किसी के हिस्से में ,मोहब्बत आई ,
किसी के हिस्से में ,दर्द का पैग़ाम आया।
किसी के हिस्से में , इबादत आई ,
किसी के हिस्से में ,दौलत ओ ज़ाम आया।
कोई करता रहा ,ताउम्र मशक्क़त ,
तो कोई मुँह में... , चाँदी की चम्मच लाया।
कितनी भी ? रियाज़त कर ले ,
मिलेगा वही ,जो प्रारब्ध में लिखवाकर लाया।
कोई बना रहा ,''कोल्हू का बैल ''
तो किसी ने घर बैठे ही ,दूध -मलाई खाया।
माना कि ,'परिश्रम है सफ़लता की कुँजी ',
उसे मिला वही ,जो....... क़िस्मत में पाया।
माना कि ,कभी -कभी किस्मत देती नहीं साथ ,
तब परिश्रम और धैर्य से उसने क़िस्मत को भी छकाया।
