पांचों बच्चे अपने पेट की आग बुझाने के लिए ,इधर -उधर घूम रहे हैं। ये कोई ''भूलोक ''नहीं , जहाँ माता -पिता अपने बच्चों के लिये ,सम्पूर्ण जीवन कमाने में लगे रहते हैं किंतु यहाँ ''भूतलोक ''में तो अपना इंतजाम अपने आप ही करना होता है। बस एक दिन के लिए ''भूत काका ''ने उन्हें राह दिखलाई ,अगले दिन वो भी गायब। बच्चे तो प्रसन्न हो रहे थे। भूत काका से अच्छे -अच्छे व्यंजन मंगाकर खाएंगे किन्तु ''भूतलोक ''के नियमानुसार स्वयं ही अपना भोजन तलाशना होगा। भोजन की तलाश में ही ,तीनो ''भूत बच्चे ''ढाबे पर गए थे ,वहाँ भी कांड हो गया। तभी उनकी मुलाकात ''डिकोस्टा ''से होती है ,जो अपने बेटे की तलाश में ,उन बच्चों के समीप आ गया था। कुछ समय पश्चात ही ,टॉम और अफ़रोज भी आ जाते हैं।
उन बच्चों को डिकोस्टा से ही पता चलता है ,भूलोक में बहुत बड़ी दुर्घटना हो गयी है ,जिसके कारण वो और उसका बेटा'' भूतलोक'' में प्रवेश करते हैं। तब बच्चे उसके बेटे की तलाश करने में उसकी सहायता का वायदा करते हैं। इससे एक लाभ ये भी होगा कि हमारे पूर्वज भी हमें मिल ही जायेंगे। तन्मय ने पूछा ,हम अपने पूर्वजों को पहचानेंगे कैसे ?
हम नहीं ,वे तो हमें पहचान ही सकते हैं ,सुना नहीं ,लहु ,लहु को पुकारता है।
बुद्धू ,वो तो जब होता ,जब हम जिन्दा होते ,अब तो हमारी रूहें हैं यानि आत्मा ! हममें लहु है ही कहाँ ?
वे सभी उड़ते हुए ,भूतलोक से भूलोक को देख रहे थे ,किन्तु उन्हें कहीं भी कोई आत्मा ,अकेली भटकती नजर नहीं आई ,दोनों ही जगह नहीं मिली ,तभी डिकोस्टा से पूछा -क्या सच में ही ,आपके बेटे ने आपके साथ ,इस लोक में प्रवेश किया था ,कभी वो वहीँ रह गया हो ,उसके जीवन की अभी भी ,डॉक्टरों को आस हो। चलिए ,डिकोस्टा अंकल हम उसी दुर्घटना वाले स्थान पर चलते हैं ,शायद वहीं कोई क्लू मिले ,किसी जासूस की तरह निम्मी उनसे कहती है।
बच्चों ! वो स्थान यहाँ से बहुत दूर है।
कोई बात नहीं ,आपके बेटे को तो हम ढूंढ़ ही लेंगे ,वैसे भी अब हमें ,मम्मी -पापा के डांटने का ड़र नहीं ,पढ़ाई का तो झंझट ही समाप्त हो गया निम्मी बोली।
रास्ते में न जाने कितनी आत्माएं उन्हें इधर -उधर टहलती नजर आईं ? कुछ की लाल -लाल आँखें देखकर उन्हें भी ड़र लगता। तब उन्होंने सोचा ,राह चलते किसी से पूछ भी तो सकते हैं ,इतनी भीड़ में एक बच्चे की आत्मा को ढूँढना इतना आसान भी नहीं ,कहते हैं - पृथ्वी जनसंख्या के भार से दबी जा रही है ,मुझे तो लगता है ,यहाँ भी भीड़ कम नहीं है , रोहित बोला।
वे लोग बहुत देर से उड़ रहे थे ,वे थक चुके थे ,डिकोस्टा अंकल मेरे विचार से तो इस शहर में उतरकर ,कुछ खा -पी लिया जाये ,आगे की यात्रा तब करते हैं। इस शहर में देखो, कितनी भीड़भाड़ है ? लगता है ,ये लोग रात्रि में भी नही सोते ,'ये तो कतई भूत ही हो रहें हैं,'' टॉम बोला। उसकी बात सुनकर सभी हंसने लगे।
तब डिकोस्टा अंकल ने बताया ,ये ''सपनों की नगरी '''मुंबई'' है ,जहाँ ;फिल्में बनती हैं। इसे महानगरी भी कहते हैं।
नहीं ,अंकल ये बात अब यहीं की नहीं रह गयी है ,अब इंसान धन कमाने में इतना व्यस्त हो गया है ,न ही दिन देखता है ,न ही रात्रि। अब इंसान को न दिन में चैन है ,न ही रात्रि में आराम करता है ,कम से कम हम भूत दिन में तो नहीं निकलते ,दिन में तो आराम करते हैं किन्तु इन लोगों के लिए तो जैसे रात्रि और दिन समान ही हो गए हैं। तभी थके रहते हैं ,रात -दिन की मेहनत से उन्हें आराम नहीं मिलता। तब उनकी लापरवाही के परिणामस्वरूप ,हम जैसों को भूत बनकर घूमना पड़ता है अफ़रोज बोला।
इसी कारण तो ये दुर्घटनाएं भी तो होती हैं ,हम सभी इंसानो की लापरवाही का नतीजा ही तो हैं। हवा में रहने के सिवा हम रात्रि में भी ,नीचे नहीं आ सकते निम्मी खीझकर बोली।
अब देखिये ! हम कहाँ जाएँ ?किसी के सामने आ गए तो भूत कहकर भागेंगे इसीलिए तो हमें सुनसान इलाकों में रहना पड़ता है ,किसी खंडहर में या किसी श्मशान में रोहित ने भी अपना क्रोध जतलाया।
बच्चों की बातें सुनकर डिकोस्टा मुस्कुरा रहा था किन्तु अपने बेटे को स्मरण कर परेशान भी हो रहा था।
शहर से दूर ,सूनी सड़क पर छह भूत इंसानों की बातें करते चले जा रहे थे ,तभी एक लड़की चीख़ते हुए ,सुनी सड़क पर दौड़ लगा रही थी क्योंकि उसके पीछे कुछ गुंडे टाइप के लड़के पड़े थे। उनसे बचने के लिए वो चीख रही थी -मुझे बचाओ !कोई है मुझे बचाओ !
रोहित !लड़की सहायता के लिए चिल्ला रही है ,यार..... यही मौका है ,हीरो बनने का ,हमें उसे बचाना होगा। कहते हुए टॉम ने उधर की तरफ दौड़ लगा दी किन्तु वो उनके बीच में से निकल गया वो उन लड़कों को छू भी नहीं सका। ये क्या हुआ ?टॉम हैरत से बोला।
यार हम अभी छोटे हैं ,हममें वो शक्तियां भी नहीं है ,हम अभी -अभी तो भूत बने हैं ,अभी ताकत मिलने में हमें समय लगेगा ,शायद हमें सीखना भी पड़े।
तभी बच्चों ने देखा ,''डिकोस्टा '' अपने भयानक रूप में आ गया ,पहले तो उसने अपने मुँह से तेज हवा चला दी उसके पश्चात वो उस लड़की के शरीर घुस गया और उस लड़की के द्वारा ही उसने उन लड़कों की खूब पिटाई करवा दी।जो लड़की थोड़ी देर पहले ,उन लड़कों से डरकर भाग रही थी ,अब वो ही कह रही थी -आ जाओ !एक -एक को नहीं छोडूंगी। अब लड़के सोच में पड़ गए कि उन्हें आगे बढ़ना चाहिए या पीछे जाना चाहिए। कुछ देर रूककर ,वो उसे देखते रहे ,तभी एक बोला -ये हमें डराकर भगाना चाहती है।
तभी दूसरा बोला -हम इससे ड़र ही क्यों रहे हैं ? कहते हुए आगे बढ़ता है और उस लड़की का हाथ पकड़ने का प्रयास करता है ,तभी अचानक उस लड़की ने उसका हाथ पकड़कर ,झटके के साथ ,उसे सड़क पर पटक दिया। यह देखकर दूसरा लड़का भी अपने दोस्त को बचाने के लिए ,आगे आया।
उस लड़की के ,शरीर के अंदर घुसे डिकोस्टा ने ,उस लड़के को उठाकर ,हवा में उछाल दिया ,दुबली -पतली सी उस लड़की में इतनी ताकत देखकर ,सभी लड़के हैरत में पड़ गए।

