Andhkar ka moti

मन एक ,अँधेरी गली !

जिस ओर राधा चली !

डूबने अपने श्याम के ,

प्रेम की हलचल  बड़ी !

बंद आँखों उसे निहारती ,

ढूंढने अपना मोक्ष मोती।


डूब मन की गहराई में , 

उस प्रेम मोती की परख़ ,

हर किसी की नहीं  होती। 

विरहणी को इक आस है। 

जुडी ,मिलन की साँस है। 

वही उसकी [रूप]दास है।

उस अंधकार में ही ढूंढ़.... 

लेती ,रहती जिसकी प्यास है।

[यहाँ  राधा आत्मा और श्याम परमात्मा को कहा गया है। ]


अँधेरी गलियाँ -


शबनम चली.... अँधेरी गली ,

लिए आँखों में ,इश्क़ की नमी। 

मिलन की लिए आस बैठी उस गली। 

वेदना से तप्त नज़रें तकतीं 

दुनिया की रंगीनियो से बेज़ार ,

आस का मोती ,परख जिसको 

कोई तो पहचान ले ,सुने पुकार !

अब तो कोई आये ,करे उससे प्यार !

आज भी है उसे ,न जाने किसका इंतजार !

उबारे इस जिल्ल्त से , करे इश्क़ बेशुमार ! 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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