समस्त जीवन ही ,एक भ्रम है ,
मरेगा वही ,जो पैदा हुआ है।
क्यूँ ? ये 'भ्रम ',पाल रखा है।
'जी का जंजाल 'बना रखा है।
आया है ,तो क्या ?जायेगा नहीं ,
बचपन ने भी ,साथ छोड़ दिया।
यौवन ने भी ,कहां साथ दिया ?
ढ़ली उम्र , छिपते सूरज सी !
रिश्तों ने भी, साथ छोड़ दिया।
लुभावना सौंदर्य !भी चला गया।
जीवन के साथी भी , बिछुड़ गए।
जो उत्प्नन हुआ ,सब नष्ट हो गया।
जो आया दुनिया में , चला गया।
जीवन के बाद ''भ्रम ''सारा मिट गया।
लुभावना सौंदर्य !क्या जायेगा नहीं।
जीवन के साथी ,क्या बिछुड़ेंगे नहीं ?
आया बुढ़ापा ,वो क्या जायेगा नहीं ?
उत्प्नन हुआ ,तो क्या नष्ट होगा नहीं ?
आया दुनिया में ,तो क्या जायेगा नहीं ?
