अंगुलियाँ चलती हैं , फिसलती हैं ,
टांकती हैं ,शब्दावली !कोरे पन्नों पर !
बुनती हैं ,जाल शब्दों की तीव्रता पर !
चलतीं हैं ,कह देती हैं , हाल ए दिल !
लिख देतीं हैं ,नग़मा ए मोहब्बत !
तीव्र गति ,रटा होता है ,अँगुलियों पर !
क्या चल रहा ?दिल और दिमाग पर !
टिका होता रोजगार ,गति की चाल पर !
वक़्त की तेज चाल से वो पीछे रह गया।
दुनिया आगे बढ़ गयी ,
वो गुमनामी के अंधेरों में खो गया।
