Haunted [part 14 ]

''डिकोस्टा '' के कहने पर सभी बच्चे ,उस रेल से हुए हादसे में ,उसके बच्चे को ढूंढने के लिए चल देते हैं। कहते हैं ,न..... बच्चे मन के सच्चे ,फिर चाहे वो ''भूत बच्चे'' ही क्यों न हों ? तन्मय और रोहित की टीम भी ''डिकोस्टा अंकल ''की सहायता के लिए ,चल पड़ी। यात्रा बहुत लम्बी थी इसीलिए वे बच्चे थक गए ,तब वो महानगरी मुंबई के करीब पहुंच जाते हैं और वहीं उतरने का निर्णय ले लेते हैं ,अभी वो एक सुनसान सड़क पर उतरते हैं ,तभी उन्हें एक लड़की की सहायता करनी पड़ जाती है किन्तु वो तो नए -नए भूत बने थे। उन्हें अभी भूतों की शक्तियां मालूम नहीं थी ,किन्तु तभी डिकोस्टा उस लड़की के शरीर में प्रवेश करता है। तब वो लड़की, जिनसे ड़र रही थी स्वयं ही ,उन लड़कों का सामना करती है। जैसे ही एक लड़का उसकी तरफ बढ़ता है ,वो उसका हाथ मरोड़ देती है। इस बात ने उन सही को क्रोधित कर दिया और तभी दूसरा आगे आता  है। उस लड़की में न जाने कहाँ से इतनी शक्ति आ गयी ?उसने उसे दोनों हाथों से उठाया और घुमाकर पटक दिया। 


उसकी कमर टूट गयी ,सभी बच्चे भी हैरत से देख रहे थे ,इस तरह इन दीदी में अचानक कैसे इतनी हिम्मत आ गयी ? तभी निम्मी ने देखा ,''डिकोस्टा अंकल ''तो कहीं दिख ही नहीं रहे। उसने रोहित से कहा -डिकोस्टा अंकल नहीं हैं। वो लड़की एक -एककर सभी लड़कों को पटक रही थी ,जो उससे लड़ते हैं ,मार खाते हैं ,बाक़ी डरकर भाग जाते हैं। तभी उस लड़की के शरीर के अंदर से ''डिकोस्टा ''बच्चों को निकलते दिखलाई दे जाते हैं। सभी बच्चों की आँखें फटी की फटी रह जाती हैं। वो लड़की वहीँ सड़क पर गिर जाती है। 

अंकल  आप !!!! इस तरह कैसे ?

मैंने इस लड़की के शरीर पर काबू कर  लिया ,अब जैसे मैं कर रहा था या चाह रहा था ,वो वैसे ही कर रही थी। 

क्या ऐसा भी होता है ?सभी ने एकसाथ पूछा। 

हाँ बच्चों ! ये हमारी कमजोरी भी है और ताकत भी....... 

कमजोरी कैसे ?निम्मी ने प्रश्न किया। 

क्योकि हम एक आत्मा हैं ,हमें यदि अपना कोई भी कार्य पूर्ण करवाना  है तो इंसानी तन की आवश्यकता पड़ती है ,वरना हम कुछ नहीं कर सकते जैसे -टॉम हवा की तरह आर -पार हो गया। ये बात बच्चों को बहुत अच्छी लगी। 

और ताकत कैसे ?तन्मय ने पूछा। 

ताकत अभी तुम लोगों ने देखी है ,यदि हमें कोई तन मिल जाये तब हम उस इंसान को अपनी इच्छा से चला सकते हैं। 

यानि ,इंसान किसी रोबोट की तरह हमारे इशारों पर चलेगा ,तब तो बड़ा मज़ा आएगा टॉम खुश होते हुए बोला -क्या हम लोग भी ऐसा कर सकते हैं ? हमें तो नहीं आता। 

ये विद्या सीखनी होती है ,ऐसे ही नहीं आ जाती ,डिकोस्टा उन बच्चों पर रौब मारते हुए बोला। 

तभी अफ़रोज बोला -वो तो ठीक है ,किन्तु ये विद्या आपने कैसे सीखी ?आप तो अभी -अभी भूत बने हैं और हम भी ,बल्कि हम तो आपसे पुराने भूत हैं। हमसे तो ये विद्या नहीं आई। 

हाँ..... अफ़रोज सही कह रहा है। 

डिकोस्टा ने उन्हें बहलाना चाहा और बोला -मैं बड़ा हूँ न....... इसीलिए भूत बनते ही ये विद्या मुझे आ गयी। देखो !वो लड़की अभी बेहोश है ,जब तक होश में नहीं आ जाती हम लोग इसके आस -पास ही रहेंगे। 

ये बेहोश क्यों है ?अभी तो ये खूब मारधाड़ कर रही थीं। 

क्योंकि उस समय मेरी शक्ति इसके अंदर थी ,उस शक्ति के कारण ये इतने गुंडों को मार पाई किन्तु जैसे ही मैंने इसका शरीर छोड़ा ,तब ये कमजोर पड़ गयी , इसको वापस अपने शरीर में रहने में थोड़ा समय लगेगा। क्योंकि किसी दूसरे की ताकतवर रूह को संभालने लायक इसका शरीर नहीं था इसीलिए ये थककर इस तरह पड़ी है। 

यानि ,हम रूहों में शक्ति होती है किन्तु बिना तन के वो भी व्यर्थ है। वैसे देखा जाये तो बिना तन हम हवा में कहीं भी उड़कर आ जा सकते हैं। एक शहर से दूसरे शहर ,दूर से ही अपनी पसंद का भोजन मंगा सकते हैं। केेसा भी रूप बदल सकते हैं ? अब तो हमारी मौज ही मौज है ,तभी एक रूह उनके बराबर में से होकर तीव्र गति से निकली ,बच्चों को लगा ,जैसे वो ,उनसे कुछ कह रही थी - दोस्तों  ! जो मैंने सुना ,तुम लोगों ने भी सुना। 

हाँ ,मुझे भी लगा ,जैसे वो कुछ कहकर गयी -भाग जाओ ! यहाँ से !

कुछ समझ नहीं आया ,क्या वो कुछ समझाना चाहती थी  या कुछ होने वाला है।

वैसे एक बात तो है ,वो अंकल बहुत ही ताकतवर हैं। 

हाँ यार... रोहित मैं भी यही सोच रहा था किन्तु ये तो अभी ताजे -ताजे ही तो भूत बने हैं ,फिर इन्हें ये विद्या कैसे आई ? कहीं कुछ और बात तो नहीं !निम्मी के दिमाग़ की घंटी बजी। 

तू भी न ,क्या -क्या सोचने लगती है ?ये भी हमारी तरह ही हैं ,इनसे भला हमें क्या परेशानी हो सकती है ? हमारे पास कोई धन नहीं ,जो चुरा लेंगे ,हम कोई बच्चे नहीं जो हमें चुराकर भीख मंगवाएंगे ,या हमसे ''बाल मजदूरी ''करवाएंगे। ये भला हमारा कैसे लाभ उठा सकते हैं ?तुम लड़कियों को अपना दिमाग़ ज्यादा चला ने की कोई आवश्यकता नहीं ,वैसे ही कम है टॉम बोला। 


टॉम की बात सुनकर सभी दोस्त हंसने लगे। तब निम्मी सबको मारने के लिए दौड़ी। 

तभी डिकोस्टा अंकल बोले -चलो बच्चों !हम आगे बढ़ते हैं ,यदि तुम्हारा आराम हो गया हो तो......

अंकल आपका बेटा ,क्या सच में ही वहाँ होगा ?ये आप कैसे कह सकते हैं ?

बेटे ! मैं अपने बेटे की तलाश में हूँ ,मुझे जहाँ भी उसके होने की उम्मीद होगी ,वहीँ जाऊंगा न..... 

हाँ ,ये बात भी सही है ,और ऊंचाई पर जाने पर उन्हें और भी रुहें घूमती नजर आती हैं , कुछ उन्हें घूर रहीं थी जैसे उनके इलाके में आकर उन्होंने कोई गलती कर दी हो ,किन्तु  कोई भी उनके करीब नहीं आ पा रही थी। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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