क्षीण होते पाख ,थकने लगा तन ,
घबराता है, मन ,
हौसला है, बुलंद ,
सीमा पार हौसला ,
वक्त का पहिया ,
ठहरा नहीं ,
चलता गया ,
हौसला दिल में ,
बढ़ता गया।
उम्र घटती रही ,
उड़ान बढ़ती रही।
चेतन मन ,
क्षीण तन ,
कैसे ?भरे उड़ान !
रह गयी ,क़सक !
थोड़ी फड़फड़ाहट !
भरी थी ,उसने भी ,
कभी ,''हौसलों की उड़ान !''