Bachpan ke khel

 कहाँ रहा ?बचपन !

कहाँ गए ?बचपन के खेल !

वो  बचपन ! जो बीतता था ,

अपने घर की छाया में ,


प्रतिपल ,सीखता था ,रिश्ते ,

खेलता था ,दोस्तों  के  संग ,

 लड़ाता था , पेज पतंगों से ,

 कुलांचे भरता था ,उमंगों से ,

आज का बचपन -

 पहुंचता है ,'प्ले स्कूल '

अजनबी चेहरों को देख,

 सुबकता है ,बचपन !

 ढूंढता है ,करता है ,

तलाश अपनों की ,

रिश्तों की पहचान नहीं ,

करता है ,पहचान, रंगों की ,

जो बेरंग बनाती , जिंदगी को ,

रात -दिन की ,मशक्क़त !

अजनबी बन, माता -पिता ,

खर्चों के बोझ तले, 

 लड़ते रात -दिन। 

किससे प्यार मिले ?

केेसा ये बचपन !

वीडियो गेम में , 

बीते ,बचपन ,

आँखें हुई कमजोर ,

कैसे पहचाने ?

रिश्तों की डोर !

न बचपन भीगा प्यार में , 

जवानी डूबी इंतजार में ,

बुढ़ापे में मिला अकेलापन ,

न बचपन ,के खेल निराले ,

न मिला ,दादी -दादा का संग ,

अच्छे जीवन की तलाश में ,

भटके जीवनभर......  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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