Bachapan

बचपन कितना अबोध ,चंचल और मासूम होता है।

उमंगों ,शरारतों भरा ,बचपन बड़ा हसीन होता है।  

 बचपन न अमीर...  ,न ग़रीब ,वो तो मस्त होता है।

ग़रीबी से भी बचपन जूझता है ,मुस्कुराता रहता है।  

बचपन अपने में और अपनों में मस्त रहना चाहता है।  

अमीरी में भी बचपन.... ,मुक्त और स्वेच्छा चाहता है।

कौन कहता है ,बचपन ग़ैर जिम्मेदार और नकारा होता है। 

बचपन में ही ,बचपन ने ज़िम्मेदारियों को सम्भाला होता है।  

बचपन जब अपनी उम्र से आगे निकलता है ,ज्ञानी होता है। 

जवानी की दहलीज पर खुश होकर भी बचपन तलाशता है। 


बचपन का संघर्ष -



संघर्षों में भी ,जीता है ,बचपना !

उफ...... तक नहीं करता है ,बचपन !

फिर भी खिलखिलाता मुस्काता है बचपन !



laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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