तेरे एहसासों में ,तेरी यादों में आऊंगी।
कभी तेरी मुस्कुराहटों में आऊँगी।
कभी तेरे सपनों में आउंगी
कभी तेरी यादों में तुझको गुदगुदाउंगी।
मैं तुझसे मिलने आऊँगी।
कभी तेरी गजलों में ,इठलाऊँगी ,
कभी तेरी ,कविताओं में शर्माऊँगी।
लिखते -लिखते, कलम ठहर जाएगी ,ग़र !
तब भी, मैं तेरे शब्दों में आउंगी।
मैं ,तुझसे मिलने आउंगी।
शीत में ,कभी ग्रीष्म में ,
तू जब भी चाहेगा ,चली आऊंगी।
सुबह की ओस में ,आऊँगी।
बिस्तर की गर्माहट में आउंगी।
मैं तुझसे मिलने आऊँगी।
मैं तेरे प्यार के रंगों में आऊँगी।
भूल जायेगा ग़र ,तू मुझको ,
तेरी आँखों की नमी में आऊँगी।
तेरे दिल की धड़कनों में गुनगुनाऊँगी।
मैं तुझसे मिलने आऊँगी।
तेरे ख्यालों के कैनवास पर ,
जब भी पुकारेगा मुझे ,तेरी यादों में समा जाऊँगी।
तेरी रूह की रौशनी में ,तुझे रौशन कर जाऊँगी।
मैं तेरी परछाई हूँ ,तुझसे मिलने आऊँगी।