Utsav

आज मौसम सुहावना है ,आओ ! मनायें उत्सव !

दिल खुश है , उनसे मिलन है ,मनाते हैं ,उत्सव !

दोस्तों संग ,आज होगा नया अंदाज़ ,मनाएं उत्सव !

 घर में ,आई है' पगार' घरवालों संग मनाएं उत्सव !


आज है त्यौहार !करना है ,धूमधड़ाका !मनाएं उत्सव !

घरवालों संग , दोस्तों संग मनाते हैं ,प्रतिदिन उत्सव !

जेब न खाली हो ,मन में दीवाली हो ,मनते हैं उत्सव !

मन उदास है ,जीने की प्यास है तो मनाओ ,उत्सव !

चलो दोस्तों संग ,अपने ग़म को भुलाने ,मनाने उत्सव !

बेटे की शादी है ,घर की लक्ष्मी आई है मनाओ उत्सव !

बिटियाआई ,खुशियाँ लाई है ,लगता है ,यही है ,उत्सव !

दर्द के बहाने तो अनंत हैं ,सब भूलकर मनाओ ,उत्सव !

 मम्मी बाजार से  कुछ लाई है ,कैसे न मनाऊँ उत्सव !

छोटी -छोटी खुशियों में ढूंढती हूँ ,ख़ुशी ! मनाती हूँ उत्सव !

बिन पैसे ही ,अपने लिए ,मन ही मन मुस्काती,मनाती हूँ, उत्सव !

दिल अशांत है , दर्द को कागज़ पर लिख मनाती हूँ ,उत्सव !

 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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