अमावस्या की रात्रि को, सभी' भूत बच्चे 'मेला देखने जाते हैं , वह मेला, वैसे तो भूतों के लिए ही लगा है किंतु उसमें सभी दुकानदार तांत्रिक हैं, यह बात वे बच्चे नहीं जानते थे , वह पहली बार ही ,उस मेले में आए थे , उस मेले में से निम्मी ने एक ''जादुई चश्मा ''खरीदा। किंतु तुरंत ही बच्चों को अपनी गलती का एहसास हो गया, वह समझ गए थे कि इन तांत्रिकों के कारण हम यहां फंस सकते हैं। फस सकते हैं, नहीं वरन फंस गए हैं , क्योंकि उन्होंने उस जादुई चश्मे के बदले में उनसे दस सोने के सिक्के मांगे थे, या फिर निम्मी को एक रात्रि के लिए दास बनाने की शर्त रख दी थी। निम्मी की घबराहट को देखकर ,टॉम उसकी जगह , कुछ देर के लिए स्वयं बैठ गया था ताकि उसके दोस्त उस समस्या का हल निकाल सकें। तभी जादुई आईने वाले ने भी , उनके सामने ऐसी ही कुछ शर्त रखी। अब तो निम्मी घबरा कर रोने लगी थी क्योंकि वह समझ गई थी ,वे सभी बुरी तरह से फंस चुके हैं। जब उस दुकानदार ने बताया -कि यह मेला ,हर 'अमावस्या 'की रात्रि को लगता है। तब उसने अपने दोस्तों से बताया- कि यह एक रात्रि की बात नहीं है ,बल्कि एक माह की बात है। ''अमावस्या''से पहले यह मेला नहीं लगेगा , तब तक ,यदि हम इन के सिक्के इन्हें नहीं दे पाते हैं, हमें इनका बंदी कहो या दास कहो, वही बनकर रहना होगा।
अभी निम्मी रो ही रही थी और अपने दोस्तों से अपनी गलती के लिए क्षमा मांग रही थी, तभी, वहां रोहित आ गया और उसने उस आईने की कीमत' बीस सोने के सिक्के' उस दुकानदार के सामने रख दिए।
दुकानदार आश्चर्यचकित होकर, उसे देखने लगा और जब तक उसकी समझ में कुछ आता ,कि यह क्या हो गया ? इन बच्चों के पास, सोने के सिक्के कहां से आए ?तब तक बच्चे उसकी दुकान से जा चुके थे। अब टॉम को छुड़ाने की बारी थी , दस सोने के सिक्के देकर ,उन्होंने टॉम को भी उस तांत्रिक से छुड़ाना चाहा। किंतु दुकानदार अपनी बात से मुकर गया और बोला -तुमने आने में ,थोड़ी देर कर दी। तब उस दुकानदार ने ऐसा कुछ देखा, जिसके कारण वह डर गया और वह उसने चुपचाप उन बच्चों को जाने दिया। बच्चे भी समझ नहीं पाए ,अचानक उसके बर्ताव में इतना बदलाव कैसे आया ? जो भी था उनके लिए अच्छा ही हुआ यह सोचकर बच्चे आगे बढ़ गए।
ये तांत्रिक लोग हमें अपनी बातों से ही नहीं ,हमें अपने मंत्रों द्वारा भी कैद कर सकते हैं ,मेरा हाल नहीं देखा था ,सूरज घबराते हुए बोला।
सूरज की बात सुनकर, सभी बच्चे एकमत होकर बोले -अब इस मेले में हमें और नहीं घूमना है इससे पहले कि हम फंस जाएं ,हमें इस से बाहर निकलना होगा। बच्चे आगे बढ़ ,मेले से बाहर निकलने का प्रयास करने लगे , उनके सामने अनेक खिलौने ,झूले बहुत कुछ आया किंतु अब उन्होंने उनकी तरफ देखा भी नहीं , वह किसी भी तरह इस मेले से बाहर निकल जाना चाहते थे। उस मेले से बाहर निकलते ही ,कुछ समझ नहीं आया ,कि वह कहां जाएं ,उनका वह स्कूल कहां गया ? उनकी दृष्टि जहां तक जा सकती थी वहां तक दूर-दूर तक भी कोई स्कूल नहीं था। अब यह हम कौन से '' माया जाल ''में फंस गए ? अफरोज ने घबराते हुए पूछा , यहां तो डिकोस्टा अंकल भी नहीं ,जो हमारी सहायता कर सकें। तभी उसे तांत्रिकों पर संदेह हुआ , इन लोगों ने ही तो अपनी शक्तियों से ,हमारे स्कूल को गायब तो नहीं कर दिया। कुछ समय तक इसी तरह उस खुले आसमान में भटकते रहे। उन्हें कुछ भी समझ नहीं आ रहा था ,कि क्या किया जाए ,कैसे स्कूल को ढूंढा जाए ?
तभी निम्मी को जैसे कुछ याद आया और उसने अपना जादुई चश्मा पहन लिया , उसके पहनते ही उसे दूर आकाश में बादलों में अपना स्कूल नजर आया और वह अपने साथ उन बच्चों को भी लेकर आगे बढ़ गई। तब वह खुश होते हुए बोली -देखा ,मैंने कहा था न........ यह चश्मा बड़े काम की चीज है। अपने स्कूल में प्रवेश करते ही बच्चों ने राहत की सांस ली किंतु सभी के मन में एक प्रश्न कुलबुला रहा था , आखिर रोहित के पास , सोने के सिक्के कहां से आए ?
अफ़रोज को यह बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था ,आखिर उसने रोहित से पूछ ही लिया, रोहित !तुम्हारे पास इतने सोने के सिक्के कहां से आए ?
तब रोहित ने अपना ''जादुई आईना'' निकाला और बोला -मैं जब इसकी परीक्षा लेने के लिए उस दुकानदार से कुछ देर के लिए अलग हुआ था , तभी मैंने इससे सोने के सिक्कों की मांग कर ली थी। इसकी परीक्षा के लिए ,अलग ले जाने का उद्देश्य मेरा यही था किसी तरह इसी के माध्यम से ,हम अपना बचाव ढूंढ सकें वरना आज हम उसी मेले में फँस गए होते या फिर उन तांत्रिकों के दास बन गए होते।
इसने तुम्हारी किस तरह से मदद की ? अफरोज ने पूछा।
मैंने इससे पचास सोने के सिक्के मांगे थे , और इसने मेरी उन पचास सिक्कों के पाने में सहायता की।
एक 'आईना 'भला कैसे सोने के सिक्के दिलवाने में मदद कर सकता है ? इसके पास क्या सोने के सिक्के हैं? सूरज बोला।
नहीं, इसके पास कोई सिक्के नहीं हैं , इसकी ताकत इतनी है ,कि यह जादूई है और इसने अपने जादू से , मुझे एक सोने के व्यापारी की दुकान में पहुंचा दिया , और मैं वहां से पचास सोने के सिक्के निकाल लाता हूँ रोहित ने सबको सच बता दिया और अपने हाथ में ,जो सोने के सिक्के उसने छुपाए हुए थे वह भी उन्हें दिखा दिए।
यह देखकर सभी बच्चे अचंभित हो गए , रोहित की बुद्धिमानी पर प्रसन्न भी हुए , कि समय रहते उसने बुद्धिमानी से कार्य लिया , और हम सब बच्चे गए।
कुछ सोचते हुए, टॉम बोला -इसका मतलब है ,तुमने चोरी की है। तुमने उस स्वर्णकार की दुकान से सोने के सिक्के चुराए हैं।
यह हम कह सकते हैं ,किंतु उस समय यही आवश्यक था।
हमें तो तीस सिक्कों की ही जरूरत थी फिर तुमने पचास सिक्के क्यों लिए ? सूरज ने पूछा।
ज्यादा सिक्के तो इसीलिए लिए , ताकि तुम आगे मेला घूम सको तो उसमें काम आएं , हो सकता है ,वह तांत्रिक भी अपनी बात से पलट जाते , और ज्यादा सिक्कों की मांग करने लगते , इसीलिए मैंने सुरक्षा के हेतु पहले ही , कुछ ज्यादा सिक्के रख लिए , अब मैं सोचता हूं , दुकानदार के हमने तीस सिक्के अपने लाभ के लिए ले लिए किंतु बाकी बचे सिक्के मैं वापस करना चाहता हूँ।
यहां क्या हो रहा है ? स्कूल की सुपरवाइजर बूढ़ी भूतनी मारिया ने बच्चों से पूछा -आप लोग अपनी -अपनी कक्षा में क्यों नहीं है ?
अपनी सुपरवाइजर की बात सुनते ही सभी बच्चे इधर उधर हो गए जिसको जो भी दरवाजा दिखलाई दिया या दीवार दिखलाई दी ,उसी में समा गया। निम्मी आज मोना डायन की कक्षा में चली गई, उस समय वह बच्चों को रूप बदलना सिखला रही थी। निम्मी धीरे से कक्षा के पीछे की बेंच पर जा बैठी किंतु उसकी दृष्टि इतनी तेज थी , उसने निम्मी के बैठते ही ,कड़क आवाज में उसे आवाज लगाई -अब आ रही हो , क्या पढ़ने और सीखने का कोई समय नहीं होता , उसकी आवाज सुनकर निम्मी थरथर कांपने लगी। तब तक वह नजदीक आ गई थी और बोली - जब कक्षा में मैं होती हूं, तो मेरे नियम चलते हैं , कहते हुए उसने अपनी चोटी से निम्मी को गर्दन से पकड़ लिया और उसे हवा में लटका दिया , कहने को तो निम्मी भी एक आत्मा ही थी , किंतु जब मोना डायन की चोटी ने उसे पकड़ा तो उसे ,दर्द होने लगा। निम्मी ने घबराते हुए उससे तुरंत क्षमा याचना की। कुछ देर इसी तरह बिलबिलाते रहने के पश्चात , मोना ने उसे यह कहकर छोड़ दिया यह तुम्हारी पहली गलती है

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