पंडित जी ने दोनों पति -पत्नी को पहले ही आगाह कर दिया था ,ये उनकी संतान नहीं वरन शैतान का अंश है। पंडित जी के कहने पर ,उस समय तो उन्हें थोड़ा ड़र लगा अपनी गलती का एहसास भी हुआ किन्तु पंडित जी के जाते ही ,अपने बच्चे की मनमोहिनी सूरत देखकर ,दोनों ही ,उनकी दी हिदायतें भूलकर, उसे पालने में व्यस्त हो गए। ''वो तो अच्छा है ,मनुष्य अपना भविष्य नहीं देख पाता ,यदि देख लेता तो ,उसका जीवन दूभर हो जाता। '' किन्तु पंडित जी के समझाने पर भी , इन दोनों दम्पत्ति ने ध्यान नहीं दिया। वे तो उसकी मोहक मुस्कान पर ही मर -मिटने को तैयार थे।
दोनों रात्रि में ,गहरी नींद में सो जाते सुबह उठते ,उन्हें कुछ पता ही नहीं चलता, कि रात्रि में क्या हो रहा है ,क्या नहीं ?एक दिन कुंभर्क की माँ की आँख खुल गयी उसने अपने बच्चे को टटोला किन्तु बच्चा उसके पास नहीं था ,वो घबरा गयी। तभी उसकी दृष्टि छत की तरफ गयी ,आश्चर्य से उसकी आँखें फटी की फटी रह गयीं ,उसका बेटा कुंभर्क छत पर ऐसे चल रहा था ,जैसे कोई फर्श पर चलता है। अभी वो एक माह का ही हुआ था और वो घुटनों के बल चलने लगा और आज...... आज तो छत पर चल रहा है। अभी आँखें ठीक से खुली भी नहीं थी किन्तु उस दृश्य को देखकर ,अब पूरी तरह खुल गयीं । सुनो...... काँपती सी आवाज में उसके स्वर निकले ,गला दहशत में ,पूरी तरह सूख चुका था। तब तक वो बच्चा चलते हुए ,दीवार से होते हुए ,नीचे आकर अपनी माँ के समीप लेट गया। उसका बोल नहीं निकल रहा था किन्तु फटी -फटी आँखों से अपने बेटे को देख रही थी।
रातभर नींद भी आई या नहीं किन्तु वो प्रातः काल ही उठ गयी और अपने पति से उसने रात्रि वाली बात बताई ,उसने कहा -मैंने तो नहीं देखा ,तुमने शायद सपना देखा होगा।
नहीं ,ऐसा कैसे हो सकता है ?मैंने उसे देखा है ,पूरे विश्वास के साथ कहती है किन्तु उसका पति जानबूझकर उसकी बातों को,उसका सपना बतलाकर झुठला देना चाहता है। समझ नहीं आता ,आजकल मुझे इतनी गहरी नींद कैसे आने लगी ? पहले तो थोड़ी से आहट पर ही नींद खुल जाती थी और अब......
तभी उसके पति वो बोलते हैं ,पहले तुम्हें माँ न बनने का दुःख परेशान करता था किन्तु आजकल अब बेटा बराबर में सोता रहता है तो चैन की नींद आ जाती है।
शायद ,तुम सही कह रहे हो ,मैं ही न जाने क्या -क्या सोचने लगती हूँ ? हो सकता है ,जो पंडित जी कह कर गए हैं ,उसका मन पर असर हो। इतना छोटा बच्चा ,भला क्या कर सकता है ?उन्होंने भी पति की हाँ में हाँ तो मिला दी किन्तु मन ही मन सोच रहीं थी ,इतना बड़ा भ्र्म तो नहीं हो सकता आज जागकर देखूंगी।
उधर उनके पति सोच रहे थे ,तुमने तो इसे इस अवस्था में आज रात्रि ही देखा था ,मैं तो कई दिनों से देख रहा था ,इसमें अद्भुत, अजीब ही शक्ति है ,छत -दीवार सभी पर चलता है ,एक दिन तो उन्होने उसे कमरे के बाहर किसी पक्षी को खाते देखा ,पता नहीं ,वो पक्षी इसके करीब कैसे आया ?कैसे इसने उसे पकड़ा ?खा -पीकर किसी अबोध बालक की तरह आकर चुपचाप अपनी माँ के समीप आकर लेट गया। पंडित जी शायद सही कह रहे थे ,किन्तु इन्होने किसी को भी कुंभर्क के विषय में बताना बेहतर नहीं समझा। जब तक बीत रही है ,बिताएंगे। इसकी माँ तो खुश है ,दिन में तो इंसानो की तरह ही रहता है ,अभी उसके रात्रि के रूप को उनके सिवा ,कल उनकी पत्नी ने देखा ,उसको भी उन्होंने अभी उसका सपना , वहम बताकर उसे समझा दिया।
आज रात्रि को वो शीघ्र ही सो गयीं किन्तु जो सोई तो सुबह ही उठ पाई ,पता नहीं ,आजकल मुझे इतनी गहरी नींद क्यों आने लगी है ?एक बार सोने लगी तो , प्रातः काल ही ,आँख खुलती है।
ये तो अच्छी बात है ,अच्छे स्वास्थ्य की निशानी है।
ऐ जी ,मैं आपसे पूछती हूँ ,पंडितजी ने जैसे कहा था ,अभी ऐसा कुछ भी ''कुंभर्क ''में दिखलाई नहीं देता।
तुम बेफिक्र रहो !हमारे बेटे के साथ ऐसा कुछ नहीं होगा क्योंकि उन बाबा ने अंधकार तो किया था किन्तु ईश्वर की कृपा से चांदनी भी तो आ ही गयी ,उसने जो भी सोचा होगा ,कुछ अच्छा ही सोचा होगा।
रात्रि में ,कुंभर्क का आकार भी बड़ा हो जाता ,उसके पिता शांत रहकर चुपचाप उसकी हरकतों को देखते ,जब वो बाहर जाता ,तब धीरे से उसके पीछे जाते ,कहीं वो किसी इंसान को हानि न पहुंचाए।
उनकी पत्नी ने एक दिन ,सोने से पहले वो दूध नहीं पीया जो प्रतिदिन की तरह उनके पति ,उनके लिए बनाते थे क्योंकि उन्हें वहम हो चुका था कि आजकल मुझे इतनी नीद क्यों आ रही है ?अर्धरात्रि में जब आहट से उसकी आँख खुली ,तो क्या देखती है ?उसका बेटा ,अब अपने पैरों पर खड़ा है और चल रहा है ,अभी तो ये दो माह का ही हुआ है और ये दो वर्ष के बच्चे की तरह चल रहा है ,दरवाजा अपने आप खुल जाता है और वो बाहर निकल जाता है ,पहले तो उन्हें अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ किन्तु उसके बाहर जाते ही वो उसके पीछे दौड़ी किन्तु तभी एक हाथ आगे आता है और उनका हाथ पकड़ लेता है। वो पहले ही दहशत से भरी हुई थी ,ड़र के कारण चीख निकलती उससे पहले ही ,किसी ने मुँह पर हाथ रख दिया। इससे वो ,इस तरह के अचानक हमले से और बुरी तरह घबरा गयी ,वो फटी -फटी आँखों से ये देखने और सोचने का प्रयास करने लगी कि इस तरह कौन ऐसी हरकत कर सकता है ?

