खुशियों , का वज़ूद हमसे है ,
हमसे ही नहीं ,हमारे व्यक्तित्व से है।
किसी को खुश देखकर, मिलती है ख़ुशी !
किसी के साथ रहकर , मिलती है ख़ुशी !
किसी को साथ रखकर, मिलती है ,ख़ुशी !
अपना स्वार्थ पूर्ण होने पर ,मिलती है ,ख़ुशी !
किसी का साथ निभाकर मिलती है ,ख़ुशी !
किसी के जख्मों को कुरेदकर मिलती है , ख़ुशी !
मुस्कुराहटों में इजाफ़ा करके ,मिलती है ,ख़ुशी !
सितमग़र को, सितम करके ,मिलती है ,ख़ुशी !
कलाकार को अपनी कला में मिलती है ख़ुशी !
वजह -
तुझमें खुश रहने की वजह ढूंढता हूँ।
तेरे अश्कों में ,तेरी ख़ुशियाँ ढूंढता हूँ।
जुल्फों की छाँव में , साया ढूंढता हूँ।
तेरे दिल में , अपनी जगह ढूंढता हूँ।
ज़िंदगी में तेरे आने की वजह ढूंढता हूँ।
तेरी रूह में समाने की जगह ढूंढता हूँ।
तेरे लिए खुशियों की वजह ढूंढता हूँ।
तुझमें अपना हमसफ़र दोस्त ढूंढता हूँ।
अपने जीवन में तेरा वज़ूद ढूंढता हूँ।
तुझमे अपने इश्क़ का नूर ढूंढता हूँ।
तेरे ख्वाबों की ताबीर ढूंढता हूँ।
तुझमें इश्क़ का इल्म ढूंढता हूँ।

