Haunted [part 15 ]

पांचों भूत बच्चे ,डिकोस्टा भूत अंकल के साथ ,उनके बेटे की तलाश में जा रहे थे। काफी दूर चलने पर ,थकने के कारण ,एक जगह रुक जाते हैं और डिकोस्टा की ताकत देखते हैं किन्तु उन्हें इस बात से थोड़ी दिक्क्त महसूस  होती है कि इनके अंदर ,इतनी ताकत कैसे आई ? न जाने कितनी रूहें ?वहाँ घूम रहीं थीं। कुछ शांत जा रहीं थीं ,कुछ उन्हें घूर रहीं थीं ,जैसे उन बच्चों ने उधर आकर कोई गलती कर दी हो। उनका कोई रहने का निश्चित स्थान भी तो नहीं था। यूँ ही भटक रहे थे। कुछ देखने में बिल्कुल शैतान ही लग रहे थे ,तब रोहित ने डिकोस्टा से  पूछा -कुछ भूतों को देखकर तो लगता है ,जैसे ये लोग हमें ही खा जायेंगे या मार डालेंगे। 

हाँ ,ये ऐसे ही होते हैं ,इन्हें' प्रेत 'कहते हैं ,और इनसे भी ख़तरनाक 'जिन्नात 'होते हैं ,उनकी भी अलग -अलग प्रजाति होती है ,डिकोस्टा ने समझाया। 


ये क्या कह  रहे हैं ?भूतों में भी अंतर् होता है तन्मय आश्चर्य से बोला। 

हाँ ,जिस तरह इंसान होते हैं ,दिखते एक जैसे हैं किन्तु सभी में कुछ न कुछ अलग विशेषता होती है ,उसी तरह भूत भी एक जैसे ही दिखते हैं किन्तु उनकी भी अलग -अलग विशेषता तो नहीं कह सकते किन्तु क्रूरता में अलग होते हैं और यही क्रूरता ही ,उनकी अलग पहचान बनाती है और उन्हें अन्य भूतों से अलग करती है। 

बाप रे...... आप तो भूतों के विषय में बहुत जानकारी रखते हैं निम्मी बोली। 

हाँ ,क्योंकि मैं भी एक भूत ही हूँ ,कहते हुए वो हंसने लगे ,उनकी बात समझकर बच्चे भी हंसने लगे।

तभी एक भूत ने अफ़रोज को अपनी  तरफ  बुलाने का इशारा किया ,अफ़रोज जैसे ही अपने समूह से थोड़ा अलग हुआ ,तभी डिकोस्टा की गंभीर आवाज सुनाई दी-कहाँ जा रहे हो ?अफ़रोज ने उस ओर इशारा किया जिधर वो भूत था किन्तु तब तक वो ग़ायब  हो चुका था। कुछ भी नहीं है आगे बढ़ो ! 

कुछ देर पश्चात ही ,उन्हें एक झोंपड़ी दिखलाई दी ,तब डिकोस्टा बोला -तुम यहीं ठहरो !मैं देखकर आता हूँ ,बच्चे वहीँ रुक गए ,टॉम नहीं माना  और चुपचाप दूसरे रास्ते से उस झोंपड़ी के अंदर चला गया। टॉम ने देखा ,जो डिकोस्टा उनके सामने बहादुर बन रहा था ,वो ही अब उस झोंपड़ी वाले आदमी के सामने गिड़गिड़ा रहा है ,वो कह रहा था -अब तो मेरे बच्चे को छोड़ दो ! मैं उसके बदले में कई 'भूत बच्चे 'ले आया हूँ। तुम उन्हें अपने वश में करके ,उन्हें अपना बंदी बना सकते हो। मेरे बेटे को छोड़ दो !

ओह ! तो ये माजरा है , ये डिकोस्टा हमें यहाँ इस आदमी का बंदी बनाने लाया है ,हो न हो ये हमें बहला -फुसलाकर ,इस आदमी के हवाले करने आया है। ये आदमी अवश्य ही कोई तांत्रिक होगा ,जिसने डिकोस्टा के बेटे को पकड़ रखा है और अब डिकोस्टा उसे हमारी बलि देने जा रहा है। ओह !यहाँ तो मामला ही कुछ ओर है ,देखकर टॉम डरकर बाहर की तरफ भागा और अपने दोस्तों के पास पहुंच गया। भागो !भागो !भागो यहाँ से ,कहते हुए वापस अपने रास्ते बढ़ गया। सभी बच्चे उसके पीछे आ रहे थे और उसे आवाज लगा रहे थे। 

रोहित ने पुकारा -रुक भी जाओ ,टॉम ! ऐसा तुमने क्या देख लिया ? जो भागे जा रहे हो।

मैंने एक इंसान को देखा ,तुम्हें ध्यान है ,किसी ने हमसे कहा था -भूतों को इंसानों से खतरा होता है ,वे हम लोगो को अपने वश में कर लेते हैं और अपने कार्य करवाते है। 

वो तो ठीक है ,तुमने इंसान को देखा ,किन्तु डिकोस्टा अंकल भी तो वहीँ गए हैं। 

उसे अंकल मत कहो !उसने हमें धोखा दिया है ,हम बच्चों  का लाभ उठाया है। वो हमें अपने बेटे के बदले उस इंसान को सौंपने आया है। 

क्या????

हाँ ,वो कोई बहादुर नहीं ,वो तो उस इंसान के सामने गिड़गिड़ा रहा था ,मेरे बेटे को छोड़ दो ! बदले में वो हमें उसे सौंपने के लिए लाया है। 

ये उसने अच्छा नहीं किया अफ़रोज़ बोला -मुझे तो पहले से ही शक़ था कि जो अभी -अभी भूत बना है ,उसमें दूसरे के शरीर में ,घुसने की ताकत कहाँ से आई ? हमें तो नहीं आती ,अवश्य ही उसे और भी शक्तियां आती होंगी उसने हमें अपने विषय में सब झूठ बताया। चलो !सभी यहाँ से ,अब हम उसके साथ नहीं रहेंगे ,न ही जायेंगे। कहते हुए वो भी आगे बढ़ गया।

 तन्मय बोला - जब उनमें इतनी शक्ति है तो अपने बच्चे को क्यों नहीं बचाया ? क्या उन्होंने उसे बचाने की कोशिश नहीं की होगी ? अवश्य ही की होगी ,इसका अर्थ  है ,वो इंसान उनसे भी ताकतवर है ,यानि वो एक तांत्रिक है ,और उसने उनके बच्चे को अपने वश में करके ,हमें लाने  के लिए विवश कर दिया।

 यानि उसमे भूतों से भी ज्यादा ताकत है और हम बच्चे उसका सामना नहीं कर सकते ,चलो !यहाँ से भागो कहते हुए निम्मी भी भागने लगी। 

रुको !रुको.... तो जरा !तन्मय बोला -हम क्यों भाग रहे हैं ?

क्योकि उस डिकोस्टा ने हमें धोखा दिया ,हमसे झूठ बोला ,अपनी सहायता के लिए ,टॉम गुस्से से बोला। 

ठीक है ,उन्होंने झूठ बोला किन्तु उन्होंने सहायता भी तो मांगी ,इसमें तो कोई झूठ नहीं है। 

तो क्या......  तुम उसकी सहायता करने वाले हो तुम भूल रहे हो ,हम कोई इंसान नहीं ,हम भूत हैं रोहित भी नाराज होते हुए बोला। 


यार..... वही तो मैं कह रहा हूँ ,थोड़ी सी तो 'भूतानियत 'रखो। 

अब ये ''भूतानियत'' क्या बला है ?निम्मी ने पूछा। 

जैसी इंसानों में इंसानियत होती है ,तो भूतों में ''भूतानियत ''भी तो होनी चाहिए। 

अब इस ''भूतानियत'' के लिए हमें क्या करना होगा ? टॉम गुस्से से बोला। 

हम अभी छुपकर , डिकोस्टा अंकल पर नजर रखते हैं ,देखते हैं ,वो क्या करते हैं ?हमें ये सोचने का मौका भी मिल जायेगा कि हमें उनकी सहायता करनी भी चाहिए या नहीं ,करनी चाहिए तो किस तरह से हम उनकी सहायता कर सकते हैं ?ये सोचने का मौका भी मिल जायेगा।

इसी योजना के तहत सभी बच्चे छुप जाते हैं ,डिकोस्टा उस झोंपड़े से बाहर आता है ,बाहर बच्चों को न पा दुःखी हो जाता है। वो आस -पास बच्चों को खोजता है ,तब उसकी हालत रोने जैसी हो जाती है। तब तन्मय उसके पास आता है ,उसे देखकर डिकोस्टा खुश हो जाता है और पूछता है ,तुम लोग कहाँ चले गए थे ? 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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