महानता अपने ही ,कर्मों से होती है ,अपने बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए ,हम किसी महान व्यक्ति का या फिर उससे बड़े या छोटे ने कोई अच्छा कार्य किया हो तब उसका उदाहरण दे देते हैं। देखो ! फ़लाने के बच्चे ने कितना अच्छा कार्य किया ?हमारा उद्देश्य ,अपने बच्चे में दबी भावनाओं ,उसके अंदर दबी कला ,उसके अंदर की प्रतिभा को बाहर निकालना होता है। किसी का भी उदाहरण देकर ,हमें अपने बच्चे को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना होता है।
कभी -कभी हमारे पूर्वजों के उदाहरण देते हैं ,महान लोगों की तस्वीरें घर और स्कूलों में भी लगाते थे ,ताकि उनके जीवन से कुछ सीखने को मिले। जैसे -गांधीजी ,सुभाषचंद्र बोस ,भगत सिंह ,चंदशेखर आजाद ,भीमराव अम्बेडकर ,रानी लक्ष्मीबाई जैसे महान लोगो की तस्वीरें दिखाते और समझाते ,कैसे इन लोगों ने अपने देश के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया ,गलत का विरोध किया। ताकि हम भी उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ें। संस्कारों की सीमा में रहते हुए ,सभी ने अपने -अपने उत्तरदायित्वों को निभाया। शिक्षा में भी ,बच्चों को सही संस्कार और सीख़ मिले इसीलिए ''नैतिक शिक्षा ''जैसा विषय ,विशेष रूप से लगाया गया। जिसमें जैसे आरुणि गुरु भक्त था ,पितृ भक्त , मातृ भक्त और ईश्वर भक्त जैसे लोगों की शिक्षाप्रद कहानियाँ थीं।
इस तरह से देखा जाये तो हमारे बड़ों का सोचना सही था किन्तु उस समय की परिस्थिति में और आज की परिस्थिति में धरती आसमान का अंतर् आ गया है। उस समय देश ,अंग्रेजों का गुलाम था ,छोटी -छोटी रियासतें थीं ,अपनी रियासतों को बचाने के लिए ,लोग मरते और मारते थे। अपने देश को आजाद कराने के लिए भी लोगों ने बड़ी -बड़ी कुर्बानियाँ दीं। देश को आजाद कराया जिसके फलस्वरूप हम आज खुली हवा में स्वांस ले रहे हैं। उस समय के लोगों के सामने यही चुनौती थी किन्तु आज की पीढ़ी के सामने ऐसी कोई भी चुनौती नहीं ,देश को आजाद कराना या फिर अपनी गद्दी बचानी है।
आज के लोगो के सामने भी चुनौतियां हैं , देश की आजादी को बरक़रार रखने की ,अपने परिवार की सुरक्षा ,उसका सम्मान बनाये रखने के साथ -साथ उन्हें शांतिपूर्वक जीवन देना। किसी की भी, किसी से कोई बराबरी नहीं ,आज किसी भी अच्छे परिवार का बच्चा ,आज के वातावरण के अनुकूल ,अपने को ढा लने का प्रयास तो करता है। किन्तु सफल नहीं हो पाता। कारण ,उसकी अपनी योग्यता ,अपनी सोच ,उसके शौक और उसका व्यवहार है आज का बच्चा आज जरूरी नहीं कि वो किसान ही बने ,वो आई.ए.एस. भी बन सकता है। अपनी मेहनत के बल पर, कुश्ती भी कर सकता है। किसी बड़े परिवार का बच्चा एक कलाकार भी बन जाता है। आज के समय में लोगों की सोच बदली है ,जो धरोहर में उसे मिला है ,वही काफी नहीं है।आज के समय में ,अपनी काबिलियत के बल पर ही वो आगे बढ़ सकता है।
