Bhram

समस्त जीवन ही ,एक भ्रम है ,

मरेगा वही ,जो पैदा हुआ है। 

क्यूँ  ? ये 'भ्रम ',पाल रखा है।

'जी का जंजाल 'बना रखा है।  

आया है ,तो क्या ?जायेगा नहीं ,


बचपन ने भी ,साथ छोड़ दिया।

यौवन ने भी ,कहां साथ दिया ?

 ढ़ली उम्र , छिपते सूरज सी !

रिश्तों ने भी, साथ छोड़ दिया। 

लुभावना सौंदर्य !भी चला गया। 

जीवन के साथी भी , बिछुड़ गए। 

जो उत्प्नन हुआ ,सब नष्ट हो गया। 

जो आया दुनिया में , चला गया। 

जीवन के बाद ''भ्रम ''सारा मिट गया। 





 

लुभावना सौंदर्य !क्या जायेगा नहीं। 

जीवन के साथी ,क्या बिछुड़ेंगे नहीं ?

आया बुढ़ापा ,वो  क्या जायेगा नहीं ?

उत्प्नन हुआ ,तो क्या नष्ट होगा नहीं ?

आया दुनिया में ,तो क्या जायेगा नहीं ?



laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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