अगले दिन के लिए ,आने का वायदा करके ,हिमांशु अमृता के घर से बाहर निकल जाता है ,अब तक उसने अपने को संभाला हुआ था किन्तु अब कोई भी साथ नहीं था ,अपनी किस्मत पर मन ही मन इठला उठा ,जिसके वो सपने देखता था ,आज वो ही उससे अपने संग चलने के लिए कह रही है ,उसके लिए ,इससे बड़ी और क्या बात हो सकती है ?
फिर भी अपने को मन ही मन समझा रहा था ,बहकना नहीं हैं ,एक दायरा बनाकर चलना है ,न जाने क्यों ?उनके सामने अपने को विवश पाता हूँ ,उस प्रेम दृश्य को करते हुए ,लग रहा था ,कहीं मैं अपना आपा ही न खो दूँ। ख़ैर !जो भी होगा देखा जायेगा ,लापरवाही से अपने होटल में प्रवेश करता है। कमरे की चाबी लेता है और कमरे में प्रवेश करके सीधा बिस्तर पकड़ लेता है ,कुछ देर के लिए आँखे बंद किये लेटा रहता है किन्तु बंद आँखों में तो अमृता और भी स्पष्ट नजर आ रही थी। उसके तन की खुशबू उसे अभी भी महसूस हो रही थी। वो महक उसके फेफड़ों में ताजगी भरने के लिए काफी थी। तभी उसके कमरे का दरवाजा किसी ने खटखटाया। उसने दरवाजा खोलकर देखा सामने ,एक लड़का खाना लिए खड़ा था। उसे देखकर हिमांशु को स्मरण हुआ ,आते समय ,उसने खाना कमरे में ही ,भेजने के लिए कहकर आया था।
हाँ ,लाओ ! इधर ही रख दो ! हिमांशु ने उस लड़के से कहा।
सर ! एक बात पूछूं !उसने खाना मेज पर लगाते हुए पूछा।
हाँ ,पूछो ! अपनी ही दुनिया में खोये ,हिमांशु बोला।
आप ,किसी फ़िल्म में काम कर रहे हैं।
उसकी बात से ,हिमांशु चौंका ,तुमसे किसने कहा ,उससे प्रश्न किया।
बस ,पता चल गया ,वो मुस्कुराकर बोला।
हाँ ,शूटिंग तो चल रही है , किन्तु तुम अभी किसी से मत कहना ,जब तक फ़िल्म बन नहीं जाती , हिट नहीं होती, किसी को कुछ भी कहने से क्या लाभ ?किन्तु तुम ये सब क्यों पूछ रहे हो ?
मैं भी तो ,इधर फिल्मों में काम करने के लिए हो तो आया था ,एक फ़िल्म साइन भी की ,दो -चार दिन शूटिंग भी चली ,पता नहीं क्यों ,बंद हो गयी ?मेरी किस्मत की तरह।
उसकी बात सुनकर ,हिमांशु थोड़ा सा हिल गया। किन्तु अपने धैर्य को बंधाते हुए बोला -तब कहीं और जगह कोशिश नहीं की।
बहुत की ,बहुत धक्के खाये ,पैसे भी खत्म हो गए ,भूखों मरने की नौबत आ गयी।
तब अपने घर वापस चले जाते।
किस मुँह से जाता ?कहकर आया था ,जब तक किसी क़ाबिल नहीं बन जाता तब तक नहीं आऊंगा , कहते हुए रोने लगा।
तू भी न.... यार !इतनी जल्दी हिम्मत हार गया ,अपने घर जाता ,कुछ और काम कर लेता।
कैसे कर लेता? काम के लिए भी तो पैसा होना चाहिए ,वो जो पैसा अपने साथ लाया था ,वो भी दोस्तों से उधार मांगकर लाया था ,वापस जाकर उन्हें पैसा कहाँ से लाकर देता ? तब यहीं रहकर काम ढूंढने लगा ,परिस्थितियों ने इतना तोड़ डाला ,मैंने सपने देखना ही बंद कर दिया। अब यहां रहकर काम करता हूँ थोड़े पैसे बचाकर, घरवालों को भेज देता हूँ। जब मुझे आपका पता चला कि आप फ़िल्म में काम कर रहे हैं। तब मेरे आँखों में भी सपने जाग उठे , अपने वो दिन स्मरण हो आये।
तुम्हारे साथ जो भी हुआ, बहुत ही गलत हुआ ,किन्तु मनुष्य प्रयत्न करना तो नहीं छोड़ देता और ये भी जरूरी नहीं ,जो तुम्हारे साथ हुआ ,सभी के साथ हो। हो सकता है ,तुम्हारी किस्मत अचानक से जाग उठे ,वक़्त बदलते देर नहीं लगती ,तुमने बड़े साहस से अपने को संभाला ,बस यही साहस बनाए रखना। मैं तुमसे कोई वायदा तो नहीं करता किन्तु इतना अवश्य कह सकता हूँ ,यदि मुझे कभी तुम्हारी आवश्यकता महसूस हुई ,किसी रोल के लिए ,तो कोशिश यही करूंगा कि तुम्हारे सपने को उड़ान मिल सके। बस हिम्मत से इसी तरह, कार्य करते रहो। हिमांशु की बातें सुनकर उसे अच्छा लगा ,और वो जाने लगा ,तब हिमांशु ने उससे पूछा -मैंने तुम्हारा नाम तो पूछा ही नहीं।
''अजय ''नाम है मेरा !
लो तुम्हारे तो नाम में ही ''अजय'' है ,ज़िंदगी परिक्षा तो अवश्य लेती है ,बस उसी परीक्षा को हमें पास करना है। ज़िंदगी एक बार आगे बढ़ने का मौका भी अवश्य देती है ,बस उस मौके को जाने नहीं देना है। पता नहीं क्यों ? 'हिमांशु 'उससे इतनी बड़ी -बड़ी बातें कर रहा है ,उसका साहस बढ़ा रहा है ,या अपना। अभी उसकी भी तो, ये पहली फ़िल्म है ,पता नहीं ,भविष्य में क्या घटित होता है ? हिमांशु को अचानक ही अजय से सहानुभूति वो चली, उसका दिल तो चाहा कि उसकी सहायता करें किंतु अभी वह इतना सक्षम नहीं था। किसी की सहायता करने के लिए , स्वयं में भी , इतनी क्षमता तो होनी चाहिए कि वह सामने वाले की सहायता कर सकें।जो स्वयं किसी की सहायता पर आश्रित हो, वह दूसरे की सहायता क्या करेगा ? किंतु उसने मन ही मन सोच लिया था यदि उसकी यह फिल्म चल जाती है, हिट होती है और उसके वश में हुआ तो वह अजय की जरूर सहायता करेगा ,उसे अवश्य ही किसी ना किसी फिल्म में काम दिलवाएगा।
चलते समय अजय ने पूछा , मैंने सुना है आप की हीरोइन 'अमृता 'जी हैं , उन्हीं के आप साथ काम कर रहे हैं ,न....
वाह ,बेटे ! मेरे विषय में संपूर्ण जानकारी लिए घूम रहे हो ,एकाएक हिमांशु, उसकी बातों से प्रभावित होते हुए बोला , तुम्हें फिल्मों में नहीं, तुम्हें तो प्रेस में काम करना चाहिए ,अच्छी खबरें बटोर कर ला सकते हो ! अपने हुनर को पहचानो ,अभिनय से ज्यादा क्षमता तो ,तुममें मुझे एक पत्रकार होने की नजर आ रही है। इधर की खबर उधर उधर की खबर इधर अच्छे से कर सकते हो, कह कर मुस्कुराने लगा।
अपनी जानकारी पर वह स्वयं ही मुस्कुरा उठा , अच्छा चलता हूं ,कहकर बाहर निकल गया।
खाना खाने के पश्चात, हिमांशु फिर से अमृता की, स्मृतियों में खो गया। आज उसके साथ जो प्रेम का दृश्य था, काश वो..... सच में होता।उस दृश्य को हकीकत में बदलने के लिए , उससे पहले मुझे उसके काबिल होना होगा , कहां वो.... इतनी बड़ी अभिनेत्री और कहां में , सोच कर ,उसे अपने घर की स्मृति हो आई। उसके पिता का एक छोटा सा व्यापार है जिसमें उसकी बहन और वह दोनों पले बढ़े। बहन के विवाह के पश्चात, कायदे में तो उसे अपने घर की जिम्मेदारियां संभाल लेनी चाहिए ,इतनी पढ़ाई करने के पश्चात भी , उसे नौकरी नहीं मिली। उम्र के साथ-साथ माता-पिता की भी इच्छा है उसके प्रति उनकी इच्छाएं बढ़ने लगी कि बच्चा अब अपनी जिम्मेदारी संभाले ,विवाह करके, अपनी जिंदगी में आगे बढ़े। किंतु अभी तक तो अपनी ही जिम्मेदारियां नहीं संभाल पा रहा है ,वह कैसे विवाह कर सकता है ? विवाह कर लेने का मतलब है एक और जिम्मेदारी अपने सिर पर ले लेना। कैसे वह? दूसरे घर की लड़की को लाकर ,अपने साथ तंगी में रख सकता है हालांकि उस लड़की का उत्तरदायित्व भी , उसके माता-पिता वहन कर सकते हैं ,किन्तु अपने उत्तरदायित्व को वह स्वयं ही वहन करना चाहता है। अब उन्हें वह सुख देना चाहता है जिसके कि वह हकदार हैं ,अब सारी उम्मीदें इसी फिल्म पर टिकी हुई है , सोचते हुए न जाने का हिमांशु को नींद आ गई।

