कुछ किताबें हैं ,जो...... तेरी याद में आज भी रखीं हैं।
आज भी मैंने, अपने दिल की लाइब्रेरी में सजा रखी हैं।
इक तेरी याद वो...... जब तुम मेरे जीवन में आये थे।
इक तेरी याद वो,जब हमने साथ में प्यार के नग्मे गाये थे।
तेरी हर वो याद.... मैंने सीने में छुपा रखी है।
आज भी वे यादें ,बड़े क़रीने से सजा रखीं हैं।
इक तेरी याद वो ,जब 'प्यार की बारिश 'में हम भीगे थे ,
दूर -दूर रहकर भी , हम दिल ही दिल में एक हो गये थे।
बस वही यादें ,आज भी.... सीने में बसा रखीं हैं।
कुछ किताबें हैं ,जो आज भी दिल में सजा रखीं हैं।
वो पल ,जो तेरे आने पर दिल धड़काता था।
हर लम्हा ,बमुश्किल ,इंतजार में कटता था।
तेरी तन की वो महक़ ,आज भी सांसों में बसा रखी है।
मेरी किताब का हर ,पन्ना कहता है -
तेरी ही खुशबू है ,जिसने ये किताबें ,महका रखी हैं।
हम छुप -छुपकर मिलते थे ,दिल ही दिल में घबराते थे।
जब भी सामने होते ,तुम टुकुर -टुकुर निहारा करते थे ,
शर्म से गाल मेरे लाल हो जाते थे।
आज वो ही गर्माहट ,वो ही हया नैनो में बसा रखी है।
तेरी याद में ,कुछ किताबें आज भी मैंने ,
अपने 'सपनों की लाइब्रेरी 'में सजा रखी हैं।
चाय की गर्माहट ,बरसात की ठंडक इनमें बसा रखी हैं।
तेरी याद में ,आज भी कुछ यादें हैं ,जो सजा रखी हैं।
