बचपन कितना अबोध ,चंचल और मासूम होता है।
उमंगों ,शरारतों भरा ,बचपन बड़ा हसीन होता है।
बचपन न अमीर... ,न ग़रीब ,वो तो मस्त होता है।
ग़रीबी से भी बचपन जूझता है ,मुस्कुराता रहता है।
बचपन अपने में और अपनों में मस्त रहना चाहता है।
अमीरी में भी बचपन.... ,मुक्त और स्वेच्छा चाहता है।
कौन कहता है ,बचपन ग़ैर जिम्मेदार और नकारा होता है।
बचपन में ही ,बचपन ने ज़िम्मेदारियों को सम्भाला होता है।
बचपन जब अपनी उम्र से आगे निकलता है ,ज्ञानी होता है।
जवानी की दहलीज पर खुश होकर भी बचपन तलाशता है।
बचपन का संघर्ष -
संघर्षों में भी ,जीता है ,बचपना !
उफ...... तक नहीं करता है ,बचपन !
फिर भी खिलखिलाता मुस्काता है बचपन !

