चारों तरफ बर्फ ही बर्फ, नजर आ रही थी , ऐसे किसी अनजान इलाके में वो लोग पहुंच गए ,वहां किसी से जान -पहचान तो, बढ़ानी नहीं थी। दूर किसी गुफा में ,कुंभर्क ने अपना डेरा जमाया। माता -पिता ने बस्ती से दूर ,एकांत में घर लिया। कुंभर्क को वो गुफ़ा बेहद पसंद आई ,किसी को किसी से कोई मतलब नहीं ,कौन क्या कर रहा है ? वहाँ की आबादी भी कम ही थी ,जो थे ,ठंड के कारण ,बाहर कम ही निकलते थे ,आवश्यकता पड़ने पर ही ,बाहर निकलते थे।
चलो ,कुंभर्क ! कम से कम ,उस गांव से बाहर तो आया ,उन गांववालों को उससे छुटकारा तो मिला कहकर प्रभा सुबोध से बोली- अब कुंभर्क को उसकी शैफाली कब मिलेगी ?
नहीं , अभी उसे शैफाली नहीं मिलेगी पहले तो ,वह तांत्रिक बाबा उनसे मिलने आएंगे।अच्छा ,चलो ,कम से कम ,वो इसका कुछ तोड़ तो उन्हें बताएंगे प्रभा ने अपना अंदेशा जतलाया।
कुंभर्क के माता-पिता उसके पास होकर भी ,उससे थोड़ा दूर ही रहते थे , कुंभर्क दिन में , सामान्य इंसानों वाली ज़िंदगी जीता ,रात्रि में एक बर्फीली गुफा में चला जाता। वैसे तो उस इलाके में रात्रि में कोई साहसी ही बाहर निकल सकता था। मजबूरी वश वो निकला भी तो ,कुंभर्क अथवा जंगली जानवरों का शिकार बन जाता किन्तु यहाँ किसी को भी ,कुंभर्क के इस तरह ,शैतान होने का अंदेशा ही नहीं था।
एक दिन ,तांत्रिक बाबा ,जमींदार साहब को दिखे ,उनको वे अनुनय -विनय करके अपने घर ले आये ,घर पर उनका स्वागत किया ,कोई साधारण मानव होता तो, उससे लड़ बैठते किन्तु जानते थे -ये अद्भुत शक्तियों के ज्ञाता हैं ,तब उनसे अपने बेटे के इस ''श्रापित जीवन ''को सही करने का उपाय पूछा -तब उन्होंने बताया कि जीवन में एक सुंदर कन्या का आगमन होने वाला है वह दैवीय शक्तियों से परिपूर्ण है वह इसके पिछले जन्म की संगिनी है वह इसे श्राप से शीघ्र ही मुक्त करेंगी , आसुरी शक्तियां अपना प्रभाव दिखाएंगीं ,तब दैवीय शक्तियों का भी अपना अलग प्रभाव होगा किंतु दैवीय शक्तियां आसुरी शक्तियों पर अपना प्रभाव जमायेंगी किन्तु उसके लिए अभी समय है ,बहुत कुछ देखना पड़ सकता है।
अब और क्या देखना बाकी बचा है ? जमींदार साहब ने उन तांत्रिक बाबा से पूछा।
वे मुस्कुराए और बोले - अभी मैं चलता हूं, तुम्हारे बेटे से भी मिलना है।
आइए बाबा !मैं बतला देता हूं ,वह किधर रहता है ?
शिव शंभू ! क्या हम ,अपने ही चेले को ही नहीं पहचान पाएंगे, उसकी शक्तियां हमें अपनी और स्वतः ही खींच लेंगी और वह मुस्कुराते हुए ,बाहर निकल गए।
कुंभर्क की गुफा के समीप पहुंचने पर , उन्होंने देखा ,आसपास की बर्फ पिघल रही है , उस गुफा में शैतानी शक्तियां अपने पूरे जोरों पर थीं , वो समझ गए ,इसी गुफा में कुंभर्क रहता है। उन्होंने बाहर से ही, आवाज लगाई - कुंभर्क ! कुम्भर्क !
आइए महाराज !आइये ! कहते हुए ,कुंभर्क अंदर से बाहर आया।
तुमने मुझे कैसे पहचान लिया? तांत्रिक ने आश्चर्य से पूछा।
आप ही तो, मेरे शैतानी शक्तियों के मालिक हैं आपने ही मुझे इस राह पर चलाया है आप ही मुझे, मेरे सपनों में आकर , समझाया करते थे।
कुंभर्क , की ऐसी बातें सुनकर वह अघोरी खुश हुए , और बोले सही कहा, हमने तुम्हें एक कार्य के लिए पैदा किया है। तुम्हें शैतानी शक्तियों को बढ़ाना है, और इस पृथ्वी पर शैतान का वर्चस्व कायम करना है , कहते हुए वह गुफा के अंदर चले गए और अंदर चले गए , न जाने वह गुफा कितनी गहरी थी यह देख कर ,कुंभर्क को भी आश्चर्य हुआ। हम चाहें तो, यह गुफा पाताल तक भी जा सकती है और पाताल के राजा से भी मिलवा सकती है , तुम्हारा कार्य शैतानी शक्तियों को बढ़ाना है और शैतान को जागृत करना है।
ये अघोरी, कितना चालाक है ? प्रभा क्रोध और आश्चर्य से बोली -एक तरफ तो यह उसके माता-पिता को आश्वासन दे आया, दूसरी तरफ कुंभर्क को शैतानी ताकतों को जगाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।
तुम क्या समझती हो ? क्या वह इतना शीघ्र बदल जाएगा, पहले भी तो इसके माता-पिता को धोखा दे चुका है। ये दोबारा भी, इसके झांसे में आ गए , सुबोध ने समझाया। उन्हें इतना शीघ्र उस अघोरी पर विश्वास नहीं करना चाहिए था।
आगे क्या हुआ ? यह तो बताइए ! प्रभा ने उत्सुकता से पूछा।
कुंभर्क की शक्तियां ,दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही थीं। अब तो उसने वही के किसी कॉलेज में दाखिला भी ले लिया था। लड़कियां उसके चेहरे के आकर्षण को देखकर ,उस पर मर मिटने को तैयार रहती थीं। उसकी आकर्षक आंखें ,उनको अपनी ओर खींचती थीं। उसका शरीर उसका डील -डौल , बहुत ही आकर्षक था, लड़कों में उसके लिए ईर्ष्या पैदा होती थी , कुछ उससे दोस्ती करना चाहते हैं ,तो कुछ उससे घृणा भी करते थे। कॉलेज के हर कार्यक्रम में वो प्रथम आता था। उसकी शैतानी शक्तियां दिन में दिखती तो नहीं थीं किंतु उसी के अंदर थी ,जो उसे ताकत दे रही थीं। इससे कई लड़के उसके दुश्मन भी हो गए।जो उसके आने से पहले ,अपनी मेहनत के बल पर उस कॉलिज में अपना नाम बना चुके थे। उन्हें लगता था, इसके अंदर अवश्य ही कुछ है। एक बार एक लड़के को उस पर शक हो गया और उसके पीछे पीछे उसकी गुफा तक गया। यह देख कर उसे आश्चर्य हुआ , यह एक गुफ़ा में रहता है। तब तक शाम हो चुकी थी , उस लड़के ने उस गुफा के अंदर झाँका , जैसे ही वह उस गुफा में गया उस गुफा से फिर कभी बाहर नहीं आया। जब विरार अंदर गया तो उसने देखा -कि वहां कोई और नहीं एक शैतान है। वह बुरी तरह घबरा गया और भागने का प्रयत्न किया किंतु शैतान ने उसे अंदर से ही पकड़ लिया।किसी को कुछ पता नहीं चला ,कि विरार कहां गया ?
अगले दिन कॉलेज में शिकायत आई, कि उनका लड़का कॉलेज आया था किंतु कॉलेज से घर नहीं पहुंचा उसकी बहन पूछताछ करती घूम रही थी ,किंतु किसी से भी ,संतोषजनक जवाब नहीं मिला। आज कुंभक ने शैतान को नरबलि दी थी ,और स्वयं भी भोग लगाया था। कभी-कभी कुंभर्क नहीं चाहता -कि यह कार्य करें ,किंतु वह अघोरी उसे मजबूर कर देता ,उसके दिमाग में घुस जाता ,तब वह, वही करता जो अघोरी चाहता।

