जेल में , नई पुलिस वाली आती है, जिसका नाम' तनु 'है ,उसने आते ही , जैसे ,हड़कंप सा मचा दिया। उसने ही , सभी जेल वालों को जानकारी दी, कि आठ लड़कियां, इस जेल से गायब हो चुकी हैं। इसकी जानकारी किसी को भी नहीं थी या फिर अनजान बनने का अभिनय कर रहे थे। वह सभी से जानना चाहती थी ,कि क्या कोई जानता है ?कि इस जेल में से लड़कियां कहां गई ? या कौन इसमें शामिल हो सकता है ? किंतु किसी के पास कोई भी जवाब नहीं था। तब अमृता जी, को स्मरण होता है ,एक बार सत्तो ने भी उन्हें इशारा किया था कि कोई लड़की बाहर जाती है और वापस नहीं आती है किंतु उस समय ,उन्होंने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया। आज ये बात सभी को पता चल गई, अमृता जी बताना चाहती थीं किंतु सत्तो ने हाथ के इशारे से उन्हें मना कर दिया।
निर्मला उन्हें इस जेल का एक नया रूप भी दिखाती है , अमृता को कोई भी ,कुछ नहीं कहता था क्योंकि उन्हें लगता था ,कि ये जेलर साहब और उनके मित्र को जानती हैं ,अथवा इनकी पहुंच बहुत ऊँची है। नई पुलिस वाली के आने पर , जेल में थोड़ी हलचल तो हो ही गई। कैदी थोड़े सतर्क भी हो गए , जो थोड़े बहुत लापरवाह थे ,वह भी अपने कार्य को ठीक से करने का प्रयास करने लगे। आज अमृता जी ने जेल का कुछ दूसरा ही रूप देखा था। जिसका वर्णन निर्मला ने किया था और कुछ उन्होंने ,अपनी आंखों से देखा था कि किस तरह दो पुरानी कैदी ,एक लड़की को, एक रोटी के लिए पीट रही थीं।
तब निर्मला ने बताया -कि यहां पुलिस से ज्यादा कार्य तो, यहां के पुराने कैदी करते हैं। यहाँ की पुलिस ,कैदियों पर ही ,सभी उत्तरदायित्व सौंपकर, निश्चिंत हो जाते हैं। नए कैदियों से कार्य कराना ,उन्हें खाना कैसे देना है ?यह देखना , और नए कैदियों से कैसे उन्हें लाभ उठाना है ? यह सब पुराने कैदियों पर निर्भर होता है। जिनके पास थोड़ा पैसा होता है ,वह अपने पैसे का उपयोग कर सकते हैं ,उससे उन्हें लाभ मिल सकता है ,किंतु जो गरीब हैं ,उनकी तो दुर्गत ही है। काम और मार के सिवा उन्हें कुछ नहीं मिलता, ना ही अच्छा खाना। कभी-कभी तो किसी की भी कैदी की ऐसी हालत कर देते हैं ,कि वह अपनी जान देने पर उतारू हो जाता है। ऐसी जिंदगी से तो ,वह मरना बेहतर समझता है , किंतु उनके दुख कम नहीं होते। न हीं किसी को उनसे कोई किसी भी प्रकार की सहानुभूति होती है।
निर्मला जी ,भी जानना चाहती थीं कि आखिर इस जेल में ऐसी हरकत करने का किस-किसका साहस है जो लड़कियों को बाहर भेज दें ,या उनसे कोई गलत कार्य कराए। जेल का वातावरण थोड़ा ,गंभीर हो गया था। अपनी कहानी लिखने से, थोड़ा अमृता जी का ध्यान भंग हो गया था , अमृता जी को अब खाना खाने के पश्चात, उन्हें अपनी जगह जाना उचित लगा। अपनी बैरक मि जाकर समीप ही रखी अपनी डायरी को देख रही थीं , उसे देखते ही उन्हें ,फिर से हिमांशु और अमृता की कहानी स्मरण हो आई। धीरे-धीरे हमारी फ़िल्म अपनी मंजिल की ओर बढ़ रही थी। फिल्म उम्मीद से ज्यादा हिट हो, इसके लिए वह लोग, फिल्म के पूरी होने से पहले ही उसका विज्ञापन कर रहे थे। चहुँ ओर , उसके चर्चे हो रहे थे। इस फ़िल्म में ,अमृता और हिमांशु के प्रेम भरे दृश्य ,लोगों के दिलों में फ़िल्म देखने की ललक जगा रहा थे। फ़िल्म से पहले उसके गाने हर गली ,हर नुक्क्ड़ पर बजते सुनाई दे जाते। फ़िल्म पूरी करके ,अमृता ने घूमना चाहा ,वह इतने दिनों की परेशानी से कुछ दिनों के लिए मुक्त होना चाहती थी। तब उसने हिमांशु से पूछा -क्या तुम कहीं बाहर जाना चाहते हो ?
हिमांशु ने सोचा -यह इतनी बड़ी अभिनेत्री है , यह घूमने के लिए बाहर विदेश में ही जाएगी , अभी हिमांशु को अपने फिल्म के हिट होने का इंतजार था। तब वह अमृता से बोला -जब तक फिल्म का परिणाम नहीं मिल जाता तब तक मैं कहीं नहीं जाऊंगा किंतु अमृता तो चली गई , लगभग एक सप्ताह के लिए। अमृता के जाने के पश्चात , हिमांशु का भी मन नहीं लगा। तब उसने सोचा -क्यों ना ?अपने घर चला जाए ,मम्मी -पापा भी अकेले ही होंगे कुछ समय उनके साथ व्यतीत कर लिया जाए। हिमांशु का घर उत्तराखंड की पहाड़ियों में किसी गांव में था , वह अपने घर चला गया। हिमांशु जब अपने घर पहुंचा तो उसे देखकर उसकी मम्मी पापा बहुत ही प्रसन्न हुए। अपने बेटे को खाना खिलाया, उसे ढेर सारा आशीर्वाद दिया भगवान उसको कामयाबी दे, फिर बोले -बेटा ,तुझे आना था ,तो तूने पहले क्यों नहीं बताया ? तू उसके साथ ही चला आता।
किसके साथ, आप किसकी बात कर रहे हैं ?
अरे ! वही ,जो तेरी हीरोइन है।
मेरी हीरोइन कौन है ? हिमांशु अभी नहीं समझ पाया था , मेरी जिंदगी में तो मेरी मां की मेरी हीरोइन है कहते हुए -अपनी मां के पास बैठ गया।
हंसते हुए ,उसके पिता बोले -हां -हां वह तो तेरी क्या ?मेरी जिंदगी की भी हीरोइन है। किंतु यह मेरी जिंदगी की हीरोइन है किंतु तेरी फिल्म की हीरोइन की बात कर रहा हूं।
अच्छा, वह तो बाहर कहीं घूमने गई है, बड़े लोग हैं , खूब पैसा है, दूर दूर तक घूमने जाते हैं।
किंतु कुछ लोग ऐसे भी होते हैं पैसा होने के बावजूद भी वह प्यार को और परिवार को तलाशते हैं , वह बाहर नहीं भागते।
क्या ?मतलब !मैं कुछ समझा नहीं।
तभी उसे अपने पीछे किसी के आने का एहसास होता हैं ,वो घूमकर देखता है ,तो उसके सामने एक अमृता खड़ी थी, जिसने साड़ी पहनी हुई थी ,आँखों पर धूप का चश्मा लगा रखा था ,किसी पुरानी फिल्म की अभिनेत्री लग रही थी ,उसे देखकर ,हिमांशु चारपाई से उठ खड़ा हुआ और बोला -अरे ,तुम यहाँ..... कैसे ?मुझे बता देतीं ,तुम इधर आ रही हो ,तब हम दोनों साथ ही आ जाते।
हिमांशु को कुछ भी जबाब न देकर ,अमृता बोली -पापा ,जी देखिये ! मैं कितने सारे काफल के फ़ल तोड़कर लाई हूँ। हिमांशु आश्चर्य से उसे देखा रहा था ,वो तो सोच रहा था कि अपने मम्मी -पापा से कैसे उसका परिचय कराना है ?किन्तु यहाँ.... तो कुछ ओर ही खिचड़ी पक रही है।

