सलमा की सास क्रोधित होती है कि इस पड़ोसी ने मेरे घर में घुसने की हिमाकत कैसे की ?तब वो पड़ोसी उन्हें बताता है ,मैं अकेला ही तुम्हारे घर में नहीं घुसा हूँ ,इंस्पेक्टर साहिबा भी मेरे संग हैं। मैं भी कोई अजनबी नहीं ,तुम्हारा रिश्तेदार ही हूँ।
तुम हमारे रिश्तेदार हो तो क्या ?तुम्हें हमारे घर में घुसने की इजाजत मिल गयी ? घर में हमारी बहु है ,तुम इस तरह इन मैडम साहिबा !को लेकर घर में आ गए। असल में तो वो इंस्पेक्टर साहिबा को देखकर मन ही मन घबरा रहीं थीं ,अपनी उस घबराहट को अपने क्रोध से छिपा रहीं थीं।
तुम्हारी बहु से ही तो मिलने आये हैं ,जरा सलमा को बुला दीजिये ,इंस्पेक्टर साहिबा ने नम्रता से कहा।
क्यों ?हमारी बहु से क्यों मिलना है ? उसने क्या किया है ?
''इंस्पेक्टर दीप्ती ''नाम है मेरा ! मुझे आपकी बहु से कुछ बात करनी है।
मन ही मन वो घबरा गयी किन्तु अपने मन की घबराहट को छुपाकर बोली - किस सिलसिले में ?
पहले आप अपनी बहु को तो बुलाइये ,आपके सामने ही सारी बातें होंगी।
कोई भी उपाय न मिलने पर अपने पोते से बोलीं -जा रे...... अपनी अम्मी को बुला ला !
वो तो पहले से ही तैयार बैठा था उसे सलमा ने पहले ही समझा दिया था ,बोला -अम्मी तो घर में नहीं है। मैं इन लोगों से भी तो यही कह रहा था किन्तु ये तो माने ही नहीं।
उन्हें नहीं पता था ,कि पोते को सलमा ने झूठ बोलने के लिए कहा है ,उसके न होने की खबर सुनकर भड़क गयी ,अब कहाँ गयी है ? कुछ बताया भी नहीं ,तभी पोते पर चिल्ला दी ,किसी से कुछ कहकर गयी है।
नहीं ,हमें नहीं मालूम !
रेहाना का पति बोला -मैंने तो उसे कहीं बाहर जाते नहीं देखा ,मैं तो दो घंटे से सलीम मियां की दुकान पर बैठा था ,मैंने तो उसे कहीं जाते देखा नहीं।
सलमा की सास उससे चिढ़ते हुए बोलीं -तू क्या आती -जाती औरतों को ताड़ता रहता है ?बुरखे में भी पहचान लेता है ,उनकी लताड़ से वो चुप हो गया। तब वो बोलीं -इंस्पेक्टर साहिबा हमारी बहु से आपको जो भी पूछना है ,हमें बता दीजिये ,हम उससे पूछ लेंगे।
ये क्या बात कर रहीं हैं ?आप !जरा अंदर तो जाकर देखिये !कभी आपकी बहु अंदर ही हो ,आप तो बाहर से आई हैं आपको क्या मालूम होगा ?
जब बच्चे मना कर रहें हैं ,नहीं है ,तो नहीं होगी।
आपके बच्चों को ये भी तो नहीं मालूम ,वो किधर गयी है ?ये आपका लड़का अंदर से ही आया था ,क्या मालूम ,उसने इससे मना करवा दिया हो ?वो हमसे छुप रही हो।
पहली बात मैडम जी !ये मेरा बेटा नहीं पोता है ,मैं इसकी दादी यानि बड़ी अम्मी हूँ ,दूसरे हमारी बहुरियां क्यों छुपने लगी ?उसने कौन सा ग़ुनाह किया है ?
यही तो हम उससे पूछना चाहते हैं ,यदि वो सही है सच्ची है तो उसे छुपने की और झूठ बोलने की क्या जरूरत आन पड़ी ?
देखिये !आप हमारी दुल्हिन पर सरासर इल्ज़ाम लगा रहीं हैं ,ऐसा उसने क्या किया है ?
ये मैं ,दावे के साथ तो नहीं कह सकती किन्तु बाहर जो पोस्टर लगाए गए हैं ,ये आपके पड़ोसी कह रहे हैं ,ऐसी औरत हमारे पड़ोस में रहती है ,वो पोस्टर एक ''बच्चा चोर ''का हैं ,जो बच्चे चुराती है और न जाने उनका का क्या करती है ?ये तो उससे मिलने पर ही पता चलेगा ,हमें उस ''बच्चा चोर'' महिला की ही तलाश है।
इंस्पेक्टर साहिबा की बात सुनकर ,वो अपने पड़ोसी पर ,गुस्से से फुफकारी -नाशपीटे !तूने मेरी बहु पर बच्चा चोरी की तोहमत लगाई ,उससे [बहु से ]तो मैं बाद में निपटूंगी पहले तुझे देखती हूँ ,तुझे मेरी बहु चोर नजर आ रही है ,कहते हुए कोने में रखी एक डंडी उठाई और उसकी तरफ मारने दौड़ी ,वो तो बाहर की तरफ भागा। जब वो हाथ नहीं आया तब इंस्पेक्टर साहिबा से बोलीं -मैडम जी !आप भी न किस मनहूस की बातों में आ गयीं ?इसका खुद का बच्चा नहीं मिला ,तबसे पगला गया है।
वो तो ठीक है ,किन्तु इस बेचारे ने भी तो अपना बच्चा खोया है ,ये रोज थाने में चक्कर लगाता है ,वहीँ उसने वो तस्वीर देखी ,जो आपकी बहु से मिलती -जुलती है ,अंदर जाकर एक बार आप जाँच लीजिये आपकी बहु है भी या नहीं ,मैं एक बार उससे मिल लूंगी ,तसल्ली हो जाएगी ,आपकी बहु ने कुछ गलत नहीं किया है तो उसे कुछ नहीं होगा और मैं चली जाऊँगी।
न चाहते हुए भी ,वो अंदर गयी ,उनके अंदर जाने से पहले ही, सलमा घर के पीछे ,कबाड़खाने में छुप गयी। अंदर से बाहर झांकते हुए ,वो बोलीं -मैं सही कह रही थी ,वो नहीं है ,मुझ पर यकीन न हो तो आप अंदर आकर देख लीजिये। उन्हें सलमा के अंदर होने का थोड़ा भ्रम तो था किन्तु अब उसके न दिखने पर पूर्णतः आत्मविश्वास बढ़ गया।
नहीं आप समाज की इतनी ज़िम्मेदार महिला हैं ,ऐसी गैरज़िम्मेदाराना हरकत तो नहीं करेंगी कहकर दीप्ती उठती है और कहती है -जब आपकी बहु आ जाये तब आप ही उसे लेकर थाने में आ जाइयेगा ,उससे थोड़ी पूछताछ हो जाएगी, बस....... यदि उसने छुपने अथवा भागने की कोशिश की तो कानून की नजर में वो गुनहगार साबित हो जाएगी।
जी ठीक है ,कल मैं उसे लेकर आ जाउंगी ,कहते हुए उन्होंने चैन की साँस ली ,अंदर आकर आँखें तरेरते हुए बोलीं -ये सलमा किधर गयी ?तुमसे किसी को नहीं पता ,तुम्हारी अम्मी किधर गयी है ?
वो कहीं नहीं गयी ,वो तो घर में ही है ,उनका बड़ा पोता अबरार बोला।
हैँ...... उसकी बात सुनकर वो अचम्भित होकर बोलीं -कहाँ है ?मुझे तो नहीं दिखी ,तब क्यों नहीं बोला ?जब पुलिसवाली आई थी।
अम्मी ने ही मना किया था।
क्यों ,भला !जब उसके मन में चोर नहीं ,उसने कुछ किया ही नहीं तो वो छुप क्यों गयी ?सच्ची थी तो आकर उस कलमुँहें रिश्तेदार का और उस पुलिसवाली का सामना करती। मैं बेवजह ही ,उनसे लड़े जा रही थी ,खोट तो अपने ही अंदर था। अब जा !उसे बुलाकर तो ला ,पूछूं तो जरा , माज़रा क्या है ?
अम्मी ..... ओ अम्मी....... ! इधर आओ !बड़ी अम्मी बुला रहीं हैं।बड़े लड़के ने वहीँ से अपनी अम्मी को आवाज़ दी। कुछ देर के इंतजार के पश्चात भी, वो नहीं आई। तब उसकी सास भड़क गयी ,कहाँ चली गयी ?ऐसे क्या जहन्नुम में गयी है ?मैंने भी तो अंदर झांककर देखा था ,मुझे तो नहीं दिखी ,कभी तुमसे बिन बताये ,बाहर खिसक गयी हो।
नहीं अम्मी ने हमसे ही तो मना किया था ,जब पुलिसवाली आई थी न..... तब अम्मी ने ही कहा था -कह देना ,मैं नहीं हूँ।
अच्छा !!!वे आश्चर्य से बोलीं ,इसका मतलब जरूर उसने कुछ झोल किया है ,तभी तो पुलिस को देखते ही छुप गयी ,आज आ जाने दे तेरे अब्बू को..... वही उसकी खबर लेगा कहते हुए उन्होंने ड़र वाली धमकी भी दे डाली।

