चाय की चुस्कियाँ और तुम्हारा संग ,
साथ निभाने की ,आदत सी हो गई है।
जब तुम इंकार कर देते हो, लगता है ,
कोई बात है , जो अधूरी रह गई है।
अब तुम्हारी ,आदत सी हो गई है।
लगता है, तुम बिन,चाहत कहीं खो सी गई है।
एक कप ,अकेले पीने का दिल नहीं करता ,
अब तुम्हारे बगैर,पीने की भावना ही खो गई है।
अब तुम्हारी आदत सी हो गई है।
न छूटे कभी , इन दो कपों का साथ ,
बना रहें ,इसी तरह हम दोनों का भी साथ ,
इनको एक साथ देखने की आदत सी हो गयी है ,
जो बात अधूरी सी थी,तुम्हारे साथ पूरी हो गयी है।
अब तुम्हारी आदत सी हो गयी है।
चाय और तुम..... मेरी भावनाओं से जुड़े हो ,
चाय की इच्छा होते ही ,प्रफुल्लित मन को ,
आपका साथ पाने की, चाहत हो गयी है।
अब तुम्हारी आदत सी हो गयी है।
बहाना चाहिए -
बिस्किट साथ में हो या ना हो, तुम्हारा साथ होना, चाहिए।
चाय पीने का तभी मजा ? साथ में साथी भी होना चाहिए।
चाय की चुस्कियों संग , थोड़ी चुहलबाजियां भी होनी चाहिए।
कैसे छोड़ दें ,ऐसी शाम को ,जिसमें तुम्हारी मुस्कान चाहिए।
उसने मुझे देखा ,आँखों ही आँखों में कुछ इशारे होने चाहिए।
चाय का तो सिर्फ बहाना है , हमसफर का साथ होना चाहिए।
कुछ शिक़वे ,कुछ शिकायतें ,इज़हार ,इसरार भी होना चाहिए।
कुछ कीमती पल उनके संग , चाय का तो बस बहाना चाहिए।

