Haunted [part 31]

सभी 'भूत बच्चे, 'भूतों के मेले 'में जाते हैं ,वहां पर निम्मी को एक चश्मा पसंद आ जाता है ,जो कि जादूई  है , तन्मय  और रोहित उसे उस चश्मे को लेने से रोकते हैं ,लेकिन जब निम्मी उसमें से देखती है तब उसे दूर कहीं कोई व्यक्ति दिखलाई देता है ,कि जैसे कोई उन्हें देख रहा है ,उसकी नजर उन ही उन पर है। और जब चश्मा उतार देती है ,तो उसे कुछ नहीं दिखाई देता , और जब बच्चों की तरफ देखती है ,तो वह हंस देती है क्योंकि उसे  बच्चों के आर पार दिख रहा था , जो भी था, निम्मी को चश्मा बहुत दिलचस्प लगा और वह कहने लगी -मैं इसे ही लूंगी।

 जब निम्मी ने उसके पैसे पूछे -तब उस दुकानदार ने कहा - तुम्हें इसके बदले में मेरी एक रात सेवा करनी होगी। यह सुनकर निम्मी हैरत में पड़ गई। 

 तन्मय  बोला -इसके बदले में आप और कुछ भी तो ले मांग सकते हैं। 


 तब वह दुकानदार कहता है- इसके बदले मुझे दस  सोने के सिक्के लाकर दो !

रोहित कहने लगा- यहां तो सोना चांदी कुछ भी नहीं चलता। 

तब वह बोला -मैं एक तांत्रिक हूं या तो तुम मेरी एक रात की सेवा के लिए तैयार हो या फिर उसके बदले में मुझे दस  सोने के सिक्के देना होगा।  

नहीं ,हमें तुम्हारा चश्मा नहीं लेना है कहते हुए ,टॉम ने  उसका चश्मा उसे वापस देने का प्रयास किया किंतु उसने यह कहकर मना कर दिया ,अब यह मैं यह चश्मा बेच  चुका हूं। अब बच्चे उसकी बातों में आकर फंस गए। 

 तब तन्मय  बोला -हमें, सिक्के लाने के लिए ,थोड़ा समय दीजिए। 

नहीं ,मैं समय नहीं दे सकता क्योंकि यह मेला' अमावस्या 'की रात्रि को ही लगता है और अमावस्या महीने में एक बार आती है।

 ठीक है ,कहकर बच्चे बोले -हम अभी मेले में ही घूम रहे हैं ,हम कहीं नहीं जाएंगे , आप के सिक्के दे कर ही जाएंगे। किंतु कैसे यह समझ नहीं आ रहा था ? जो भी था ,अभी तो उन्होंने बैठे-बिठाए एक परेशानी , मोल ले ही ली थी। उस जगह से हटने के लिए और कुछ सोचने के लिए बच्चे आगे बढ़ना चाहते थे। 

 तांत्रिक बोला -मैं तुम लोगों पर विश्वास नहीं कर सकता , इसीलिए तुम में से किसी एक को ,यहां मेरे साथ रहना होगा , सिक्के दे जाना और अपने साथी को ले जाना। उसकी बात सुनते ही सूरज तो बुरी तरह घबरा गया ,क्योंकि वह  पहले भी एक तांत्रिक के चक्कर में फँस चुका था। 

तब टॉम बोला -तुम लोग इस मेले में घूम सकते हो , मैं इसी तांत्रिक की दुकान पर बैठता हूं। रोहित के कान में बोला -शीघ्र ही कोई हल निकालो !

बच्चे बुरी तरह घबरा गए थे, पहली बात तो वह अपने स्कूल से बाहर थे , दूसरी तरफ वह तांत्रिक के चक्कर में फँस चुके थे। अब क्या किया जाए ? किस तरह टॉम को छुड़ाया जाए ? उनकी यही परेशानी बढ़ती जा रही थी। अब उनका , मेला देखने  में भी मन नहीं था। 

तभी एक दुकानदार की आवाज उन्हें  सुनाई दी -ले लो !''जादुई शीशा'' जो मांगोगे वहीं मिलेगा , बिछुड़ों  से मिल जाओगे ! कोई खोई हुई ,चीज मिल जाएगी।

रोहित उस आवाज को सुनकर ठहर गया ,तभी रोहित को एक बात सूझी , उसने उस आईने वाले से पूछा -यह आइना क्या -क्या दिखा सकता है ? क्या जादू कर सकता है ?

उसने कहा -जो तुम मन में सोचोगे ,वह तुम्हारे सामने आ जाएगा। 

तब रोहित बोला -इसके दाम क्या है ?

 इसको खरीदने के लिए ,आपको मुझे ,''एक पिशाच का नाखून'' लाकर देना होगा। 

''पिशाच का नाखून !!! सभी बच्चे आश्चर्य से बोले। 

हां यही इसकी कीमत है ,उसने जवाब दिया।

यदि हम'' पिशाच का नाखून ''ना दे सकें  तो उसके बदले में आप क्या मांगना पसंद करेंगे ? हम छोटे बच्चे ''पिशाच का नाखून'' कहां से लाएंगे ? हम यह भी नहीं जानते ''पिशाच '' कैसा होता है ,हमें कहां मिलेगा ?

उनकी बात सुनकर दुकानदार मुस्कुराया, उसने सोचा क्यों ना बच्चों को ही मैं ,अपना दास बना लूं , इसीलिए बोला -यदि तुम इस जादुई आईने को पाना चाहते हो तो इसके लिए तुम्हें मुझे भी सोने के सिक्के देने होंगे। 

तन्मय  बोला यदि हम वह भी ना दे पाए तो....... 

तुम सभी को ,मेरा दास बनना होगा। 

हम सभी क्यों ?जो यह आईना लेगा ,वही तो दास बनेगा। 

तुम सभी ही मेरी दुकान पर आए हो , जैसा मैं कहूंगा वैसा ही होगा वह थोड़ा क्रोधित होते हुए बोला। 

बच्चे समझ गए ,कि यह लोग तांत्रिक हैं और हम लोगों को मूर्ख बनाना चाहते हैं ,हमें अपने सामानों द्वारा ,वचनबद्ध करना चाहते हैं।  

तब रोहित बोला- इसे खरीदने से पहले, मैं इसे परख कर देखना चाहता हूं। कि यह कुछ जादू करता भी है।  या नहीं , कहते हुए अपने दोस्तों को वहीं खड़ा करके एकांत स्थान पर गया, और उस आईने से पचास  सोने के सिक्के मांगे। 

आईना मुस्कुराया और बोला -इतनी सी बात ,यह कहते हुए उसने एक स्वर्णकार की दुकान उसे दिखला दी , जिसमें से रोहित ने पचास सोने के सिक्के निकाल लिए। सभी बच्चे घबराए हुए थे, सोच रहे थे-हमने यहां आकर बहुत बड़ी गलती कर दी। अब वह मन ही मन ,इस मेले में आकर पछता रहे थे किंतु वह इन तांत्रिकों के मेले में फंस चुके थे। यह मेला तांत्रिक उन भूतों  के लिए लगाते थे , जिनसे उन्हें कुछ लाभ मिल सके। हुआ भी यही , बच्चे उस जादुई चश्मे के पैसे नहीं दे पाते हैं तो, निम्मी को उसका एक रात का दास बनना होगा। ये भी आवश्यक नहीं कि वो अपनी बात पर ही रहे ,हो सकता है ,कुछ और ही समस्या खड़ी कर दे। अपनी समस्याओं का हल निकालने के लिए , बच्चों ने वह'' जादुई आईना ''चुना आईने से हल निकालने के लिए उन्होंने उससे वह जादुई आईना लिया था वरना इस मेले से उनका निकलना मुश्किल था। हो सकता है यह तांत्रिक उन्हें ज्यादा समय के लिए ही रख लें ,कोई छुड़ाने तो आएगा नहीं ,ना ही, किसी को मालूम है कि बच्चे किधर गए हैं ?



कुछ भी रास्ता न दिखलाई देने पर ,निम्मी रोने लगी और बोली -ये सब ,मेरे कारण ही हुआ है। 

तुम रोती क्यों हो ?हम कुछ सोच रहे हैं ,न...... 

मैं इसीलिए रो रही हूँ , यदि हम इन वस्तुओं का मूल्य नहीं चुका पाए ,तब हम एक रात्रि के लिए नहीं वरन एक माह के लिए ,इनके दास हो जायेंगे। 

तुम ये क्या कह रही हो ?उसने एक ही रात्रि की बात की है ,अफ़रोज बोला। 

तुमने उसकी बात ध्यान से नहीं सुनी ,वो कह रहा था -''हर अमावस्या की रात्रि को ये मेला लगता है ,और अमावस्या की रात्रि महीने में ,एक बार ही आती है। तब तक न जाने  हमारा क्या होगा ?इन्होंने हमें अपने जाल में फंसा लिया है।

निम्मी की बात सुनकर बच्चे और भी घबरा गए ,उधर टॉम चश्मे वाले दुकान पर बैठा , दोस्तों की प्रतीक्षा में था। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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