Sapnon ki library

 कुछ किताबें हैं ,जो......  तेरी याद में आज भी रखीं हैं। 

आज भी मैंने, अपने दिल की लाइब्रेरी में सजा रखी हैं। 

इक तेरी याद वो...... जब तुम मेरे जीवन में आये थे। 

इक तेरी याद वो,जब हमने साथ में प्यार के नग्मे गाये थे।

तेरी हर वो याद.... मैंने सीने में छुपा रखी है। 

आज भी वे यादें ,बड़े क़रीने से सजा रखीं हैं।


इक तेरी याद वो ,जब 'प्यार की बारिश 'में हम भीगे थे ,

दूर -दूर रहकर भी , हम दिल ही दिल में एक हो गये थे। 

बस वही यादें ,आज भी.... सीने में बसा रखीं हैं। 

कुछ किताबें हैं ,जो आज भी दिल में सजा रखीं हैं। 

वो पल ,जो तेरे आने पर दिल धड़काता था। 

हर लम्हा ,बमुश्किल ,इंतजार में कटता  था। 

तेरी तन की वो महक़ ,आज भी सांसों में बसा रखी है।

मेरी किताब का हर ,पन्ना कहता है -

तेरी ही खुशबू है ,जिसने ये किताबें ,महका रखी हैं। 

हम छुप -छुपकर मिलते थे ,दिल ही दिल में घबराते थे। 

जब भी सामने होते ,तुम टुकुर -टुकुर निहारा करते थे ,

 शर्म से गाल मेरे लाल हो जाते थे। 

आज वो ही गर्माहट ,वो ही हया नैनो में बसा रखी है। 

तेरी याद में ,कुछ किताबें आज भी मैंने ,

अपने 'सपनों की लाइब्रेरी 'में सजा रखी हैं।

चाय की गर्माहट ,बरसात की ठंडक इनमें  बसा रखी हैं।

तेरी याद में ,आज भी कुछ यादें हैं ,जो सजा रखी हैं।      

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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