Maa mujhe chahti hai !

मां, मुझे चाहती है !


माँ भी न ,कितने रंग दिखलाती है ?

 मुझे लगता,मां बस मुझे चाहती है। 

अक्सरअपने बड़े -भाई बहन को चिढ़ाता था। 

मां मुझे चाहती है........ 

जब चले जाते हो , मेरा ही ख्याल रखती है। 

दीदी के न रहने पर, उसकी चिंता सताती है। 

पता नहीं ,मेरी बच्ची कैसी होगी ?

उन्हें फोन कराती हैं । 

भाई के आने पर ,उसके लिए मिठाई बनाती है। 

मुझे लगता , मां ! मुझे चाहती है। 

जब पास थे, तब उन्हें समझाती थी -

तुम्हारा छोटा भाई है ,मुझ पर लाड़ दिखाती है। 

दीदी के आने पर ,खूब व्यंजन बनाती है।  

कुछ बड़ा हुआ, तब जाना ,मां सभी को चाहती है। 

समय-समय पर ,प्रेम दिखलाती है। 

हां ,मां ! हम सभी को चाहती है। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post