Prem

प्रेम राधा है ,पूजा है ,आराधना है। 

तपस्या है , सीमा है , भावना है। 

इक उमंग है ,सकारात्मक सोच है। 


उन्नति की राह है ,कल्पनाओं का अम्बार है। 

छोटी सी हँसी , मुस्कुराहटों का आसार है।

माना कि, प्रेम के साथ ,विरह है ,वेदना है।  

प्रेम न हो तो ,उदास मन, निराशा को ढोता है। 

गहन अंधकार में ,अपने को खोता है।

प्रेम निश्छल ,निःस्वार्थ ,त्याग का साकार रूप है।  

प्रेम प्रकाश है ,प्रेम बसंत है ,कोयल की कूक है।

सपनों की रुपहली ,धूप है ,भँवरे की गुंजन में है।  

कृष्णा की बांसुरी की ,मधुर तान में  है। 

प्रेम राह दिखाता है ,मंजिल तक पहुंचाता है। 

प्रेम कालिख नहीं , कृष्णा का पीतांबर है। 

राधा की वेणी की महक है ,प्रेम !

सम्पूर्ण समर्पण में है ,''प्रेम !

नायिका के शृंगार में है ,प्रेम !उसके इंतजार में है। 

आज प्रेम कहाँ है ?प्यार ,इश्क़ ,रोमांस बन गया है । 

स्वार्थ से परिपूरित अपनी इच्छाओं का दास बना है। 

आंधी की तरह आता है ,तूफान की तरह  जाता है। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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