कीर्ति ने उस समय ,अमृता से हाथ मिलाना ही बेहतर समझा। मन ही मन कीर्ति सोच रही थी -ये कह तो सही रही है। राकेश तो मुझे बेवकूफ ही बना रहा था। उसे सोचते देख ,अमृता कीर्ति से कहती है -ये कार्य उनकी टीम का है ,सभी ने मिलकर निर्णय लिया है ,अकेले राकेश के हाथ में कुछ भी नहीं है। रही बात रोल की ,हमें जो भी किरदार मिला है ,बराबर का ही तो है ,सहेलियां साथ ही रहतीं हैं ,उन पर ही सम्पूर्ण कहानी बनी है, विपरीत रोल भी मिलते हैं ,तब देखा नहीं ,कोई -कोई तो ,विलेन के रूप में ही अपना कितना नाम कर गया ? सबसे बड़ी बात तो हमारे लिए ये होनी चाहिए ,कि हमें इसमें कार्य करने का सुअवसर मिला। तुमने देखा नहीं, कितने हमारे ही साथ के वापिस चले गए। बस ,अब तो भगवान से यही प्रार्थना करो कि ये धारावाहिक खूब चले ,ताकि घर -घर में हमारी पहचान बने। तब हम पर और निर्माता निर्देशकों की दृष्टि पड़े ,और क्या ही अच्छा हो ,हमें फिल्में भी मिलने लगें। कहते हुए ,अमृता मुस्कुरा रही थी।
कीर्ति ने देखा ,इसके अंदर कितनी सकारात्मकता भरी हुई है और ये कितना आगे बढ़ने की सोच रही है ?और मैं शुरुआत में ही गलत राह पकड़ , चलने की सोचने लगी। तभी कीर्ति को एक मजाक कहो या फिर सुझाव मन में आया और बोली -आज से मैं तुम्हें 'मुक्ता 'ही कहकर पुकारा करूंगी ,कहानी में भी तो मेरी सहेली मुक्ता ही है।
तुम्हारी जो इच्छा हो तुम कह सकती हो ,तभी बोली -चलो ! इस दोस्ती के नाम ,क्या तुम 'पानी -पूरी 'खाना पसंद करोगी ?नहीं तुम्हें हमारे यहाँ के 'गोल -गप्पे' खिलाती हूँ ,कहते हुए हंसने लगी। ऑटो वाले से बोली -भइया यहीं रोक दीजिये ! कहकर वो दोनों ऑटो से उतरती हैं और पानी -पूरी के ठेले पर पहुंच जाती हैं। भइया जल्दी से खट्टी -चटपटी पानी की पूरी खिलाइये और तुम....... अमृता ने कीर्ति से पूछा।
मुझे मीठा पानी पसंद है , दोनों ने गोल -गप्पो से ही पेट भर लिया ,कीर्ति के मन में कुछ भी रहा हो किन्तु अमृता आज बेहद प्रसन्न थी ,अब अपने साथ के सभी लोगो से उसका व्यवहार मधुर था। सभी अपने -अपने किरदार में मेहनत कर रहे थे। धारावाहिक घर -घर में देखा जा रहा था ,मुक्ता और उसकी सहेली का रोमांचकारी रिश्ता ,यह जानने के लिए अब सभी अगला भाग देखने की इच्छा रखते हैं कि आगे क्या होगा ?दोनों का रिश्ता अब आगे क्या गुल खिलायेगा ? क्या मुक्ता की सहेली उसके प्रेमी को अपनी ओर आकर्षित कर पायेगी या नहीं इसी कश्मकश में धारावाहिक की रेटिंग बढ़ती जा रहीं थीं। घर -घर में लोग उन्हें जानने लगे थे। उनके बड़े -बड़े चित्र दीवारों पर नजर आते थे। लड़के तो मुक्ता की एक -एक अदा पर मर मिटने को तैयार रहते। अब इतनी प्रसिद्ध हो गयी जहाँ भी चली जाये ,लोगों की भीड़ उसे घेर लेती ,उसका निकलना मुश्किल हो जाता।
घर पर मम्मी -पापा भी अक्सर उसे उसकी प्रशंसा में चिट्ठी भेजते ,उस समय फोन ऐसे नहीं थे। घर में एक फोन ही लग जाये वही बहुत था ,तब मुक्ता ने भी अपने घर में भी ,वही फोन लगवा दिया। अब अमृता को उसके असली नाम से जानता ही कौन था ?''व्यापारी वर्ग ''मुक्ता को अपने व्यापार के उद्घाटन में उसे बुलाकर अपने को गौरवान्वित महसूस करते थे। पैसा आने से ,आदमी का रहन -सहन और सौंदर्य कितना बदल जाता है ? मुक्ता तो पहले से ही सुंदर थी किन्तु अब तो उसकी रौनक देखते ही बनती थी। देखने में अब तो वो एकदम गुलाबी ,कश्मीरी सेब जैसी लगती। उसे कॉलिज में भी बुलाया गया ये दिखाने के लिए कि ये हमारे कॉलिज की ही छात्रा है।
उसकी प्रसिद्धि देखकर ,कभी -कभी उसके पिता को ड़र लगने लगता ,इसकी तरक्की कहीं इसके सिर पर न चढ़ जाये ?जब पैसा और शौहरत मिलती है तो अहंकार भी ,कहीं न कहीं अपनी जगह बना ही लेता है। उसकी सौतेली माँ को लगता -कहीं ये मेरे पहले व्यवहार के कारण ,घर में खर्चा न भेजे। हालाँकि अभी भी पैसों की कोई कमी नहीं थी किन्तु महंगे शौक भी तो कोई महत्व रखते हैं। वो तो अमृता की कमाई से ही पूरे होते। अमृता को भी ड़र था ,इस धारावाहिक के पश्चात ,अब कहाँ काम करेगी ?अब आगे क्या करना है ?एक दो फ़िल्मों के लिए भी ,उसे ऑफर आये हैं किन्तु उनमें उसके लिए न के बराबर ही किरदार था ,इसी धारावाहिक की तरह ही ,अच्छी फिल्म भी चाह रही थी। धारावाहिक के समाप्त होते -होते अमृता को एक अच्छी फ़िल्म भी मिल गयी। वो सबसे बड़ी हिट हुई ,अब तो अमृता के पास फिल्मों की लाइन लग गयी। अब वो बड़े पर्दे की रानी बन चुकी थी। वो चाहती तो ,अपने घर से अपने पिता और माँ को ला सकती थी किन्तु उसने ऐसा नहीं किया उनकी आर्थिक सहायता तो की किन्तु अपने पास नहीं बुलाया।
वो जानती थी ,दूर से ही रिश्ते प्यार भरे रहते हैं ,माँ तो उसे देखकर कभी खुश नहीं हुई ,यहाँ उसका रहन -सहन देखकर जलने और उसे लूटने के सिवा कुछ नहीं कर पायेगी। पिता को भी नहीं बुला सकती ,अब उसका रहन -सहन बहुत बदल गया ,शायद उन्हें ये सब पसंद न आये। लोगों से मिलना पार्टियों में जाना ,देर रात घर आना ,अब उसे अकेले रहने की आदत भी बन गयी है ,किसी की टोका -टाकी भी उसे पसंद भी नहीं आएगी। ऐसे ही आज वो एक पार्टी में जाने के लिए तैयार हो रही थी ,आज उस पार्टी में शायद उसे कोई नई फ़िल्म ही उसके हाथ लग जाये। ऐसी पार्टियों में लोग इसीलिए तो जाते हैं ,ताकि चार लोगों से मिलें ,जान -पहचान बढ़े और काम भी मिले। आज उसने काला गाउन पहना है जिस पर लाल गुलाब बने हैं ,वो बेहद खूबसूरत लग रही है। आज उसे लग रहा है ,कोई नई फ़िल्म मिल सकती है।
पार्टी अपने जोरो -शोरों पर थी ,अमृता खूब मस्ती में थी तभी ,उसकी नजर एक तरफ गयी और वो एकदम जैसे सुन्न हो गयी उसे एक बिजली का झटका सा लगा उसने अपनी गर्दन को झटका दिया। क्या ये एक सपना है ? या सच है।

