कुंभर्क का आज ,शैतानी रूप ,उसके पिता ने भी देखा था ,वो अपने सामने किसी की हत्या नहीं देख सकते थे, जबकि हरिया तो उनका ड्राइवर है। बेचारा बाल -बच्चे वाला आदमी है ,इसे कुछ हो गया तो गांववालों और उसके परिवार को क्या जबाब देंगे ?उन दोनों की मौत [दीनदयाल और भीमा ]से तो किसी तरह से बचाव कर लिया किन्तु इस समय ये सब सोचने का नहीं था। उस समय तो किसी भी तरह से उस राक्षस से कैसे जान बचाई जाये ? इसी कारण उन्होंने उस पर बंदूक भी चला दी किन्तु उसे कुछ नहीं हुआ ,शिकार कुंभर्क के हाथों से जा रहा था, वो उनका पीछा कर रहा था। गाड़ी जमींदार साहब चला रहा थे क्योंकि उन्हें खतरे का पहले ही आभास हो गया था। हरिया इस बात को समझ नहीं सका ,वो तो ''छोटे सरकार ''के मिलने की प्रसन्नता में उसी के संग आ रहा था। जिसका ख़ामियाजा उसे इतनी जद्दोजहद के पश्चात भी, अपनी जान देकर चुकाना पड़ा। जाते समय ,एक प्रश्न उसकी आँखों में था ,जिसका जबाब उन्होंने उसे पूरी ईमानदारी से दिया। मरते समय तो किसी से झूठ नहीं बोल सकते थे।
हरिया तो जा चुका था ,उसका शरीर जमीन पर पड़ा था और वो उसकी मोेत से दुःखी थे ,आज पहली बार उन्हें आभास हो रहा था कि उन्होंने उस शैतान को पालकर ,कितनी बड़ी गलती कर दी ?किन्तु ये वक़्त शोक मनाने का नहीं था उन्होने शीघ्र ही गाड़ी को लेकर ,वहाँ से भाग जाना ,उचित समझा। जैसे ही वो मुड़े ,मौत उनके पीछे ही खड़ी थी। उसके चेहरे पर वह्शीयत दिख रही थी और वो गुर्रा रहा था। अब वो गाड़ी में कैसे बैठें ?गाड़ी के दूसरी तरफ वो था ,गाड़ी में बैठने का अर्थ था उसके और करीब आ जाना। घबराहट के कारण उनका गला सूख गया ,वो बोले -कुंभर्क !कुंभर्क ! मैं तुम्हारा पिता हूँ ,अपने असली रूप में आओ !
बदले में ,उसने गाड़ी को बड़ी जोर से हिलाया ,उन्हें लग रहा था ,आज उनकी मौत भी निश्चित है ,वे जानते थे ,उसका शिकार अभी भी मेरे समीप पड़ा है ,वो गाड़ी में भी नहीं बैठ पा रहे थे और भाग भी नहीं सकते थे। भागने से भी क्या हो जाता ? वो उसके दौड़ने और लम्बी छलांग लगाने का हुनर देख चुके थे।वो उससे छुपकर नीचे की तरफ बैठ गए ,ताकि उन्हें न देख पाए किन्तु वो भूल गए शैतान को तो रक्त की गंध आ जाती है ,जिसमें कि हरिया खून से लथपथ वहीँ पड़ा था। वो धीरे -धीरे हरिया से दूर होने का प्रयास करने लगे। जैसे -जैसे वो दूर होते जा रहे थे ,कुंभर्क करीब आता जा रहा था। मन ही मन दुखी थे ,जीते जी तो, इसे न बचा सका इसकी लाश भी वापस नहीं ले जा सकता किन्तु इस समय अपनी जान तो बच जाये। जैसे ही कुंभर्क उस लाश के करीब आया और उसे घूरने लगा। पहले उसकी अंगुलियां इस तरह तोड़ रहा था जैसे मुंगफली छील रहा हो। उस दृश्य को देखकर एकबारगी तो उन्हें होश नहीं रहा। तभी उन्होंने तेजी दिखाई और गाड़ी में जा बैठे। गाड़ी स्टार्ट करने की आवाज से उसका ध्यान भंग हुआ और वो उनकी तरफ देखने लगा।
दहशत में ,वो तो जैसे गाड़ी स्टार्ट करना ही भूल गये। हाथ काँप रहे थे ,कुछ समझ नहीं आया किन्तु कुंभर्क हरिया के पास से यानि अपने शिकार के पास से उठा नहीं ,इससे आश्वस्त होते ही ,उनमें हिम्मत आई और वो गाड़ी लेकर ,सरपट दौड़े ,जैसे उनके पीछे कोई भूत लगा हो ,उन्होंने ये भी जानने का प्रयास नहीं किया उनके पीछे वो आ भी रहा है या नहीं। हरिया का क्या हुआ ? अब मौत से बुरा अंजाम क्या हो सकता है ?अपने घर के आगे गाड़ी खड़ी करके ,वो अंदर भागे और वहीं एक बड़ा सा तख़्त पड़ा था उस पर गिर पड़े। आहट सुनकर उनकी पत्नी बाहर आई ,उनकी हालत देखकर घबरा गयी और उसने करीब आकर बोली -ये आपको क्या हुआ ?
किन्तु जमींदार साहब को तो जैसे होश ही नहीं ,बोल ही नहीं निकल रहे थे ,तब वो अंदर जाकर , पानी लेकर आईं। उन्हें अपने हाथ के सहारे से उठाकर पानी पिलाया।पानी पीकर उन्हें थोड़ी राहत मिली किन्तु अभी भी गला सूखा हुआ था ,एक गिलास पानी और माँगा। अपने पति की ऐसी हालत देखकर ,वो घबरा गयीं और बाहर जाकर हरिया से पूछने गयीं किन्तु हरिया तो वहां था ही नहीं ,शायद अपने घर चला गया हो सोचकर वापस आ गयीं ,उन्होंने देखा ,जमींदार साहब ,पास रखे पानी के जग से ही मुँह लगाकर पानी पी रहे हैं। उनके पास आकर उन्हें संभाला और उनसे जग लेकर पूछा -अब आप कैसा महसूस कर रहे हैं ? वो तो ये जानने की इच्छुक थीं आख़िर उनके साथ क्या हुआ था ?
थोड़ी राहत मिलने पर जमींदार साहब बोले -आज तो मौत को बिल्कुल सामने देखकर आ रहा हूँ ,न जाने ऊपर वाले ने क्या सोचा है ? जो जीवन के कुछ पल और उधार दे दिए।
ऐसा क्या हो गया ?विस्तार से बताइये ,जमींदारिनी जी उत्सुकता से बोलीं -और ये हरिया आपको ऐसी हालत में छोड़कर ,ऐसे ही चला गया ,उसको आपके साथ होना चाहिए था। आपकी ज्यादा हालत बिगड़ जाती तब मैं ,अकेली कैसे और क्या करती ?
उनकी ये बात सुनकर ,जमींदार साहब रोने लगे। रोते -रोते जब उन्हें ,काफी देर हो गयी ,तब बोले -सब कुछ समाप्त हो गया।
मैं कुछ समझी नहीं ,
हरिया ,नहीं रहा।
मतलब !
हरिया ,उसका शिकार हो गया।
वो घबरा कर बोलीं -किसका ?किसी आशंका से घबराकर पूछा -ये क्या कह रहे हैं ?
जो तुम समझ रही हो ,उनके इतना कहते ही ,वो दुःख और आश्चर्य से वहीं बैठ गयीँ।
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