्यंत्र रच डाला ,मेरी भावनाओं से खेला , सच्चाई भी जानने का प्रयत्न नहीं किया। पश्चाताप करते हुए कहती है -काश !तुम मेरी ज़िंदगी में न आये होते।
अमृता के बार बार कहने पर यश बता ही देता है कि वह उसके पास क्यों आया ? तुम अपने को बहुत खूबसूरत समझती हो ,लेकिन मेरी नजर में, तुम्हारी खूबसूरती कुछ भी नहीं है। जब मुझे कीर्ति ने बताया कि तुमने उससे उसका धारावाहिक छीन लिया ,तब मुझे बड़ा क्रोध आया। तब मैंने सोच लिया था तुम्हें मजा तो चखाना पड़ेगा। जो संपत्ति तुमने उसके हिस्से से कमाई है उसका हिस्सा उसे दिलवाकर रहूंगा।
उसकी यह बातें सुनकर अमृता अचंभित रह गई, क्या सोच रहा है ,और क्या कह रहा है ?मैंने कौन सा धारावाहिक छीन लिया , अमृता ने पूछा। हम तो दोनों ही उसमें साथ थे।
किंतु जो रोल तुम्हें मिला वह रोल तो मुझे मिलना चाहिए था कीर्ति ने तर्क दिया।
ये कैसा तर्क है? वो धारावाहिक मेरे घर का नहीं था, मैंने नहीं बनाया था , जिसने यह धारावाहिक बनाया था उसी ने हमें यह किरदार निभाने को दिए थे , इसमें तुम कुछ कर सकती थी, न ही मैं , मेरी अच्छाई को तुम भूल गईं तुमने मुझसे बदला लेने के लिए, कितना बड़ा षड्यंत्र रच डाला ? यश की तरफ देखते हुए बोली- और तुम इसकी बातों में आ गए, अपनी ही नहीं मेरी जिंदगी में जहर घोल दिया। तुमने , अपनी उम्र के हिसाब से, कुछ समझदारी से काम लिया होता , मैंने तो इसे उस राकेश से भी बचाया, पूछो !इससे , कीर्ति की तरफ इशारा करते हुए बोली। मुझे लगता है, इसका तो सिर्फ बहाना था, तुम्हारा उद्देश्य तो मेरी संपत्ति लूटना था। तुम इसके बहाने से अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहे थे।
तुम जो भी समझो ! ये तुम्हारी सिरदर्दी है ,अब तुम्हें सब पता चल ही गया है ,तो मेहरबानी करके अपना सामान बांधो और निकलो यहाँ से।
मुझे जितनी गलतफ़हमी पालनी थी ,पाल चुकी ,अब तुम अपनी गलतफ़हमी दूर करके मेरे घर से ,निकल जाओ ! मेरे आस -पास भी कहीं नजर मत आना और अपनी इस भांजी को भी ले जाओ !जिसके माध्यम से तुम्हारे प्रति मेरे मन में, जो गलतफ़हमी थी ,वो भी दूर हो गयी। जो तुमसे भूल से प्यार कर बैठी ,शायद जीवनभर इसी गलतफ़हमी में रहती ,वो भी दूर हो गयी। चलो आगे बढ़ो !कहकर उसने अपने दरबान को आवाज लगाई और उन दोनों को बाहर करने के लिए कहा।
किन्तु यश अभी भी ,यही सोच रहा था ,सब उसके पास है ,तभी अमृता ने अपने फोन पर ,उसे सभी कागज दिखलाकर ,उसकी गलतफ़हमी शीघ्र ही दूर कर दी। यश बुरी तरह झुंझला गया ,जो घर आज तक उसका था ,जो सम्पत्ति उसकी थी ,उसके हाथों से निकल गयी ,उसे बड़ा क्रोध आया और झपटकर अमृता को पकड़ना चाहा किन्तु कामयाब न हो सका ,तभी बाहर से आकर ,जो गार्ड कम ,बॉडीगार्ड ज्यादा लग रहा था, उसने यश का हाथ पकड़ लिया। उसका शरीर उसकी कद -काठी देखकर ,यश का साहस नहीं हुआ ,जो अमृता की तरफ देख भी सके। अमृता ने अपने बचाव का साधन भी, पहले ही कर लिया था ,तब शेरा से बोली - तुम इन्हें बाहर का रास्ता दिखा दो ! और याद रहे ,ये घर के आस -पास भी दिखलाई न दें कहकर अंदर चल दी ।
शेरा ने ,यश को बाहर जाने का इशारा किया ,किन्तु यश जाने के लिए तैयार नहीं था ,तब वो अमृता के पीछे जाने लगा ,किन्तु शेरा ने अपना हाथ आगे कर दिया। अबकि बार यश को गुस्सा आया और शेरा पर चिल्लाया और धमकी देते हुए बोला -'तेरी इतनी हिम्मत मुझे रोके ,तू मुझे जानता नहीं है।
सीढ़ियों पर चढ़ते हुए ,अमृता ने सुन लिया ,तब वो बोली -हाँ ,शेरा ! तुम जानते नही हो ,ये पंचकुला में ,''बबली दा पिकनिक स्पॉट ''के मालिक हैं। कभी तुम्हें भी कोई ,जन्मदिन पर या अपने घर में किसी की शादी करवानी हो ,तो बुकिंग करा सकते हो, तुम्हें छूट मिल जाएगी ,और भी बहुत सम्पत्ति इन्होंने धोखे से इकट्ठा की हुई है। मैंने वो सब ,तुम्हारे लिए छोड़ दिया ,कहकर यश को घृणा से देखा। कम से कम तुम नहीं तो ,तुम्हारे बच्चे तो मुझे दुआ देंगे कि उन्हें सड़क पर लाकर खड़ा नहीं किया। अब तुम्हारे मन में प्रश्न होगा ,ये सब मुझे कैसे मालूम ? क्योंकि जिस दिन तुम मुझसे झूठ बोलकर ,अपनी बेटी के जन्मदिन पर वहां गए थे। मैं भी वहीँ थी ,तुम्हारी बेटी का जन्मदिन क्या आया ?मेरी आँखें खोल गया। कहकर अमृता ने अपनी गर्दन को झटका दिया और शेरा को इशारा कर दिया। अबकि बार यश भी कुछ नहीं कह पाया।कीर्ति और वो दोनों ही धीरे -धीरे कदमों से घर से बाहर चल दिए।
दोस्तों यश का अध्याय ,अमृता की ज़िंदगी से समाप्त हो गया ,किन्तु अमृता की ज़िंदगी यहीं पर समाप्त नहीं हो गयी ,अभी उसकी ज़िंदगी में न जाने कितने उतार -चढ़ाव बाक़ी हैं ?अब अमृता की ज़िंदगी में आगे क्या हुआ ?क्या अमृता इस दुःख को झेल पाई ,टूट गई या आगे बढ़ गयी। जानने के लिए पढ़ते रहिये -''जेल ''

