अमृता यश से बताती है , उसे एक फ़िल्म मेकर मिले थे ,किन्तु यश ने तो ,अमृता को फिल्मों में काम के लिए मना कर दिया था , इसीलिए उसने सोचा है ,अपनी सहेली कीर्ति को ,उस फ़िल्म में काम दिलवा देगी। ये बात सुनकर ,यश मन ही मन खुश होता है किन्तु अपने मन की प्रसन्नता ,अमृता से छुपा जाता है। तभी अमृता भी ,उसके सामने अपनी परेशानी रखती है ,उसके पास उस लड़की यानि कीर्ति का कोई नंबर या पता नहीं है। ये सुनकर ,यश चुपचाप चला जाता है।लगभग शाम के समय , यश की सेक्रेटरी का फोन आता है और वो उससे कहती है - मैम ! मैंने कीर्ति जी का नंबर ले लिया है ,आप लिख लीजिये या अपने फोन में सेव कर लीजिये।
ये तुम क्या कह रही हो ? मैंने तो उसका नंबर नहीं माँगा था।
आपने सर से कहा था ,न.... उन्होंने ही मुझे बताया था कि कीर्ति का नंबर ढूंढ़कर लाओ !
तब तुम कहाँ से नंबर लाई ?
मैंने बहुत ढूंढा ,तब जाकर ये नंबर मिला ,अब सर ने कहा था ,काम तो करना ही था ,अपनी मजबूरी और अपना एहसान मुझ पर जतला रही थी
ठीक है ,वो नंबर ले लेती है ,नंबर लेकर कीर्ति को फोन लगाती है -कुछ देर घंटी बजने के साथ ही ,फोन उठता है -हैलो !
हाय ! तुम तो हमें याद करती ही नहीं , आज हमने तुम्हें याद कर ही लिया ,आज ही मैं ,अपने पति से तुम्हारा ज़िक्र करती हूँ और उन्होंने फट से तुम्हारा नंबर मुझे ढूंढकर दिया। अब सुनाओ !केेसी हो ?
कौन ?मैं पहचान नहीं पा रही।
अरे ,तुम्हें हम स्मरण भी नहीं रहे ,हमने तो तुम्हारा स्मरण होते ही ,तुम्हें खोज निकाला ,अरे अभी भी याद नहीं आया, मैं अमृता बोल रही हूँ।अब सुनाओ !क्या हाल है ?
ठीक हूँ ,तुम सुनाओ !कैसे स्मरण किया ?उधर से कुछ रुखा सा स्वर आया।
अपने मतलब से नहीं किया ,बल्कि तुम्हारे लिए ही किया ,आ जाओ ! मेरी कोठी पर , मिलकर बात करते हैं।
तुम्हें मेरे घर का पता तो, मालूम ही होगा ,ये बात अमृता ने जानबूझकर की।
मुझे कैसे पता होगा ?एक बार भी नहीं आई।
ऐसे ही ढूंढ़ लेना ,जिस तरह मैंने तुम्हारे नंबर का पता लगाया ,कहकर अमृता ने फोन काट दिया ,वो जानती थी ,उसका पता भी ये ,यश से ही पूछेगी क्योंकि ये उसकी साली की लड़की जो है।
शाम को ,यश ने अपना उतावलापन छुपाते हुए कहा -नंबर मिला क्या ?
किसका ?
अरे वो ही ! क्या नाम बताया था ? तुमने !भूलने का अभिनय करते हुए बोला -हाँ ,याद आया ,कीर्ति ,यही नाम तो बताया था तुमने।
आज तो सच में ,तुमने मेरे एक बार के कहने पर ही ,ये कार्य कर दिया ,अब तो मेरी नजरों में और भी चढ़ गए हो। अच्छा मैंने तुम्हें कुछ कागज ,हस्ताक्षर करने के लिए दिए थे ,कर दिए।
नहीं ,अभी नहीं ,मैंने अभी पढ़े भी नहीं ,
क्या तुम्हें अपनी बीवी पर भरोसा नहीं रहा ?
नहीं ,ऐसी कोई बात नहीं है। कहकर वो खाना खाकर सोने चला गया ,आज उसने सब्जी के लिए भी कुछ नहीं कहा ,जबकि आज सब्जी उसकी पसंद की नहीं बनी थी ,इसे मैं क्या समझूं ?वो मन ही मन सोच रही थी ,वो सुधर रहा है ,या मेरे साथ जो धोखा कर रहा है ,उसको सुधारने का प्रयास कर रहा है या फिर अपनी साली की बेटी के आने की ख़ुशी में सब भूल रहा है। जो भी है ,ये किसी शैतानी चाल से कम नहीं किन्तु अब अमृता उन चालों पर अपनी चाल इस तरह से चलेगी ,उसका काट भी होगा और वो बचेगी भी। ये तो अच्छा हुआ , इसकी बेटी के जन्म दिन पर उसने ,अपने गुस्से पर काबू कर लिया वरना आज उसे बेइज्जती के सिवा ,उसके हाथ में कुछ नहीं होता।
ख़ैर ! जो भी होता है ,अच्छे के लिए ही होता है ,यही सोचकर उसने अपने को समझा लिया ,अब यश से उसका विश्वास पूरी तरह उठ चुका था ,अब यदि वो प्यार से बोलता भी तो. उसमें भी उसकी कोई चाल नजर आती ,हमेशा सतर्क और चौकन्नी रहती ,इसी से उसने अपनी दवाइयों की भी जाँच कराई ,क्योंकि उन दवाइयों को खाकर ,उसे चक्कर आता रहता था ,तब उसने जाना वो दवाइयाँ इतनी तेज और गर्म हैं ,वो उसको नुकसान ही पहुंचाती ,यही सब तो उस मेडिकल स्टोरवाले ने उसे बताया। जिसे उसने अपनी मैनेजर से कहकर बुलवाया था ,पुरानी वाली मैनेजर भी अब उसके लिए विश्वसनीय नहीं रही थी।
फोन करने के ,तीन दिनों के पश्चात ही कीर्ति ,उसके घर में उपस्थित हो गयी ,उसे देखते ही ,अमृता को क्रोध तो बहुत आया किन्तु जहर का सा घूंट पीकर रह गयी। प्रत्यक्ष बोली -आओ !आओ बहुत दिनों पश्चात मिल रही हो और बताओ !क्या चल रहा है ?
कुछ नहीं ,वही छोटे -मोटे मंच पर नाटक कर लेती हूँ। आजकल ,हुनर की तो ,किसी को कदर नहीं ,तुम बताओ !तुम क्या कर रही हो ?
मेरे पति ने , मुझे काम करने के लिए मना कर दिया ,मुझे एक ऑफर मिला था ,मैंने सोचा ,तुम्हें दिलवा दूँ।
क्या वो मुझे लेंगे ?
हम कोशिश तो कर ही सकते हैं ,तुम अपने घर में बताकर तो आई हो ,शाम को मेरे पति से भी तुम्हें मिलवाती हूँ ,शायद ,तुम उन्हें जानती हो।
नहीं ,मैं भला उन्हें कैसे जानूँगी ? जब उनसे मिली ही नहीं।
मिल भी लेना शाम को आ ही जायेंगे ,किन्तु शाम को यश ,काम का बहाना करके ,घर नहीं आया ,अमृता समझ गयी थी ,वो कीर्ति के सामने आने से बच रहा है , कहीं कीर्ति ही ,कुछ न कुछ कह दे। शाम को अमृता ,कीर्ति के साथ शॉपिंग पर निकली ,उससे बड़े प्रेम से बातें की ,घर आकर दोनों ने खूब बातें की।
कीर्ति सोच रही थी -कहीं मैंने इसे गलत तो नहीं समझ लिया ,बोली -उस धारावाहिक के पश्चात ,आपने मुझसे फिर कोई सम्पर्क ही नहीं रखा।
मैं तो व्यस्त थी ,किन्तु तुम भी तो नहीं मिलीं ,अच्छा अब मैं तुम्हें वो कहानी सुनाती हूँ ,जो उन्होंने मुझे सुनाई थी। एक लड़की जो बहुत अमीर होती है ,वो किसी से बहुत पहले यानि कॉलिज के समय में किसी लड़के से प्यार करती थी। वो दोनों किसी कारणवश बिछुड़ जाते हैं।
तब क्या हुआ ?कीर्ति उस कहानी में दिलचस्पी ले रही थी ,वो सोच रही थी -मुझे इस कहानी में ,अभिनय करना है ,तब कहानी को ध्यान से सुनना होगा ,यही सोचकर उसमें दिलचस्पी दिखला रही थी।
तब एक दिन ,वो दोनों मिलते हैं ,लड़का गरीब था किन्तु वो लड़की महलों की रानी थी ,फिर भी उस लड़की ने अपने प्यार को पहचान लिया उसके लिए तो उसका प्यार उसके करीब था ,यही बहुत था। उसने अपना सबकुछ उस पर न्यौछावर कर दिया किन्तु वो लड़का था चालाक !वो किसी और कारण से ही ,उसे बर्बाद करने आया था। उससे प्यार नहीं करता था ,उसने अपना अलग घर था बसाया। वो उस लड़की को धोखा दे रहा था ,वो लड़की जानना चाहती थी ,उसने उसके साथ ऐसा क्यों किया ?कहकर वो चुप हो गयी।
कहानी तो दिलचस्प है ,इसमें मुझे किसका किरदार निभाना है ?
ये तो तुम उन्हीं से पूछना ,जब मिलोगी ,वैसे एक बात बताओ !उसने ऐसा क्यों किया होगा ?क्या तुम कुछ अंदाजा लगा सकती हो ,अमृता ने प्रश्न किया।
अब मैं क्या जानू ?ये तो वो लेखक ही बता सकता है ,उसने कहानी को क्या नया मोड़ दिया होगा ?
नहीं वो लेखक की अपनी कहानी है ,किन्तु मैं ये जानना चाहती हूँ ,इस कहानी की लेखिका तुम होतीं तो इस कहानी में क्या नये मोड़ पैदा करतीं ?
हो सकता है ,कोई पुरानी रंजिश हो ,जिसका बदला लेने के लिए ये किया हो।
कोई पुरानी रंजिश भी नहीं ,तब क्या नया होना चाहिए ?
किसी की बेइज्जती का बदला लेने के लिए भी वो कर सकता है।
हाँ ,ये हो सकता है ,कोई उसका क़रीबी हो ,उसे अपना बदला लेना है ,तब वो उसके माध्यम से ही अपना बदला पूर्ण करता है। एक बात समझ में नहीं आई , उसका ऐसा कौन सा करीबी होगा ? जिसके लिए वो इतनी परेशानी मोल लेगा।
ऐसा तो कोई भी हो सकता है।
अच्छा अब हम सोते हैं ,कल मार्किट शॉपिंग करने चलेंगे।
ओह !वॉव शॉपिंग ,वैसे एक बात पूछूं !तुम मुझ पर इतनी मेहरबान क्यों हो रही हो ?
मेरा अब इस दुनिया में है ,ही कौन ? मेरा एक भाई था उसे चाचा -चाची ने मार डाला ,दूसरी माँ है ,वो हमेशा पेेसे मांगती है ,उस भाई से मैं कोई मतलब नहीं रखती ,अब पिता रहे नहीं ,मुझे भी किसके लिए ये सब करना है ? अमृता बोली। मन ही मन सोचा ,अब मनपसंद साथी मिला भी तो धोखेबाज़ निकला ,सब अपनी किस्मत का ही दोष है ,किसी को क्या कहें ?
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