Tujhse milne aaungi

 तेरे एहसासों में ,तेरी यादों में आऊंगी। 

कभी तेरी मुस्कुराहटों में आऊँगी। 

कभी तेरे सपनों  में आउंगी 

कभी तेरी यादों में तुझको गुदगुदाउंगी। 

मैं तुझसे मिलने आऊँगी। 


कभी तेरी गजलों में ,इठलाऊँगी ,

कभी तेरी ,कविताओं में शर्माऊँगी। 

लिखते -लिखते, कलम ठहर जाएगी ,ग़र !

तब भी, मैं तेरे शब्दों में आउंगी। 

मैं ,तुझसे मिलने आउंगी।

शीत में ,कभी ग्रीष्म में ,

तू जब भी चाहेगा ,चली आऊंगी। 

सुबह की ओस में ,आऊँगी।

बिस्तर की गर्माहट में आउंगी।

मैं तुझसे मिलने आऊँगी। 

मैं तेरे प्यार के रंगों में आऊँगी। 

भूल जायेगा ग़र ,तू मुझको ,

तेरी आँखों की नमी  में आऊँगी। 

तेरे दिल की धड़कनों में गुनगुनाऊँगी। 

मैं तुझसे मिलने आऊँगी। 

तेरे ख्यालों के कैनवास पर ,

जब भी पुकारेगा मुझे ,तेरी यादों में समा जाऊँगी। 

तेरी रूह की रौशनी में ,तुझे रौशन कर जाऊँगी। 

मैं तेरी परछाई हूँ ,तुझसे मिलने आऊँगी।    

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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