Jail 2 [part 3]

 अमृता सोच रही थी ,क्या संयोग है ? आज ही यह होटल में मिला और अब पता चलता है ,कि  मेरी फिल्म का हीरो भी यही है , वो  भी ,मेरा इतना बड़ा प्रशंसक ! अमृता को सोचने का मौका भी नहीं मिला। 'हिमांशु' उसका हाथ पकड़कर ,उसे  नाव की तरफ ले जाने लगा , उसे सहारा देकर नाव  पर चढ़ाया। तब निर्देशक ने , उन्हें बताया - किस तरह बैठना है ?और किस तरह उन्हें , एक दूसरे के प्रेम में डूबना है ?  आज हिमांशु के साथ ,उसकी शूटिंग का पहला दिन था , उसने अपने दृश्य के सभी  संवाद ठीक से स्मरण कर लिए थे। उसे लगा-' हिमांशु 'में तनिक भी झिझक नहीं है , जिस प्रकार उसने बताया था कि यह मेरी पहली फिल्म है , उस बात को ध्यान में रखते हुए ,अमृता ने महसूस किया कि उसमें आत्मविश्वास पूरी तरह से भरा हुआ है। अवश्य ही ,इसने पहले भी कहीं काम किया होगा। 

जब निर्देशक ने , हिमांशु से उसकी आंखों में झांकने के लिए कहा , तब थोड़ी सी  झिझक उसे  हुई किंतु तुरंत ही अपने को संभाल लिया।  अपने सभी संवाद उसने बहुत सही तरीके से बोले - उसके संवाद को सुनकर ऐसा नहीं लग रहा था ,यह संवाद , किसी लेखक के  लिखे हैं ,बल्कि ऐसा लग रहा था जैसे -वह अपने दिल से उन संवादों को , अमृता के लिए बोल रहा था।


 

उसका अभिनय देखकर ,एक बार को तो अमृता भी का ''आत्मविश्वास ''भी डोल गया, उसे अपने ऊपर इतने सालों के अनुभव का ,जो अहंकार था वह भी डगमगाने लगा। हिमांशु का अभिनय देखकर, अमृता  को लगा -जैसे वह उसका अभिनय नहीं वरन सच्चाई बोल रहा है। नाव पर बैठकर ,जो भी संवाद उसने बोला- ऐसा लग रहा था जैसे उसके दिल से निकले संवाद थे। देखने में ,अच्छा भला लड़का है ,ऊपर से इतनी  अभिनय क्षमता हो, वो  तो उसकी अभिनय क्षमता की कायल हो गई, उस दृश्य को फिल्माने के बाद वह लोग नाव  से उतरे , अगले दृश्य के लिए, तब उनके' मेकअप मेन ' ने उन्हें घेर लिया , अब तो अमृता के मन में भी हिमांशु के विषय में जानने की इच्छा होने लगी। वह जानना चाहती थी -कहां रहता है ,क्या करता है उसका परिवार कैसा है ?इत्यादि। अमृता की साज -सज्जा  हो रही  थी  किंतु उसका ध्यान तो हिमांशु पर ही लगा हुआ था , वह उसकी प्रशंसा किये  बगैर ना रह सकी , तभी दृष्टि को देख कर बोली-यह नया लड़का है, लेकिन अभिनय  देखो ! कितना अच्छा किया है ?

हां ,मैम !आप सही कह रही हैं, देखने में लग ही नहीं रहा था कि वह कोई नया कलाकार है। मुझे तो इस बात से ताज्जुब  हो रहा है, आज आपके प्रशंसक के रूप में मिला भी तो यही ,कहते हुए मुस्कुराने लगी। 

हां ,इसे एक संयोग ही कह सकते हैं ? तैयार होकर ,अमृता ने दृष्टि से पूछा -देखो ! मैं कैसी लग रही हूं ?

आप तो हमेशा से ही कमाल लगतीं हैं ,कोई कह नहीं सकता ,आप इतनी बड़ी कलाकार हैं। 

ये बात समझ नहीं आई ,उम्र से बड़ी कलाकार कह रही हो ,या फिर अनुभव से। 

वैसे तो दृष्टि उम्र की दृष्टि से ही कह रही थी, किंतु कभी मैम ,बुरा न मान जाए इसलिए सोचा -नहीं ,मैं अनुभव के आधार पर कह रही हूं। 

अमृता समझ गई अब अपने वाक्यों  में ,समझदारी का लेप लगा रही है ,फिर भी उसे समझाते हुए बोली -अभी मेरी उम्र ही क्या हुई है ? छब्बीसवे में ही तो ,लगी हूँ। 

वो ही तो मैं ,कह रही थी ,आप इतनी उम्र की भी नहीं लगतीं और जीवन में इतना कुछ देख लिया, वह यश की बात को सोचते हुए कह रही थी। 

हां ,वही , आजकल उम्र ही कितनी है ?पता नहीं चलता ,कब यहां से ,दाना पानी उठ जाए ,जो काम भी करना है , शीघ्र ही करो !

अमृता कॉलेज के कपड़ों में बाहर आती है, देखने में तो सुंदर थी, आज और बच्ची सी लग रही है। हिमांशु उ से देख कर मुस्कुराया वह भी कॉलेज के कपड़ों में था। दोनों ने ही ,कॉलेज की लाइफ खूब एंजॉय की। दोनों के कुछ दृश्य अलग-अलग भी लिए गए और शूटिंग समाप्त हो गई। शूटिंग समाप्त होने के बाद, अमृता अपने घर की ओर चल दी। तभी अमृता ने देखा ,हिमांशु शायद किसी वाहन की तलाश में खड़ा है , उसने गाड़ी रुकवाई और हिमांशु से बोली- आओ तुम्हें छोड़ दे !

नहीं मैम मैं कोई रिक्शा ले लूंगा , कहते हुए इधर-उधर देखने लगा। 

अमृता अधिकार से बोली- चलो ,आओ बैठो ! तुमसे कुछ बात भी करनी है। अमृता के इस तरह ,कहने पर वह चुपचाप गाड़ी में आकर  बैठ गया। हिमांशु ने देखा अमृता की गाड़ी एकदम नई चमाचम है , उसमें बैठकर ,उसे एक सुखद अनुभव हुआ , वह भी उस अभिनेत्री के साथ, जिस का साथ पाने के लिए हर जवान दिल धड़कता है , किंतु उसने अपनी अनुभूति अपने तक ही सीमित रखी।   

 मैम ! आप कुछ पूछना चाहती थीं ।

पहली बात तो तुम यह ,मुझे' मैम ,मैम 'कहना बंद करो , मैं तुमसे कोई इतनी बड़ी भी नहीं हूं , हालांकि अनुभव में बड़ी हो सकती हूं ,तुम से पहले मैं ,इस फिल्म इंडस्ट्री में आई किंतु मुझे लगता है ,उम्र में हम लगभग साथ  के ही हो सकते हैं। मैम कह -कहकर तो  मुझे तुम बुढी  बना दोगे।'' कॉल मी ''अमृता !

जी मैम, कहते उसकी तरफ देखकर बोला -''अमृता मैम '' फिर दोनों हंस दिए। अब बताइए आप मुझसे क्या पूछना यह कहना चाह रही थीं।   

हां....... स्मरण करते हुए बोली -हम दो बार  मिले, एक बार भी हमारा परिचय नहीं हुआ। 

मेरा क्या परिचय ?मैम ! मैं तो मध्यवर्गीय परिवार का लड़का ,जो  सपनों में जीता है  ,' एम बीए'किया हुआ है , नौकरी आजकल इतनी आसानी से मिलती नहीं हैं , न ही नौकरी करने की मेरी इच्छा है , मैं अपने मां-बाप को हर वह सुख देना चाहता हूं , जिसकी तमन्ना हर जवान लड़के के, माता-पिता करते हैं।' खन्ना साहब' को मैं , एक मंच पर मिला था। वहां एक नाटक  मैं ,मैंने अभिनय किया था ,वहीं पर देखकर उन्होंने मुझे बुला लिया था और कहा था, मुझे तुमसे बहुत सी उम्मीदें हैं ,इन्हीं उम्मीदों के साथ मैं , तुम्हें अपने साथ लेकर चल रहा हूं। तुम्हें अपने ही नहीं ,मेरा  सपना भी साकार करना है , मैं एक ऐसी फिल्म बनाना चाहता हूं जो दुनिया में तहलका मचा दे। बस उन्हीं अरमानों को लेकर मैं मुंबई नगरी में आ गया , यही मेरा छोटा सा परिचय है।

बहुत खूब छोटा सा लेकिन शानदार परिचय ! आओ ,चलो !मेरे घर चलकर कॉफी पीते हैं। 

नहीं ,मैडम ! अमृता ने उसकी तरफ देखा ,तब हकलाते हुए बोला -अमृता जी , मैं शाम को चाय ही पीता हूं चाय से मेरी थकान मिट जाती है ,यही मेरी आदत बनी हुई है , उसके इस तरह बिंदास बात करने से अमृता मुस्कुराने लगी और बोली -चलो ,आज तुम्हारे साथ चाय भी पी लेते हैं। कोठी के अंदर घुसते समय, हिमांशु ने देखा ,बड़ी शानदार कोठी है , इनके भी क्या ठाठ हैं ? कभी मेरी भी इतनी शानदार कोठी होगी। 

चाय पीते हुए अमृता बोली- अभिनय तो  तुमने बहुत अच्छा किया। 



जी, बस यह सोचिए ,यह मेरी जिंदगी का सवाल था , मैंने अपनी पूरी मेहनत से पूरा प्रयास किया है कि मैं अपना बेस्ट दूं। 

वह तो आपने किया है , बिस्किट हाथ में लेते हुए अमृता बोली -माता -पिता के आलावा तुम्हारे परिवार में और  कौन-कौन हैं ? अमृता का अर्थ ,उसकी पत्नी और बच्चों से था या फिर कोई दोस्त !

नहीं ,परिवार में एक बहन थी ,उसकी शादी हो गई, मैं अकेला हूं , माता -पिता पर कब तक बोझ  बना रहूंगा ? सोचा ,अब स्वयं भी कुछ कर लिया जाए ,कह कर मुस्कुराने लगा। अब किस्मत तो देखिए , फिल्म भी मिली तो वह भी ,आपके साथ....... कहकर मुस्कुराया और अमृता की तरफ देखने लगा। 

वैसे तुम, ठहरे कहां हो ?

आपके नजदीक ही  एक होटल है , अभी तो वही हूं ,कहते हुए, वह उठ खड़ा हुआ और बोला -अभी मैं चलता हूं। 

मेरा ड्राइवर तुम्हें छोड़ देगा। 

नो मैम ,अमृता जी ! मेरा होटल पास में ही है , मैं वहां तक पैदल ही चला जाऊंगा। इतनी आदत तो है ,मुझे, कहते हुए बिना देर किए , चल पड़ा। 

तभी अमृता ने उसे रोका और बोली -जब होटल इतना नजदीक है तो शूटिंग पर दोनों ही साथ चलेंगे ,मेरे घर तक आ जाया करो यहीं से दोनों साथ निकल जाया करेंगे। 

ठीक है ,कह कर वह घर से  निकल गया। 


 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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