Yojana

दिन हो ,या रात्रि !न जाने कितनी बनती है ?योजना !

कुछ भी सही नहीं लगता या होता विफ़ल होती हैं  ,योजना !



पंचवर्षीय हो, सामाजिक व फिर हो पारिवारिक योजना !

पूर्ण कभी होती नहीं ,बन जाती है ,धारावाहिक ये योजना !


एक पूर्ण होती नहीं ,दूसरी आ धमकती है ,नई कोई योजना !

बनती है ,बिगड़ती है ,टूटने के लिए ही बनती है ,नई योजना !


जीवन भर बनती हैं ,अपने लिए बेहतर , देश की नई योजना !

कभी-कभीआर्थिक और कुदरत की मार भी झेलती हैं ,योजना !


बहुत सारी बनती हैं ,कागजों पर सरकारी योजना !

बरसात की बाढ़ में बह जाती हैं ,वे कागज़ी योजना !


हम भी ,अपने जीवन में बनाते हैं ,न जाने कितनी ?योजना !

बिना स्वार्थ ,अटल विश्वास के ,कभी पूर्ण नहीं होती ,योजना !








laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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