Anokhe mitra

 मेरे मित्र ,कुछ अजीब , कुछ अलबेले से !

 बोलती हूं मैं ,सुनते हैं वो !

सोचती हूँ ,मैं लिखते हैं ,वो !

 चाहे हों , कितने ?झमेले से !

 बांटती हूँ ,जिनसे सपने -अपने ,

बोल देती हूँ ,उनसे विचार अपने।

 बांट लेती हूं ,सब दर्द ओ ग़म अपने। 

लिख देती हूं, सभी सपने -अपने। 



सुन लेते हैं ,वो मेरी बातों को,

समेट लेते हैं ,शब्दों के मोतियों को ,

बुरा न माने कभी, उन हालातों को ,

 बातें मेरी सब सुन लेते हैं,

लिख ,सुन और पढ़ लेते हैं। 

 दिल में छुपा कर रख लेते हैं। 

 चाहे ,बात कोई हो........ ,

नहीं ,किसी से कहते हैं। 

मेरी ही सुनते हैं, 

मेरा कहा ही ,बुनते हैं। 

मेरी' कलम' ,'मेरी डायरी,'

 ये  मित्र मेरे ,दो अलबेले  से,

उकेरती हूँ ,चित्र भावों के रंगों से ,

दफ़्न कर लेते हैं ,हर लफ्ज़ सीने में ,

सह लेते हैं ,हर दर्द ,डायरी के पन्ने में। 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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