Shrapit kahaniyan [part 32 ]

 जमींदार साहब , अपने बेटे की सच्चाई जानते हुए भी ,अपने को उस सच्चाई से झुठलाना चाहते हैं ,विशेषकर उनकी पत्नी ,जिन्होंने आज पूजा की ,सम्पूर्ण घर को  ,गंगाजल से पवित्र करना चाहा। उन्हें अभी भी एक उम्मीद बाक़ी है ,शायद हमारी परवरिश से और ईश्वर की  कृपा से सब सम्भल जाये। पंडित जी के कहने पर ,उन्हें बुरा तो अवश्य लगता है और अपनी बात सिद्ध करने के लिए ,तब वो अपने बेटे को लेकर जैसे ही मंदिर के अंदर प्रवेश करते हैं ,उसके शरीर में अजीब सी हलचल मचने  लगती है और सारा शरीर लाल हो जाता है। उसकी ऐसी हालत देखकर ,उन्होंने पंडित जी की तरफ देखा ,तभी पंडित जी बोले - क्यों इसे कष्ट दे रहे हैं ? यह सुनकर उसकी माँ  उसे लेकर बाहर आ जाती है ,दुःख और परेशानी के कारण उसे लेकर घर आ जाती है। 


जमींदार जी ,अपनी समस्या को लेकर वहीँ रुक जाते हैं ,तब उन्होंने पंडित जी को  ''कुंभर्क '' की सारी स्थिति से अवगत कराया। 

उनकी बातें सुनकर पंडित जी बोले -अब तो आप समझ ही गए होंगे ,तुम्हारा पुत्र के दो रूप अवश्य हैं किन्तु उस पर शैतानी रूप का असर ज्यादा है। अभी तो उसका भोजन पशु -पक्षी ,छोटे जानवर ही हैं किन्तु जब ये बड़ा होगा ,इसका भोजन भी बढ़ेगा तब  भी अंतर आएगा ,मेरा मतलब समझ रहें हैं न..... 

जमींदार जी ने ,नहीं में गर्दन हिलाई।

 तब पंडित जी बोले - शैतान इंसानी रक्त से अपनी भूख -प्यास मिटाता है ,इसके लिए आपको तैयार रहना होगा ,यदि लोगो की सुरक्षा चाहते हो तो आपको इसे मारना होगा। इससे पहले कि इसके अंदर पूरी तरह से शैतान जाग्रत हो , इसे मारना होगा। 

पंडित जी की बात सुनकर ,जमींदार साहब हिल गए ,ये क्या कह रहें हैं ? पंडित जी ! कोई भला अपनी औलाद को मारता है। 

ये आपकी औलाद नहीं ,ये उस शैतान तांत्रिक का दिखाया हुआ भ्रम है ,आप एक इंसान के बच्चे को नहीं वरन एक शैतान को पाल रहे हैं। आपको इसे मारना ही होगा ,यदि अपनी और लोगों की जान बचानी है। वरना यहाँ गीदड़ लौटते नजर आएंगे ,ये गांव शमशान नजर आएगा शमशान ..... 

जमींदार साहब ,किसी के सामने भी नहीं गिड़गिड़ाए किन्तु आज पंडित जी के सामने गिड़गिड़ा रहे थे ,पंडित जी इसको मारने के अलावा कोई और उपाय नहीं है। 

पंडितजी कुछ देर शांत बैठे रहे ,तब बोले - आप लोग बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं ,ये इतनी आसानी से मरने वाला भी नहीं ,आप समझ नहीं रहे हैं ,इससे तुम्हारी जान को भी खतरा हो सकता है , इस शैतान को ही यदि पालना है तो इसे लेजाकर किसी वीराने में चले जाइये। जहाँ कोई इक्का -दुक्का ही कोई इंसान आता जाता हो। 

इसके अलावा क्या कोई उपाय नहीं है ?जमींदार साहब निराश मन से उठते हुए बोले। 

अभी तो मैं बड़ी विकट परिस्थितियाँ देख रहा हूँ ,आगे समय पर छोड़ दीजिये ,ऊपर वाले ने जब इसे भेजा है ,तब कुछ उपाय भी सोचा ही होगा किन्तु जमींदार साहब ने जैसे कुछ सुना ही नहीं ,थके कदमों से मंदिर से बाहर आ गए। वो सोच रहे थे जिसे अपने रक्त से सींचा उसे कैसे मौत के घाट उतार दूँ ?वो तो जीते जी ही मर जाएगी ,तभी उस बालक का चेहरा उनकी आँखों के सामने घूमने लगा और उनके चेहरे पर मुस्कुराहट तैर गयी ,भला इतना मासूम बच्चा कैसे शैतान हो सकता है ?तभी रात्रि वाला शैतान रूप भी आ गया और वो फिर से निराश हो गए। 

घर आकर पत्नी से बोले -कुछ ही दिन हम यहाँ रह सकते हैं ,हमें ये गांव छोड़कर जाना होगा। 

क्यों ? पंडित जी ने क्या बताया ? उन्होंने शंकित होकर पूछा। 

कह रहे थे ,इसका शैतानी रूप देखकर लोग, हमारे विरुद्ध हो सकते हैं इसीलिए अपनों से दूर जाना होगा। वो मानसिक रूप से अपनी पत्नी को तैयार कर रहे थे। 

अब तो ''कुंभर्क ''दो वर्ष का हो गया ,उसकी माँ तो उसके पाठशाला जाने के सपने देखने लगी किन्तु जमींदार साहब की घबराहट दिन ब दिन बढ़ती जा रही थी। रात्रि को इसी तरह उसे दूसरे रूप में देखते ,उसका भयानक रूप दिन ब दिन और भयानक होता जा रहा था। रात्रि में उसकी हरी बड़ी -बड़ी चमकीली आँखें ,जो रात्रि के अँधेरे में भी देखने की क्षमता रखती हैं ,कान बड़े -बड़े ,इतने तेज दूर की आहट  भी पहचान लें। हल्के दांतों में भी परिवर्तन आया है। अब तो जमींदार साहब को भी ड़र लगने लगा। 

एक दिन वो तैयार हो रहे थे और'' कुंभर्क ''से भी तैयार होने के लिए कह दिया। 

वो ख़ुशी -ख़ुशी तैयार होकर अपने पिता के संग जाने के लिए तैयार हो गया ,पत्नी ने पूछ ही लिया , आज बाप -बेटा किधर जा रहे हैं ?


आज इसे मेला दिखाने ले जा रहा हूँ ,बहुत दिनों से हम कहीं नहीं गए। मेले में बहुत भीड़ थी ,तरह -तरह के खिलौने थे ,गेंद ,फुटबॉल ,''कुंभर्क ''को अनेक खिलोेने दिखाए ,फुटबॉल पर किक मारने के लिए कहा। उसे करके दिखाया भी ,किन्तु जैसे ही कुंभर्क ने लात मारी फुटबॉल न जाने कहाँ और कितनी दूर चली गयी ? इतने छोटे बच्चे की ताकत देखकर ,जिसने भी देखा आश्चर्यचकित रह गया। इतना ताकतवर बच्चा आज तक नहीं देखा ,जो भी खेल उसने खेला सबको आश्चर्यचकित कर दिया। वे जानते थे ,अब रात्रि होने वाली है इसीलिए मेले से बाहर निकलने लगे। अंधेरा होने से पहले ही ,वो घर पहुंच जाना चाहते थे। 

जब वो घर पहुंचे ,उनकी पत्नी दरवाजे पर खड़ी उनकी प्रतीक्षा में थी ,शीघ्र ही घर के अंदर गयी और पानी ले आई किन्तु जमींदार साहब को अकेले देखकर ,बोली -कुंभर्क कहाँ है ?

जमींदार जी नजरें नीची किये परेशान हालत में बोले -मेले में कहीं ग़ुम हो गया ,मैंने बहुत ढूंढा किन्तु नहीं मिला। ये सुनते ही ,जमींदारनी के हाथ से पानी छूटकर गिर गया और वो धम्म... से पास पड़ी कुर्सी पर बैठ गयी किन्तु जमींदार जी को आज लग रहा था ,जैसे वो आज चैन की नींद सोयेंगे। बहुत दिनों से शायद सोये ही नहीं थे ,आज जैसे उनके मन से बोझ उतर गया हो। पत्नी से बोले -मैंने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में लिखा दी है। 

कैसा भी है ? किन्तु वो तो एक माँ है , बोली -आपने उसका हाथ छोड़ा ही क्यों  था ?तभी चिंतित होते हुए बोली -कहीं किसी को उसका वो रूप दिखा गया तो क्या होगा ?

तभी जमींदार जी को भी चिंता हुई ,ये तो मैंने सोचा ही नहीं था ,पंडित जी का कथन कहीं सच न हो जाये किसी इंसान का खून उसके मुँह लग गया तो क्या होगा ?

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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