Do kavitayen !

कोई देख रहा है -

कोई तो है ,जो परवाह करता है। 

कोई तो है ,जो साथ चलता है। 

कोई तो है ,जो एहसास कराता है। 

मेरा अंतर्मन ,भीतर झांकता है। 

लगता है ,कोई देख रहा है। 


 मेरे कर्मों का हिसाब- किताब !

 या मेरा साथ निभा रहा है...... 

पल पल जो, साहस बढ़ा रहा है। 

कभी न थकना ,आगे बढ़ा रहा है। 

वह मेरे अंदर बैठा ,मुझको चला रहा है। 



मैं पूछती हूँ !

कैसे  हैं ,आप ! ये  पूछती हूँ। 

अपना तनिक भी, ख्याल नहीं । 

कितने , बेज़ार हो गए हैं ?



जीने के कैसे ?आसार हो गए हैं। 

यह जानती हूं ,कि दूर हूँ  तुमसे,

तन्हाई में , मुस्कुराते क्यों नहीं ?

तुम कहते क्यों नहीं ? किसी से ,

सब अपने अंदर, समा रखा है।

अपने  भावों को, छुपा रखा है। 

कहीं कोई दर्द , दबा रखा है। 

तुम सोचते होंगे -

 ख़्याल  नहीं है, तुम्हारा,

 क्यों छुपाते हो ?

अपनों से ही ,दर्द अपना।

क्यों ?इतना दर्द सहते हो

 क्यों किसी से ?कुछ नहीं कहते हो। 



laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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