सोचा था ,इस जीवन में ही ,जीवन जी लेंगे ,
पिछले जन्म में जो कमियां रह गयी ,अब पूरी कर लेंगे।
इस संसार के आवागमन से छुटकारा पा लेंगे।
कुछ कमियाँ तो....... अभी भी रह गयीं हैं ,
इस ज़िंदगी से भी कुछ ,शिकवे -शिकायतें हैं।
सोचा था , मोहब्बत को भरपूर जी लेंगे।
जो कमियां रह गयीं ,पिछले जन्म में ,अब पूरी कर लेंगे।
मोहब्बत के ,रास्ते भी थे दो , पशोपेश में रहे ,
माशूक़ किसे बनाना है ?जिसने सबको बनाया ,
अथवा , जिसे उसने ''हमारे लिए ''बनाया।
छोटा रास्ता चुन ,सामने खड़े माशूक को ही अपना लेंगे।
मिलकर ,दर्द ओ गम बाँट लेंगे ,जो कमी रह गयी पूरी कर लेंगे।
उन्हीं रिश्तों को निभा लेंगे ,उसी मोहब्बत का सबक लेंगे।
जीवन साथी ,संग जीना भी आसान नहीं ,
जलेबी सी इस ज़िंदगी को , इसी जन्म में संवार लेंगे।
जो मिठास रह गयी थी , अब पूरी कर लेंगे।
इस ज़िंदगी ने ,जलेबी बन , घुमाया बहुत......
स्वाद ही भूल गए ,जो कमियां थीं ,उन्हें गिनते ही रह गए ,
सोचा तो यही था ,यहीं सब ,हिसाब -किताब निपटा लेंगे।
रिश्तों की तुरपन खोलते ,सिलते उसी संग जीवन बिता लेंगे।
उलझे यूँ , ज़िंदगी की पहेली में ,ज़िंदगी कब बीती ?
कब जिया ?ज़िंदगी को !इसी उलझन में रहे बैठे ,
सोचा था ,तुझे ज़िंदगी के इस सफ़र में अपनाकर ,
इस सफ़र को कुछ ख़ास बना लेंगे।
रह गयीं फिर भी ,कुछ शिकायतें इस ज़िंदगी से ,
सोचा था , इस सफ़र को पूर्ण कर, ज़िंदगी सुकून से बिता देंगे।
