मंगल करता,सभी की जिंदगी में दंगल।
कोई नहीं चाहता ,हो कुछ भी अमंगल।
समझ नहीं आता ,कोई ग्रह है मंगल।
या फिर हम पर मंगल की ग्रह है।
अर्थ तो शुभ है ,मंगलकारी है।
फिर ये सभी पर क्यों भारी है ?
जो विशिष्ट है ,वही मंगली है।
मंगली की ,मंगली से जोड़ी श्रेष्ठ है।
मंगलमूर्ति ,राम दुलारे 'मंगलकारक' हैं।
एक मंगल डाकू है ,एक मंगलपांडे देशभक्त !
मंगल -अमंगल कुछ नहीं ,सब कर्मों का फ़ल है।
अथक प्रयास किये , रहे नहीं ,पहुँच गए 'मंगल 'तक.......
