जब हिमांशु अपने घर पहुंचा ,तो उसे देखकर, उसके माता-पिता आश्चर्यचकित रह गए और कहने लगे -जब तुम्हें आना ही था, तो साथ में ही आ जाते , किंतु वह उनकी बातचीत का ,आशय नहीं समझ पाया। अभी वह अपने माता-पिता से मिल ही रहा था ,तभी उसने अपने पीछे, अमृता को देखा , अमृता को अपने गांव में , और वो भी अपने घर में देखकर ,उसे बड़ा आश्चर्य हुआ। वह सोच रहा था -यह यहां कैसे आ गई ? तब मन ही मन सोचने लगा , अपने माता-पिता से इसे क्या कहकर परिचय कराउंगा ? अभी मन में वह यही सब सोच रहा था, तभी अमृता बोली -पापा जी देखिए !मैं कितने सारे ''काफल ''[ये एक पहाड़ी फल होता है ] तोड़कर लाई हूं।
हिमांशु सोचने लगा, यह मेरे परिवार वालों को कैसे जानती है ? उनसे ऐसे बात कर रही है जैसे इन्हें बहुत पहले से जानती है। वह तो यह सोचकर घबरा रहा था ,कि मैं क्या कह कर परिचय कराउंगा ? किंतु उनके बातचीत के तरीके से लग रहा था ,वह एक दूसरे को पहले से जानते हैं। तब भी हिमांशु अमृता से बोला -तुम यहां कैसे ?
जैसे तुम यहाँ..... उसने सपाट सा जवाब दिया।
भई !यह क्या बात हुई ? यह तो मेरा घर है।
तब यह मेरे अंकल आंटी का घर है , कहते हुए,अमृता , हिमांशु की मम्मी के करीब आकर बैठ गई।
हिमांशु ,अमृता के जवाबों से संतुष्ट नहीं था ,तब उसने अपने मम्मी -पापा से पूछना ही उचित समझा , मम्मी !ये सब क्या है ? आप इन्हें कब से जानते हैं ?
बेटा ,यह तो हमारी बेटी है , जान पहचान तो इससे हमारी पांच -छह महीने पहले ही हुई है, किंतु लगता है ,जैसे- हम इसे बरसों से जानते हैं। इसने हमारी बहुत सहायता की है , पैसों की बहुत तंगी हो रही थी , तभी इसने आकर हमारी सहायता की।
और आपने सहायता ले ली और मुझे बताना भी मुनासिब नहीं समझा ,नाराज होते हुए हिमांशु ने पूछा। तब अमृता की तरफ देख कर बोला - आपको मेरे घर का पता कैसे मिला ?
जब किसी चीज को करने की हमारी, इच्छा हो, और मन से करना चाहते हो तो ,पता चल ही जाता है। तुम मेरी और मेरे परिवार की मदद, करने के बहाने मुझे अपने एहसानों के बोझ तले दबाना चाहती हो। क्या तुम ये साबित करना चाहती हो , मैं, अपने माता-पिता का ख्याल नहीं रखता, उनका खर्चा नहीं उठा सकता। मुझे क्यों मेरी नजरों में ही मुझे गिराना चाहती हो ? हिमांशु ने क्रोध में यह सब अमृता से कह दिया, उसके माता-पिता के सामने ,इस तरह हिमांशु को बेइज्जती करते देख ,अमृता को बर्दाश्त नहीं हुआ और उसकी आंखों में आंसू भर आए ,इन लोगों के सामने अपना दर्द दिखाना नहीं चाहती थी। वह तो खुद ही नहीं समझ पा रही थी, कि वह यह सब क्यों कर रही है ? शायद , उसे संतुष्टि मिल रही हो। उसके घर में दो ही कमरे थे ,एक कमरे में जाकर रोने लगी और अपना सामान समेटकर रखने लगी , इसीलिए शायद उसने हिमांशु को कभी नहीं बताया , कि किस तरह उसने दृष्टि से, उसके घर का पता निकलवाया , हिमांशु के नाम ,एक दिन ,एक पत्र भी आया था कि उसके पिता बीमार हैं। यह पत्र भी उसने हिमांशु से छुपा लिया था , वह जानती थी - हिमांशु पहले से ही खर्चों से परेशान है , वह यहां रहकर जैसे-तैसे खर्चा चला रहा है पिता की बीमारी सुनकर शायद ,फिल्म छोड़कर ही ना चला जाए। किंतु जब हिमांशु को पता चला , तब उसको बहुत बुरा लगा। हिमांशु अपने घर नहीं आना चाहता था, इसीलिए अमृता ने सोचा -मैं ही चली जाती हूं , वह नहीं जानती थी, कि हिमांशु इस तरह यहां आ जाएगा। हिमांशु को नीचा दिखाने का ,उसका कोई उद्देश्य नहीं था।
अब तो उसे पता चल ही गया, अमृता के अंदर जाते ही ,हिमांशु की मां ने उसे समझाया -तू क्यों उस पर नाराज हो रहा था? ऐसा उसने क्या कौन सा गुनाह कर दिया ? बेचारी परिवार के प्यार के लिए और अपनेपन के लिए , तरस रही थी इसीलिए हमारे पास आ गई , यहां आकर उसे अच्छा लगता है , ये पहाड़ी इलाका है , यहां तो वैसे भी लोग घूमने के लिए ,आते ही रहते हैं तो क्या वह नहीं आ सकती थी ? माना कि वह तुझे जानती है , इसका अर्थ यह नहीं ,कि वह तुझे नीचा दिखाना चाहती है। यदि वह नीचा दिखाना चाहती तो तुम्हें बताकर भी आ सकती थी। हम लोगों के पास कुछ दिन रहकर , अपने मन को बदलकर खुश हो कर, चली जाती इसमें ना ही हमारा कुछ जा रहा था ,ना तेरा...... फिर तू क्यों उससे नाराज हो बैठा। माना कि ,उसने तेरे साथ काम किया है किंतु कभी तुझे जतलाया तो नहीं।बेचारी की माँ ,बचपन में ही चल बसी ,माँ के प्यार को आज भी तरसती है ,उसका पिता इसके लिए सौतेली माँ ले आया। सौतेली माँ ने इसे कभी अपना समझा ही नहीं ,फिर भी ये ,पिता के मरने पर आज भी ,उनके खर्चे उठाती है ,जिन्होंने कभी ये भी जानने का प्रयास ही नहीं किया ,कि वो इतने बड़े शहर में ,कैसे रह रही है ? उसे किसी चीज की जरूरत तो नहीं। यहाँ आकर उसे अपनेपण का एहसास होता है ,रही बात ,उसके पैसों की ,उस समय तो उसने हमारी सहायता कर दी ,किन्तु अब तू कमाकर उसके पैसे लौटा देना या कभी उसको आवश्यकता पड़े ,तब तू उसकी सहायता कर देना ,इसका एहसान भी ,उतर जायेगा किन्तु इस तरह से उसकी बेइज्जती करना ,उसे डांटना तो सही नहीं है।
हिमांशु के पिता ,जो अब तक हिमांशु की और उसकी मम्मी की बातें सुन रहे थे , बोले -मुझे लगता है, यह तुझसे प्यार करने लगी है , किंतु अभी यह स्वयं ही नहीं समझ पा रही है ,यह क्या कर रही है ?और क्यों कर रही है ? उससे थोड़ा सा प्यार से बात करो और अपनी गलती की उस से माफी मांगो और उसके मन को टटोलो। पता करो ,वह क्या चाहती है ?
हिमांशु ने अंदेशा जतलाया, यदि उसने हां कर दिया तो....... अभी मैं जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार नहीं हूं। अभी मेरी फिल्म का परिणाम भी नहीं आया , आगे मुझे फिल्में मिलती है या मुझे कुछ और करना पड़ सकता है यह भी देखना है। यह मेरे साथ इस छोटे से घर में कैसे रह सकती है ? जबकि इसका इतना बड़ा मकान है। अभी मुझे बहुत सारी बातें देखनी और सोचनी हैं , कहकर हिमांशु उठकर बाहर चला गया।

