Jail 2 [ part 1 ]

 नमस्कार दोस्तों,! मेरी कहानी ''जेल ''के ''एक सौ चार ''भाग पूर्ण  हो चुके हैं , जिसमें आपने पढ़ा ,अमृता किस तरह अपने घर में रहती है ? किस तरह वहाँ उसका शोषण होता है ? किन परिस्थितियों से , हालातों से जूझती है, उन परिस्थितियों से जूझते हुए वह शहर में ,कॉलेज में पढ़ने आती है और कॉलेज में आकर,वो चंचल नदी सी ,अपने को दुनिया कि रंगीनियों में खो देना चाहती है ? तब संयोग से , उसे एक राह मिलती है , वह उस राह पर चल पड़ती है ,वह राह भी रंगीन है ,आज के युवा वर्ग उस राह पर चलने के सपने देखते हैं। तब वो अपने सपनों को पूरा करने के लिए , किस तरह फिल्मों में ,धारावाहिक में ,काम करने के लिए बाहर ,यानि मुंबई के लिए निकल जाती है, किंतु उसकी जिंदगी में ऐसा क्या हुआ ? कि वह 'जेल 'पहुंच गई , पिछले भाग में आप लोगों ने पढ़ा- कि वह ''जेल 'में रहकर ,अपने जीवन पर ही एक कहानी लिख रही है, 'जेल 'में, उसके साथ रहने वाली जो महिलाएं हैं ,उनके साथ उसका कैसा व्यवहार है? कैसे उन्हें समझाती है? उनकी कहानियां सुनती है। तब अमृता को पता चलता है -कि समाज में किस तरह के अपराध पल रहे हैं ,और किस तरह के अपराध होते हैं ? सब की जानकारी के लिए आपको ''जेल'' को  पढ़ना होगा। जैसे आप लोगों ने पहले धारावाहिक ''जेल '' में सहयोग दिया है , उसी प्रकार दूसरे धारावाहिक'' जेल टू'' में अपना सहयोग दीजिएगा। 


अब अमृता ने ,अपनी जिंदगी की दूसरी पारी शुरू की है , उसका पति ''यश '' जो उसका पूर्व प्रेमी भी था,उसे धोखा देकर जा चुका है, अमृता ने अपने को बहुत संभाला और अब वह'' विकास खन्ना'' की फिल्म में काम करने के लिए तैयार हो गई है। हालांकि जो दृश्य उसे बताए गए हैं ,उसके आधार पर उसका, मन यह कार्य करने के लिए नहीं मान रहा था किंतु'' विकास खन्ना ''ठहरा , सफल व्यापारी, उसे सामने वाले व्यक्ति  को कैसे अपने तरीके से समझाना है ? कैसे उससे काम निकलवाना है ? इन चीजों में ,वो पारंगत है। कई मामलों में कहा जाए तो ,वह काईयाँ  क़िस्म  का आदमी है। 

जो भी हो ,उसने अमृता को अपनी फिल्म में काम करने के लिए मनवा ही लिया , फिल्म का ''शुभ मुहूर्त'' सोमवार के दिन तय किया गया है। अमृता ने अपने मन को बहुत समझाया , कुछ विकास के समझाने का भी असर था।  कोई भी रिश्ता उसके अपने साथ नहीं खड़ा था ,जो उसे सही सलाह देता, अमृता अकेली जो भी कर रही थी ,अपने दम पर ही कर रही  थी ,उसका परिणाम भुगतने के लिए भी ,वह स्वयं ही तैयार थी। उसका आगे का भविष्य इस फ़िल्म के चलने पर निर्भर करता है, भविष्य को किसने जाना है ? उसका परिणाम अच्छा भी हो सकता है और बुरा भी। 

नियत समय पर, शूटिंग आरंभ हो जाती है , फिल्म का नाम ''जवानी जानेमन '' रखा गया। फिल्म के शीर्षक से ही,आदमी  अंदाजा लगा लेता है ,कि वह किस तरह की फिल्म होगी ? कोई पारिवारिक फ़िल्म तो होगी नहीं ,पूरे जोर-शोर उत्साह के साथ फिल्म शुरू हो जाती है। अभी अमृता के एक -दो  दृश्य  ही फ़िल्माये गए थे। अब दूसरे दृश्य में ,फ़िल्म के नायक को आना था। जब उस फ़िल्म का नायक पहली बार लाल हुडी में आया ,तब अमृता ,अपने साज -शृंगार वाले के सामने बैठी हुई थी। जब लोगों में हलचल हुई ,कि हीरो आ गया ,तब अमृता ने एक बार घूमकर देखा , इतनी भीड़ में उसे ,सिर्फ लाल हुडी ही दिखी। तब उसने अपने शृंगारवाले से पूछा -क्या तुम जानते हो ? कौन है ?वो !

नहीं मैम !मैंने आज से पहले उसे नहीं......  देखा। 

क्या नाम है ? उसका ! नाम तो सुना होगा। 

आप तो इस फ़िल्म की मुख्य नायिका हैं ,जब आपको ही नहीं मालूम तो मुझे कैसे पता होगा ?अपने लटके हुए हाथ को ,झटका देते हुए वो बोला। 

अमृता ने मन ही मन सोचा ,ये ठीक ही तो कह रहा है ,वो खन्ना इतना चालाक है ,मुझे से भी उसने ,उसका नाम छुपकर रखा है । ख़ैर ,जो भी हो ,मुझे क्या ?जब सामने आएगा ,तभी मिल लेंगे। सोच कर ,अपनी बारी के आने तक के इंतजार में ,एक पत्रिका उठाकर पढ़ने लगी। दूसरी तरफ शूटिंग हो रही थी। कैमरा ,एक्शन की आवाजें आ रही थीं। शॉट ठीक हो जाने पर ,तालियों की गड़गड़ाहट की आवाज आ रही थी। अमृता ने एक व्यक्ति से पूछा - मुझे और कितना इंतजार करना होगा ?

बस, मैम! एक शॉट  और हो जाने दीजिए तब आपकी बारी आती है ,कहकर वो चला गया। उसके पश्चात वह एक जूस  पीते हुए ,इंतजार करती है। 

अबकी बार ,बार -बार, उधर से ,रोल ,कैमरा ,एक्शन की आवाजें आ रहीं हैं ,शायद वो लड़का अपनी तैयारी करके नहीं आया ,रीटेक पर रीटेक दिए जा रहा है। उन आवाजों को सुनकर अमृता मुस्कुराती है, और मन ही मन बुदबुदाती है , नए कलाकार लेंगे, तो ऐसा ही होगा। बेचारे  की पहली फिल्म है, वैसे ही नर्वस हो रहा होगा। रिटेक के चक्कर में, काफी समय बीत गया, सब थक भी चुके थे। दोपहर के खाने का समय हो गया। अमृता ने भी अपना लंच मंगवा लिया। वह जानती थी ,अभी उसी का सीन है, इसलिए थोड़ा आराम कर लेती हूँ। आज न जाने ,उस नए कलाकार को क्या हो गया ? एक सीन देने के बाद और ठीक से कार्य भी नहीं कर पा रहा था। तब डायरेक्टर ने, अमृता को बुलवा भेजा। सोचा, आज अमृता से  ही, कुछ दृश्य  करवा लेता हूं। अमृता को उठाया गया और एक दृश्य फिल्माने के लिए कहा गया। हालांकि उसे नींद की खुमारी थी किंतु उसने अपना दृश्य बखूबी दिया। ताली बजी और पैकअप हो गया। आगे की शूटिंग के लिए अमृता से कह दिया गया, आगे के  दृश्य कहाँ  फिल्माए जाने हैं ,वो  जानकारी आपको फोन पर दे दी जाएगी। अमृता के मन में जिज्ञासा उठी देखे तो सही, मेरी फिल्म का ''नायक ''कौन है ? उसने कहा -इस फिल्म के नायक से तो परिचय करवाइए , किंतु मालूम पड़ा ,वह तो जा चुका है। नया कलाकार तब भी  अपने मन में अहंकार ले रहा है, उसने अपनी फिल्म की नायिका से मिलने की कोशिश भी नहीं की। सोचते हुए अपने गाड़ी के करीब आई और उसमें बैठ कर चली गई।


रास्ते में एक मॉल पड़ता था , सोचा थोड़ी सी खरीदारी ही कर लूँ , यह सोच कर वह गाड़ी से उतरकर, मॉल के अंदर चली गई। मॉल  से उसने, कुछ कपड़े खरीदे , कुछ नकली आभूषण, और सैंडल भी,सबका मूल्य चुका कर बाहर आ गई। पीछे उसकी' मैनेजर दृष्टि' उसके सामान के थैले उठा कर ला रही थी। तभी उसने देखा-एक  '' आपातकालीन वाहन ''बड़ी तेजी से उधर से निकली, जिसमें वैसी ही लाल रंग की हुडी  पहने एक आदमी बैठा था। अमृता  सोच रही थी -क्या यह वही है ? फिर सोचा ,मेरा भ्रम होगा, तब तक दृष्टि सामान ले आई थी वे लोग गाड़ी में बैठ कर चली गयीं। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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