कोई देख रहा है -
कोई तो है ,जो परवाह करता है।
कोई तो है ,जो साथ चलता है।
कोई तो है ,जो एहसास कराता है।
मेरा अंतर्मन ,भीतर झांकता है।
लगता है ,कोई देख रहा है।
मेरे कर्मों का हिसाब- किताब !
या मेरा साथ निभा रहा है......
पल पल जो, साहस बढ़ा रहा है।
कभी न थकना ,आगे बढ़ा रहा है।
वह मेरे अंदर बैठा ,मुझको चला रहा है।
मैं पूछती हूँ !
कैसे हैं ,आप ! ये पूछती हूँ।
अपना तनिक भी, ख्याल नहीं ।
कितने , बेज़ार हो गए हैं ?
जीने के कैसे ?आसार हो गए हैं।
यह जानती हूं ,कि दूर हूँ तुमसे,
तन्हाई में , मुस्कुराते क्यों नहीं ?
तुम कहते क्यों नहीं ? किसी से ,
सब अपने अंदर, समा रखा है।
अपने भावों को, छुपा रखा है।
कहीं कोई दर्द , दबा रखा है।
तुम सोचते होंगे -
ख़्याल नहीं है, तुम्हारा,
क्यों छुपाते हो ?
अपनों से ही ,दर्द अपना।
क्यों ?इतना दर्द सहते हो
क्यों किसी से ?कुछ नहीं कहते हो।

