Haunted [part 25]

भूत बच्चे ,जब खाना खाने से इंकार कर देते हैं , तब मोना चुड़ैल आती है ,और बच्चों को डांटती है , अपने क्रोध का सबूत वो ,उस भूत को अपनी चोटियों से लटका कर देती है। वो अपनी चोटियों से उसे लटका देती है और कहती है -तुम्हारा कार्य ,बच्चों को सही समय पर, खाना खिलाने का है ,और तुमसे यही कार्य नहीं हो रहा। मोना के क्रोध को देखकर, बच्चे ड़र जाते हैं। तभी उस विद्यालय के प्रधानाध्यापक की आवाज उस विद्यालय में गूंजती है। मोना जी ,यहाँ आइये ! आप  इस विद्यालय की एक अच्छी श्रेष्ठ अध्यापिका हैं ,आपको , इस तरह से क्रोधित होना शोभा नहीं देता। आप सबसे  क्रूर ,और खतरनाक चुड़ैल हैं। बच्चे नए हैं ,थोड़ा डरे हुए भी हैं। बच्चे चारों तरफ को नजर दौड़ाकर देख रहे थे, कि ये आवाज किधर से आ रही है ?कौन हमें देख रहा है ?तब उन्हें दूर दीवार पर ,दो आँखे चिपकी हुई दिखलाई दी। जो लाल -लाल रौशनी से चमक रहीं थीं। 


तभी वो आवाज फिर से गूंजी ,हम मानते हैं ,यहाँ कुछ भूत बच्चे शाकाहारी भी हैं ,उन पर हम कोई जबरदस्ती नहीं करेंगे , इंसानी बच्चों की तरह ,इन पर कोई जबरदस्ती नहीं होगी। भूत बच्चों को जबरदस्ती का जीवन नहीं ,वरन अपनी इच्छा से ,सब सीखना और करना है। अब हमने शाकाहारी बच्चों के लिए भी इंतजाम किया हुआ है। उनके इतना कहते ही ,खाने के बड़े -बड़े डोंगे हवा में तैरते हुए आने लगे और हर बच्चे के सामने से होते हुए गुजरने लगे और बच्चे खुश होकर खाना खाने लगे। 

 मोना को इस बात से ,अपना अपमान लगा ,किन्तु ये विद्यालय के प्रधानाचार्यजी का आदेश था वो शांत रही क्योंकि वो भी जानती थी -वो चुड़ैल है ,तो वो बुरी शक्तियों यानि आसुरी शक्तियों का मालिक ,पाताल लोक का निवासी ,जितनी भी बुराइयां एक हैवान में हो सकती हैं ,वही सब उसमें हैं। इतना क्रूर होने पर भी वो भूत बच्चों को अपनी तरह से रहने की आजादी देता है ,ताकि हर बच्चा अपने -अपने तरीके से चीजों  को अपनाये। किसी को तांत्रिक शैतान बनना है ,किसी को अपना बदला लेना है ,किसी को वेश बदलने की शिक्षा लेनी है ,उन पर किसी भी तरह का कोई बंधन नहीं, यहाँ न ही कोई किसी का संबंधी है ,न ही कोई रिश्ता ,सभी अपने में स्वतंत्र हैं। इसी तरह की शिक्षा है ,जिसको जिससे जो सीखना है ,पहुंच जाता है। प्यार से, स्वेच्छा से सब सिखाया जाता है। किन्तु जब कोई चीज हमारे बच्चों को पसंद आती है ,तब जबरदस्ती भी सीख लेते हैं। इसी विद्यालय से निकलकर जो विद्यार्थी ,आज तक गए हैं ,एक से एक तगड़े प्रेत ,पिशाच ,एक से एक खूंखार और क्रूर बनकर ,इस विद्यालय का नाम रौशन किया है। 

बच्चे ,खाना खाकर अपने -अपने कमरे में आते हैं ,यार !आज तो मजा आ गया ,कई दिनों से ऐसे ही घूम रहे थे ,पेटभरकर खाना भी नही  खाया था ,आज मजा आ गया ,अब थोड़ा आराम करके ,हम जो किताबें , पुस्तकालय से लाये हैं ,उन्हें देखते हैं ,पता तो चले ,भूतों का क्या इतिहास है ?ठीक है ,कहकर वो लोग आराम करते  हैं किन्तु तन्मय को आराम  नहीं करना  था  ,उसने सोचा , उन लोगों के आने से पहले ,मैं इसे पढ़कर देखता हूँ ,उसने सबसे पहले उस पुस्तक को पुकारा ,वो उड़ते हुए ,उसके करीब आ गयी। उसने जैसे ही वो पुस्तक खोली ,सबसे पहले पेज पर एक डरावने भूत की तस्वीर देखकर ,वो ड़र गया ,उसे लगा जैसे ,उस तस्वीर ने उस पर आक्रमण किया हो ,उसने तुरंत ही वो पुस्तक बंद कर दी। तभी उधर से एक बहुत बच्चा किन्तु तन्मय की उम्र से बड़ा ,निकलकर जा रहा था ,उसने तन्मय को इस अवस्था में देखा और पूछा - क्या  हुआ ? भूत होकर भी डर गए। 

वो उस पुस्तक में...... उसके शब्द अटक रहे थे। 

ओह ! वो उसमें जो भूत था उसका ये कार्य है ,पहले उसे डराता है ,वो देखना चाहता है कि इस किताब को पढ़ने वाले में कितना साहस है ? ये उसकी परीक्षा है ,उसके पश्चात वो स्वयं ही ,उस दुनिया की सैर कराने के लिए  ले जाता है ,जो हमने न ही देखी है ,न ही जानी है , बताकर वो निकल जाता है। 

तन्मय डरा हुआ तो था तब उसने सोचा ,इससे तो अच्छा है ,हम सभी दोस्त साथ में रहें ,अलग तो कोई नहीं जाना चाहेगा। तन्मय से शीघ्र ही सबको बुलाया ,आराम बाद में कर लेना आओ ! पहले पुस्तक पढ़ते हैं , उसने जानबूझकर ,उन्हें वो बात नहीं बताई ,रोहित से कहा -तुम इस किताब को खोलो ! जैसे ही उसने वो किताब खोली ,किताब के रक्षक ने उसे भी उसी तरह डरा दिया ,ये देखकर बच्चे एक बार को तो पीछे हट गये ,तभी तन्मय आगे बढ़ा और बोला -आप हमें इस पुस्तक की सैर कराइये !

जो हुक्म !  इससे पहले ,मैं अपना परिचय दूंगा ,मैं इस पुस्तक का रक्षक , नीलमणि हूँ ,जबसे ये पुस्तक बनी है , मैं तभी से ,इसकी रक्षा के लिए नियुक्त कर दिया गया हूँ। 

पुस्तक को रक्षक की क्या आवश्यकता ? टॉम ने पूछा।


मैं इस पुस्तक की सभी जानकारियों की सुरक्षा करता हूँ ,और ये पुस्तक नष्ट न हो ,इसीलिए इसकी सुरक्षा भी करता हूँ ,''भूत लोक ''के लिए ये बहुत क़ीमती है ,इसकी सुरक्षा करना मेरा कर्त्तव्य बन जाता है। अब मैं आपको उस दुनिया की सैर कराऊंगा कहते हुए , उसने हवा में फूंक मारी और बच्चे उसी दुनिया में पहुंच गए। 

तभी एक सुरीली सी आवाज आई ,आपका भूतों के इतिहास में स्वागत है - सबसे पहले आप में से कौन बतायेगा ? भूत कैसे और क्यों बनते हैं ?

जब कोई इंसान मरता है ,तो भूत बन जाता है निम्मी ने बताया।  

ठीक है ,किन्तु आधा सही ,आधा गलत जबाब !

वो कैसे ?

ये बात सही है ,मरने के पश्चात ,भूत बनते हैं ,किन्तु सभी नहीं ,भूत वही बनते हैं ,जिनकी मृत्यु असमय होती है या फिर उसमे मन इच्छाओं में भटकता रहता है ,अपनी इच्छाओं को लिए जो मरता है ,वही भूत बनता है।

हमारी कोई भी इच्छा नहीं है ,निम्मी बोली। 

तुम बच्चे तो हो ,असमय आये हो ,जबसे इंसान इस धरती पर आया ,हमारा अस्तित्व भी ,लगभग तभी से आरम्भ हुआ ,उस समय भी लड़ाइयों में ,बहुत से लोग मरते थे ,बहुत से सिपाही ,जवानी में ही ,अपनी आजादी के लिए मर मिटे  थे ,उसी जज़्बे के साथ भूत भी बन जाते थे।  


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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