अपनी पिछली ज़िंदगी स्मरण करते -करते ,अमृता जी भूल गयीं थी कि आज वो ,इस समय 'जेल 'में हैं ,कुछ संघर्ष भरी स्मृतियाँ ,कुछ प्यारी स्मृतियाँ जिन्होंने उन्हें आज को भुलाने पर मजबूर कर दिया। सलमा की आवाज से वो उन स्मृतियों से बाहर आईं और सलमा का रौद्र रूप देखा ,उन्होंने उसे समझाने का प्रयत्न भी किया किन्तु उसने तो उल्टे ,उन्हें ही समझा दिया और चली गयी। तभी उन्हें कैदी नंबर 'एक सौ बारह ''यानि 'बरखा ' इस जेल की उनकी प्रथम महिला कैदी थी जिसने अन्य महिला कैदियों से उन्हें मिलवाया था। वो उधर से ही जा रही थी ,तभी उन्होंने बरखा को पुकारा -बरखा...... !
वो एक ही आवाज में उनके करीब आ गयी और बोली - क्या बात है ? मैम !
वो अभी सलमा आई ,बहुत ही क्रोध में थी ,क्या कुछ हुआ है ?वो कह रही थी -उन्हें समझा लो !
वो किसकी बात कर रही थी ?
कुछ नहीं ,मैम ! सुंदरी और प्रेमा से उसकी थोड़ी झड़प हो गयी थी इसीलिए नाराज होकर आपसे शिकायत करने चली आई। वो जानती है महम लोग ज्यादातर आपके पास बैठते हैं ,इसीलिए आई होगी।
क्या बात हो गयी ? जो वो ,इस तरह भड़क रही थी।
उसने भी तो ,उनसे कुछ न कुछ कहा था ,वो भी कोई ''दूध की धुली ''नहीं है। वो उन्हें कह रही थी ,उन्होंने भी उसे ''बच्चा चोर ''कह दिया।
बच्चा चोर !!
हाँ ,मैम !वो बच्चा चोर ही तो थी ,बच्चे चुराती थी और उन पर मन्त्र -तंत्र करती थी।
क्या..... अमृता जी आश्चर्य से बोलीं।
हाँ मैम !वो एक बच्चा चोर है ,इतना ही नहीं उन्हें अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए ,उनकी बलि भी देती थी।
हे ,भगवान ! इतना अनर्थ !
और नहीं तो क्या ? इसने ग्यारह बच्चों को मारा है।
हे भगवान !
ये किसी तांत्रिक के पास गयी ,इसे धनवान बनना था ,पैसे -पैसे की किल्ल्त थी। तब ये अपनी परेशानी लेकर एक तांत्रिक, के पास गयी। तांत्रिक ने इसे सांत्वना दिया और कहा -ये शीघ्र ही धनवान बन सकती है,यदि मैं जो उपाय बताऊँ ,वो करने के लिए तैयार हो जाये।
उस तांत्रिक ने क्या उपाय बतलाया ? यदि ये इक्कीस बच्चों की बलि देती है तो इस पर खुदा की रहमत होगी विशेष कृपा बरसेगी और वो धनवान हो जाएगी।
इक्कीस ! तुमने तो बताया -'ग्यारह बच्चों की बलि दी है।'
अगर ये पकड़ी न जाती ,तब तो इक्कीस की ही बलि देती। ये काला जादू करती उन बच्चों को वशीकरण मंत्र से ,पहले उन्हें अपने वश में करती। उस तांत्रिक ने इसे ऐसे सपने दिखाए ,इसे तो इंसान की जान की कीमत उस अमीरी के सामने कुछ भी नहीं लग रही थी। सबसे पहले इसने अपनी पड़ोसन के बच्चे को ही गायब किया ,किसी को भी इससे ऐसी उम्मीद नहीं थी ,मोहल्ले -पड़ोस के बच्चे तो यूँ ही खेलते रहते थे। अचानक ही क़ादिर गायब हो गया। जब शाम को खाने के समय में उसकी अम्मी उसे खोजने लगी ,तो वो कहीं नहीं मिला ,पहले तो सोचने लगी ,इधर -उधर ही गया होगा किन्तु होता तो मिलता। काम से उसके अब्बू भी आ गए ,उनकी पहली औलाद ,दूसरा बालक पेट में ,उसकी माँ की तो हालत बिगड़ने लगी।
फिर क्या हुआ ?मिला या नहीं ,पुलिस को फोन कर देते अमृता जी उत्सुकता से बोलीं।
पुलिस भी बुलाई गयी ,सबसे पूछताछ हुई ,इस पर किसी का शक नहीं गया ,सोचते -'ये बेचारी गरीब !ये बच्चे को चुराकर क्या करेगी? इसके पास तो अपने लिए ही'' दो जून की रोटी ''नसीब में नहीं है। ये उस बालक का क्या करेगी ?सभी के घरों की तलाशी हुई किन्तु इसके घर की तलाशी न ली गयी। इसकी पड़ोसन सोच रही थी ,ये तो मेरी सहेली भी है ,रिश्तेदार भी...... किन्तु इसने उसकी किसी भी बात का लिहाज़ न रखा ,इसने उसका बच्चा ,घर के पीछे कबाड़ में ,बेहोश करके छिपा रखा था।
दुनिया में कैसे -कैसे लोग हैं ?अमृता आश्चर्य से बोली ,फिर क्या हुआ ?
फिर क्या होना था ? जब लोग अपने घरों में सो रहे थे ,इसकी पड़ोसन के घर से सिसकियों की आवाजें आ रहीं थीं , कुछ देर पश्चात ,उसका शौहर अपनी बीवी को हस्पताल ले गया ,वो पहले से ही गर्भवती थी ,दूसरे बच्चे के खोने का ग़म ,उसकी हालत बिगड़ने लगी थी। कुछ देर पश्चात, ये भी बुर्खा ओढ़कर बाहर निकली ,आस -पास का जायज़ा लिया और बच्चे को लेकर दूसरे रास्ते से निकालकर उस तांत्रिक के पास ले गयी।
बताओ ! कितनी बेरहम औरत है ? इसे उस गर्भवती औरत पर तनिक भी तरस न आया।
तांत्रिक के पास जाकर ,वहाँ उसकी बलि देकर चुपचाप अपने घर आकर सो गयी। किसी को भी कानों कान खबर न हुई ,पुलिस भी ढूंढकर थक गयी किसी को भी अंदेशा नहीं था कि इसने ऐसा भी कुछ किया होगा। अभी क़ादिर को गायब हुए चार दिन ही हुए थे ,तभी दूसरे मौहल्ले का एक बच्चा और गायब हो गया। उसको भी बहुत ढूंढा गया किन्तु उसका भी कुछ पता न चला। अब लोग थोड़े सतर्क हो गए ,तब इसने आस -पास के बच्चों को नहीं ,दूर के बच्चे कहीं खेलते मिलते तो उठा लेती। कोई बच्चा पार्क में खेल रहा हो ,तब ये औरत उसकी ताक में रहती। इस तरह ये छह बच्चे उठा चुकी थी। अब पूरे शहर में 'बच्चा चोर' की चर्चा होने लगी। लोग अब पहले से सतर्क हो गए ,पुलिस भी चौकन्नी रहती। अपने बच्चों को बाहर भेजने से ड़रने लगे ,उन्हें अकेले खेलने जाने नहीं देते। यदि कोई बच्चा बाहर जाने की जिद भी करता तब उसके माता - पिता उसके साथ होते। अब किसी बच्चे को उठाना इसके लिए कठिन हो गया।
तब इसने अपने तांत्रिक गुरु से कहा -अब बच्चे उठाना आसान नहीं रह गया है ,लोग पहले से अधिक सतर्क हो गए हैं।
तब उस तांत्रिक ने कहा -कैसे भी करके ,अबकि जो चाँद की रौशनी होगी ,बेहद चमकदार होगी ,जो तुम्हारे घर में बरकत लाएगी इसीलिए पूरे इक्कीस न कर पाओ तो बलि की संख्या ग्यारह तो हो ही जानी चाहिए।
तब सलमा ने ,अपने शहर से बाहर के बच्चों को उठाने की योजना बनाई ,उधर पुलिसवाले परेशान...... कि आख़िर बच्चा चोर कौन है ?

