बरखा , अमृता जी को ,सलमा के क्रोध का कारण बताती है ,उसके क्रोध का कारण प्रेमा और सुंदरी उसे ''बच्चा चोर ''कहती हैं। ये सुनकर सलमा उनसे लड़ने लगती है। तब बरखा उन्हें उसकी कहानी सुनाती है , सलमा पैसे -पैसे को मोहताज़ थी ,पैसा कमाने के लिए ,उसे एक तांत्रिक मिलता है और उससे कहता है यदि तुम इक्कीस बालकों की बलि दो तो ,तुम पर कुदरत की रहमत होगी और पैसा बरसेगा। इस कार्य को अंजाम देने के लिये सबसे पहले ,अपने पड़ोसी के बच्चे को ही चुराती है उसके पश्चात बगीचे में , किसी भी गली -मोहल्ले ,में खेलते बच्चे को उठा लाती। इस तरह उसने एक के बाद एक बच्चे को उठाया और अब तक वो छह बच्चे चुरा चुकी थी पूरे शहर में ,''बच्चा चोर ''का आतंक सा छ गया। पुलिस भी हरकत में आ गयी। अब उसे बच्चा चुराने में बहुत ही एहतियात से काम लेना पड़ रहा था, पकड़े जाने का था ,सो अलग।
तब उस तांत्रिक से उसने अपनी परेशानी बतलाई ,तब उसने कहा ,अबकि चाँद जब निकलेगा उस तक तुझे इक्कीस नहीं तो ग्यारह बच्चे पूरे करने होंगे। अपने शहर में तो ,माता -पिता और पुलिस सभी सतर्क हो गए थे। तब इसने दूसरे शहर में जाने की योजना बनाई। सी.सी. टी.वी. कैमरों में कोई बुरखेवाली तो नजर आ गयी थी किन्तु वो बुरखेवाली कौन है ?ये अभी रहस्य बना हुआ था। हर बुरखेवाली को तो नहीं पकड़ सकते। कुछ दिनों के लिए ,ये बात ठंडी पड़ गयी किन्तु तभी खबर आई ,किसी दूसरे शहर में अनाथाश्रम से कोई बच्चा गायब हुआ है।
पुलिस समझ रही थी ,ये काम किसी एक का नहीं हो सकता ,ये बच्चा चोर का पूरा गैंग हो सकता है। एक औरत के बस का ये काम नहीं है।ये इतनी चालाक थी किसी न किसी तरह बच्चा चुरा ही लाती थी। पुलिस भी किसी भी बुरखेवाली के साथ कोई बच्चा देखती ,तुरंत ही उसकी जाँच की जाती ,बच्चे से भी पूछा जाता। इस चक्कर में जिनके अपने बच्चे साथ होते ,वे भी संदेह के घेरे आ जातीं। इसने पुलिस को और लोगों को बहुत चकमा दिया।
तब ये पकड़ी कैसे गयी ? अमृता जी ने बेताब होकर पूछा।
अब इसे योजना के अनुसार दो बच्चे और चुराने थे क्योंकि अब आस -पास की पुलिस भी सतर्क हो चुकी थी। तब ये एक पुलिस वाली की नजर में आ गयी ,उसने देखा ,ये पहले तो बहुत देर तक पार्क में बैठी रही ,अब तो बच्चों के माता -पिता भी सतर्क हो चुके थे और ये बात भी फैल चुकी थी कि कोई बुरखेवाली है जो बच्चों को बहकाती है इसीलिए इसने बुरखा पहनना छोड़ दिया। उस बगीचे के पास उस पुलिसवाली का घर था।वो अपने घर की खिड़की से इसकी हरकतों पर निगाह रखे थी। जब कुछ अँधेरा सा होने लगा ,लोग अपने -अपने बच्चों को लेकर जाने लगे। उस पुलिसवाली ने देखा -ये औरत बहुत देर से बैठी है ,जाने का नाम ही नहीं ले रही।तब उसने अपनी किरायेदार की छोटी बच्ची को अकेले पार्क में खेलने भेजा।
काफी देर तक प्रतीक्षा करने पर भी ,जब उसके पीछे कोई नहीं आया ,तब ये उठी, इसने आस -पास देखा और बच्ची के पास गयी ,बोली -बेटा !चॉकलेट खायेगी ! इससे पहले की वो कोई जबाब देती इसने बड़ी सी चॉकलेट निकालकर उसको दी।
नहीं ,मैं नहीं खाऊँगी ,मम्मी ने अजनबियों से कुछ भी लेने से मना किया है।
तुम्हारी मर्जी !वैसे मैं तो यहाँ बहुत देर से बैठी थी ,मैं तो तुम्हारी मम्मी की दोस्त हूँ ,तुम अब खेलने आई हो ,वैसे तुम्हारी मम्मी कहाँ हैं ?
वो तो ,काम कर रहीं है। आओ ,चलो ! हम दोनों खेलते हैं ,कहकर उसके साथ खेलने लगी ,उसे खिलाते हुए ,एक पेड़ के पीछे ले गयी ,तब तक चारों तरफ नजरें गड़ाये थी। पेड़ के पीछे से ये तो निकली किन्तु वो बच्ची नहीं ,अँधेरा भी होने लगा था। वो पुलिस वाली तुरंत अपने स्थान से उठी और बगीचे की तरफ दौड़ लगा दी और सीधे सलमा से प्रश्न किया ,जो लड़की यहाँ खेल रही थी ,वो कहाँ गयी ?
उसे देखकर वो घबरा गयी ,वो समझ गई कि इसे मालूम था कि कोई बच्ची यहाँ पहले से ही खेल रही थी।कहीं उसे पकड़ने के लिए पुलिस की ही कोई चाल न हो।ये मन ही मन घबरा रही थी किन्तु अपने पर काबू करते हुए ,सलमा तपाक से बोली -होगी यहीं ,मैं क्या जानू ?
नहीं ,मैंने तुम्हारे साथ उसे खेलते देखा ,इतनी देर में कहाँ गयी ?कहते हुए, उसी पेड़ के करीब गयी ,वहाँ वो बच्ची बेहोश पड़ी थी ,उनकी झड़प देखते हुए ,चलते -फिरते लोग भी उधर आने लगे। जैसे ही उसने शोर मचाया ,'बच्चा चोर 'बच्चा चोर ''इससे पहले कि कोई बात को समझ पाता ,ये वहाँ से भाग खड़ी हुई ,कुछ तेज से लड़के थे ,इसे देखकर ,इसे लपकने दौड़े ,ये शातिर अँधेरे का लाभ उठा ,बचकर निकल गयी।
हे.... भगवान ! मैंने कभी सोचा भी नहीं था ,इसके भोले चेहरे के पीछे कितनी क्रूरता छिपी है ?अब भी मुझे धमकी देकर गयी है। बच्चे चुराए भी और उन्हें मारा भी ,इसने तो क्रूरता की हद ही पार कर दी। ये तो भाग निकली ,उस बच्ची का क्या हुआ ?
उसे इसने बेहोश होने की दवाई सुंघाई थी ,डॉक्टर को भी दिखाया गया।
एक बात समझ नहीं आई ,उस पुलिसवाली ने अपने किरायेदार की बच्ची को ही'' बलि का बकरा ''क्यों बनाया ? उसकी अपनी कोई औलाद नहीं थी।
अरे मैम !उसकी औलाद तो तब होती ,जब उसकी शादी हुई होती ,वो पुलिसवाली तो कुंवारी थी ,बरखा मुस्कुराकर बोली।
अपनी ही बात पर अमृता जी भी हंस दीं ,तब ये चुड़ैल !पकड़ी कैसे गयी ?अभी तक सलमा के साथ उनकी कोई दुश्मनी नहीं थी किन्तु उसकी कहानी सुनकर ,उनके मन में उसके प्रति कोई सहानुभूति नहीं रही ,बल्कि वे तो बेताब हो रहीं थीं ,आगे की कहानी जानने के लिए........

