भूत बच्चे ख़ुशी -ख़ुशी उड़ते हुए ,भूत काका के पास आते हैं किन्तु उन काका को न पाकर ,परेशान भी होते हैं ,जब उन्हें पता चलता है ,कि अब उन्हें अपने खाने का इंतजाम स्वयं ही करना होगा। अपने खाने के लिए टॉम और अफ़रोज जंगल में अपना कुछ न कुछ इंतजाम कर लेते हैं। किन्तु निम्मी रोहित और तन्मय एक ढ़ाबे में चले जाते हैं और शराब पीते हुए , दो आदमियों का खाना खाते हैं , वे दोनों ही अचम्भित होते हैं कि उनका खाना कोई खा रहा है या खाना उड़ रहा है ,न जाने कौन खा रहा है ?वो तो दिख भी नहीं रहा। तब वो वेटर को बुलाते हैं और उसे डांटते हैं कि तूने हमें कैसा खाना लाकर दिया ?जो उड़ रहा है ,ग़ायब भी हो रहा है।
तब उस ढाबे का मालिक आता है और उनके झगड़े का कारण पूछता है ,तब वो लोग उसे बताते हैं ,कि तुम्हारे इस आदमी ने हमें जो खाना लाकर दिया वो उड़ रहा है।
भला ऐसे भी कभी हुआ है ,खाना भी कहीं उड़ता है ,तुम लोगों ने ज्यादा पी ली है।
नहीं ,हमने अभी एक -एक पैग ही लिया है।
चलो ,अब हमारे सामने खाकर दिखलाओ !बात को संभालने के लिए उस मालिक ने उनसे कहा।
खाना तो है ही नहीं ,अब खाएं क्या ?
चल बे.... छोटू इनके लिए और खाना लेकर आ !उससे पहले उसने ,उनसे शर्त रखी ,अब भी यही खाना ला रहा है ,तुम लोग हमारे सामने खाना खाना ,यदि तुम्हारा खाना अब भी उड़ा और गायब हुआ तो तुमसे एक भी पैसा नहीं लिया जायेगा। इसके विपरीत यदि खाना न ही गायब हुआ ,न ही उड़ा ,तुम लोगों को पहले खाने के भी ,पैसे देने होंगे।अपनी-अपनी तरफ से दोनों ही सही थे ,दोनों ने ही उसकी शर्तों को मान लिया।इस तरह की बातचीत होते देखकर ,और लोगो की भीड़ भी इकट्ठा हो गयी ,सभी यह देखने चाहते थे कि दोनों में से कौन सही है ? शर्त कौन जीतता है ?
वेटर द्वारा फिर से खाना लाया गया और दोनों खाने लगे किन्तु न ही भोजन उड़ा ,न ही ग़ायब हुआ। शर्त के अनुसार दोनों ने अपने पहले खाने के और दुबारा जो खाना मंगवाया गया ,उसके पैसे देने पड़े। लोगों ने उनके झूठ पर उन्हें बहुत लताड़ा।
निम्मी ओ...... निम्मी !तू हमें वहां से क्यों ले आई ?
देखा नहीं ,कितनी भीड़ हो गयी थी ? हम भीड़ में दब जाते तो....... दुबारा मर जाते कहकर हंसने लगी।
तुम्हें हंसी सूझ रही है ,वे बेचारे तो हमारे कारण झूठे साबित हो गए ,जबकि वो सही कह रहे थे ,उनका खाना हमने ही तो खाया है ,रोहित बोला। हमें और भी खाना खाने को मिल जाता ,अभी मुझे और भी भूख है।
तुम्हें अपनी भूख की पड़ी है , भूख तो मुझे भी लगी है किन्तु तुम्हारी भूख के कारण हम किसी ग़रीब को तो परेशान नहीं कर सकते हैं ,न...
हमने किस ग़रीब को परेशान किया या हानि पहुंचाई ,वे लोग तो देखा नहीं ,कैसे शराब पी रहे थे ? शराब क्या सस्ती मिलती है ?गरीब इंसान क्या शराब पी सकता है ?
ये सब मैं नहीं जानती ,मेरे घर में कोई नहीं पीता था किन्तु मैं इतना जानती हूँ ,वो वेटर गरीब था ,यदि वो झूठा साबित हो जाता तब उसे अपनी जेब से पैसे भरने पड़ते।
ये तुम कैसे कह सकती हो ?तन्मय ने पूछा।
मैं भी तो वहीँ खड़ा था।
तुमने शायद ,ध्यान नहीं दिया उस ढाबे का मालिक उस वेटर से कह रहा था -यदि ये लोग सच बोल रहे हैं और मुझे पैसा देना पड़ा ,तब वो पैसा मैं तेरी तनख्वाह से काटूंगा इसीलिए तुम लोगों को मैं इधर लेकर आ गयी।
ये सोचना हमारा काम नहीं है ,हमें भी तो अपनी भूख मिटानी होगी। टॉम और अफ़रोज भी कहीं नहीं दिख रहे चिंतित होते हुए तन्मय बोला।
अब उनके खोने का कोई ड़र नहीं ,वे भी इधर -उधर अपनी भूख मिटा रहे होंगे।
तभी एक ,बहुत ही तंदुरुस्त सा व्यक्ति उनके करीब आता है ,बच्चों यहाँ कहाँ घूम रहे हो ?
बच्चों ने ,उस अजनबी को आश्चर्य से देखा और पूछा -आप हमें देख सकते हैं।
ह्म्म्मम्म ,हअ...हअ....हअ....हअ.... भूत होकर भी ,भूत को नहीं पहचान सकते ,मैं भी तो भूत ही हूँ , मैं यूँ ही परेशान सा टहल रहा था ,तुम लोग दिख गए।
परेशान टहल रहे थे ,अब क्या परेशानी हो सकती है ?सारी परेशानियाँ तो इंसानों के ज़िम्मे ही होती हैं ,इंसान के बच्चों को पढ़ने का दुःख , बड़े होने पर कमाने का दुःख ,आदमी है तो पत्नी से दुःख ,पत्नी है तो घर की चिंताओं से दुःख ,कहते हैं -''मरने के पश्चात ,सभी दुखों से छुटकारा मिल जाता है।'' तब अंकल आपको किस बात का दुःख है ?
बच्चों तुम तो बड़ी -बड़ी बातें करते हो ,इतने बड़े तो तुम दीखते भी नहीं।
तन्मय की प्रशंसा सुनकर निम्मी भी आगे आई और बोली -जरूरत और भूख सब सिखा देती है ,हम बच्चे अपनी भूख मिटाने के लिए ही इधर घूम रहे हैं किन्तु आप क्यों परेशान हो ?
क्या तुम नहीं जानते ?उन्होंने आश्चर्य से पूछा।
क्या नहीं जानते ?तीनों ने एकसाथ पूछा।
''भूलोक ''पर एक बहुत बड़ी दुर्घटना हो गयी है।
वो तो हम जानते हैं ,हम उसी दुर्घटना का परिणाम हैं ,तीनों उदास होकर बोले।
ये कब की बात है ? वैसे मेरा नाम 'अल्बर्ट डिकोस्टा 'है ,मुझे ''डिकोस्टा ''कह सकते हो।
अभी कुछ दिनों पहले जो 'स्कूल बस 'खाई से गिरी थी ,हम उसी बस में थे।
क्या तुम लोग उस बस में थे ?उस बात को एक माह से ऊपर हो गया।
नहीं ,अभी कुछ दिन ही बीते हैं ,रोहित बोला।
बच्चों !यहाँ के समय में और वहां क समय में काफी अंतर् है ,तुम्हें तो लग रहा है ,ये अभी की बात है किन्तु उस दुर्घटना को एक माह से ऊपर हो गया।
क्या ???हम इतने दिनों से यहाँ हैं ,बच्चे आश्चर्य से एकसाथ बोले -तब 'डिकोस्टा ''अंकल आप किस दुर्घटना की बात कर रहें हैं ?
अभी कुछ दिनों पहले एक बड़ी ट्रेन दुर्घटना हुई है ,उस रेलगाड़ी में ,मैं अपने बेटे के साथ जा रहा था ,अब जबकि मैं यहाँ आ गया मुझे मेरा बेटा नहीं मिल रहा। तुम लोगों को देखकर ,मैं इसीलिए इधर आया था।

