Haunted [part 24]

सभी ''भूत बच्चे ,''भूत पुस्तकालय ''में प्रवेश करते हैं ,नई -नई किताबों की जानकारी लेते हैं। तभी उनकी आवाज के कारण ,उन्हें लगा ,जैसे किसी की नजरें उन्हें घूर रहीं हैं। तब उन्होंने देखा दो लाल -लाल ,बड़ी -बड़ी ऑंखें ,उन्हें घूर रहीं हैं। ये देखकर बच्चे ड़र जाते हैं , आवाज  गूंजती है -मैं इसी तरह सभी बच्चों पर नजर रखता हूँ ,हीहीहीहीही ,ये आवाज उस पुस्तकालय के संरक्षक की थी। तब उसने बताया ,तुम्हें भी उड़कर ऊपर जाने की आवश्यकता नहीं ,बल्कि पुस्तकें स्वयं ही उड़कर तुम्हारे पास आ जाएँगी। 

क्या ???सभी बच्चों के आश्चर्य से मुँह खुले के खुले रह गए। 

हाँ ,बच्चों ,इस भूत पुस्तकालय की किताबें भी उड़ती हैं ,किन्तु तुम्हें कौन सी पुस्तक लेनी है ,उसका नाम स्मरण होना चाहिए। इस सूचना से बच्चे खुश हो जाते हैं और सोचते हैं -ये कार्य करके देखते हैं।उन्हें अन्य किसी किताबों के नाम तो स्मरण नहीं थे ,तब ये कार्य कैसे किया जाये ?कैसे देखा जाये कि किताबें उड़ भी सकती हैं और उड़कर हमारे पास आ सकती हैं। तब निम्मी ने सुझाव दिया ,जो किताबें हमारे पास हैं ,उनके नाम तो हमें मालूम हैं ही ,तब क्यों न इन्हीं को वापस रखकर ,देख लिया जाये। निम्मी का ये सुझाव सभी को पसंद आया ,  तब उन्होंने अपनी -अपनी किताबें वापस रख दीं। तब निम्मी एकदम से बोली -''भूतों का इतिहास ''पुस्तक मेरे करीब आ जाये। 


कुछ देर तक बच्चे उधर नजर गड़ाए देखते रहे ,उनके मन में 'उड़ती  पुस्तक 'को देखने का  उत्साह था ,तभी वो पुस्तक अपने  छोटे -छोटे पंखों से उड़कर ,  उनके समीप आ जाती है। ये देखकर सभी बच्चे ,प्रसन्नता से उछल पड़े।

 श..... श.... श..... शोर नहीं ,तभी चेतावनी देते हुए वो आवाज फिर से गूँजी। 

बच्चे शांत हो गए ,तब बच्चों को तो जैसे ,एक खेल मिल गया और वो किसी भी पुस्तक का नाम पढ़कर वापस आते और तब उसका नाम पुकारकर अपने समीप बुलाते। उन्हें बड़ा अच्छा लगा। तभी संरक्षक की फिर से चेतावनी आई ,कोई भी ,इस तरह से पुस्तकों को परेशान न करें। ये कोई खेल की चीज नहीं है ,जिसे जो भी पुस्तक लेनी है ,वो पुस्तक लेकर अपनी पहचान दे और जाये। तब उन्होंने अपनी -अपनी जानकारी के लिए ,अपनी पसंद की किताबें लीं और अपनी पहचान देकर चले गए। 

अपने कमरे में आकर सभी प्रसन्न थे , कुछ देर पश्चात ,उन्हें खाने पर बुलाया गया। जो भी नए बच्चे थे ,उन्होंने पुराने बच्चों का पीछा किया और ''भोजन स्थल ''पर पहुंच गए। वहाँ की हालत देखकर ,तन्मय ,रोहित ,निम्मी और सूरज ,परेशान हो उठे ,बल्कि उनका मन  तो किया कि उल्टी कर दें क्योंकि वो लोग तो मांसाहारी नहीं थे। अफ़रोज और टॉम खुश तो  हुए किन्तु वे भी परेशान हो उठे ,खाना कच्चा था ,कच्चा मांस और और रक्त से भरे बड़े -बड़े कटोरे थे। कटोरो में रखे छोटे -छोटे ,जीव -जंतु भी बिलबिला रहे थे।

 तभी एक छड़ी लिए ,एक भयानक सा व्यक्ति बच्चों के समीप आता है और कहता है -क्या कोई परेशानी ? 

उसका भयानक रूप देखकर बच्चे ड़र गए  और बोले -नहीं ,नहीं ,ऐसी तो कोई बात नहीं। 

तो खाओ !यहाँ हर चीज का समय है।

 कम से कम ये मीट पका हुआ तो होता अफरोज़ ने कहा। 

नहीं ,यहाँ कौन खाना पकायेगा ? सभी ऐसे ही खाते हैं ,तुम और बच्चों को नहीं देख रहे ,कैसे चुपचाप खा रहे हैं ? 

किन्तु हम लोग तो ,ये सब नहीं खाते ,तन्मय डरते हुए से बोला।

हाहाहाहाहा ,तो तुम घास -फूंस खाते हो उसने जोर से हँसते हुए कहा। 

नहीं ,हम समोसा ,पिज्जा ,बर्गर ,मिठाई सभी खा सकते हैं ,वो दो सौ साल पुराना भूत !इन चीजों के नाम सुनकर बोला -ये सब क्या है ? हमने तो आज तक इंसानों को , जानवरों को ही चीर -फाड़ करके खाया है ,उनका गर्म -गर्म लहू पिया है कितना स्वादिष्ट लगता है ,वो उस खाने और लहू की महक को महसूस करके बता रहा था। 

तब तो आपने ,वो स्वादिष्ट चीज खाई ही नहीं ,वरना ये सब अब तक भूल गए होते ,अब यहाँ ऐसा खाना पकाने का कोई साधन नहीं है। तब हम उन चीजों का स्वाद कैसे लेंगे ?

इसका मतलब है ,ये'' भूत लोक ''अपने पुराने ढर्रे पर चल रहा है ,इसकी कोई उन्नति नहीं हुई ,कब तक ये पुराने तरीके चलते रहेंगे ?

कौन से तरीके ? उस डरावने भूत ने पूछा। 

यही कि ,कच्चा मांस खाना ,इंसानों को खाना ,खून पीना ,बस ,क्या यही जिंदगी रह गयी हैं ?हम भूतों की ,हमें आगे बढ़ना चाहिए भूत लोक में भी नई -नई चीजें आनी  चाहिए ,नए स्वादों का हमें पता होना चाहिए। इंसानों ने कितनी उन्नति की है ,देश -विदेश के व्यंजनों का स्वाद लिया है और हम भूत..... यहीं इन चीजों में अटके हुए हैं। शायद आप भूल गए ,हम भूत भी पहले कभी इंसान थे ,यहाँ आकर हमें क्या मिला ? ये सब..... कहते हुए रोहित ने उन सामानों की तरफ इशारा किया। 


तभी पीछे से किसी महिला की आवाज सुनाई दी ,क्या हो रहा है ? ये सब !

सभी ने अपने स्थान से घूमकर देखा ,सामने एक बहुत सुंदर महिला खड़ी थी , किन्तु उसे देखकर वो डरावना भूत भी ड़र गया और  बच्चों से बोला -ये मोना चुड़ैल हैं ,जो तुम्हारी शिक्षिका हैं और तुम्हें पढ़ाएंगी। 

मेरा परिचय मैं ,इन्हें अपने आप दे दूंगी ,तुम्हें किस काम के लिए रखा गया है ,वो काम भी तुम ठीक तरह से नहीं कर सकते ,तुम्हारा कार्य है ,बच्चों को देखना कि कोई बच्चा ठीक से खा रहा है या नहीं ,किन्तु तुम यहाँ इन नए बच्चों की बातों में लग गए ,तुमसे ये नए बच्चे भी नहीं डरे ,तुम अपनी जिम्मेदारी कैसे पूर्ण करोगे ? कहते हुए उस मोना चुड़ैल ने अपनी चोटियाँ लम्बी की और उसे भयानक डरावने भूत को अपनी चोटियों से लटका दिया। तुमने अपनी जिम्मेदारी ठीक से पूर्ण नहीं की ,इसकी सजा तो तुम्हें अवश्य मिलेगी। 

मोना चुड़ैल देखने में जितनी सुंदर नजर आ रही थी ,उतनी ही क्रूर भी नजर आ रही थी ,जिसे देखकर बच्चे भी ड़र गए।तब वो बच्चों की तरफ गुस्से से देखते हुए बोली -तुम लोग ,खाना क्यों नहीं खा रहे हो ? 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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