सलमा की तस्वीरें ,अब पोस्टरों के रूप में ,दीवारों पर चिपक गयीं ,अब तक तो बुरखे के कारण उसकी किसी को कोई जानकारी नहीं थी किन्तु अब तो उसके चेहरे की पहचान हो चुकी है। इस बात की जानकारी ,उसे स्वयं भी हो चुकी है। इसी कारण वो मुँह तड़के ही उठकर सौदा लेने बाजार गयी थी किन्तु उस दीवार पर लगे ,अपने पोस्टर को हटाकर आ गयी। बच्चा चोर महिला की तलाश जोर -शोर से जारी है। अभी भी , अपने घर में उसने किसी से भी इस बात का जिक्र तक नहीं किया और अपने बेटे को ,सौदा लाने बाजार भेज दिया।बाजार में ,उसने भी अपनी अम्मी की तस्वीर देखी , घर आकर वो उस बात को भूल गया किन्तु जैसे ही खाना खाने बैठे ,तभी वो एकाएक बोल उठा -अम्मी मैंने बाहर तुम्हारी फोटो देखी।
उसकी बात सुनते ही ,सलमा ने सभी के चेहरों को देखा ,सभी के चेहरों पर जैसे ''प्रश्नात्मक चिह्न ''बन गया। सभी की दृष्टि उसके चेहरे पर आ जमी। उसे समझ नहीं आ रहा था ,वो क्या कहें ?तभी बोली -धत..... मेरा फोटो ! मेरा फोटो तूने कहाँ देख लिया ?
दीवार पर चिपका था ,जैसे वो ''गुमशुदा की तलाश ''में चिपका दिखलाई देता है। सलमा का दिल जोरों से धड़कने लगा, अपने को संभालने का प्रयास करते हुए भी ,उसकी आवाज काँपने लगी ,बोली -भ ...ला.... मेरा.. फोटो क्यों होगा ?मैं कोई ''गुमशुदा ''हूँ। तुने बेकार में सबके मन में वहम डाल दिया ,चलो ,तुम सब मेरा चेहरा क्यों देख रहे हो ? सुबह -सुबह इसने क्या मनहूस खबर सुना दी ? सब मुझपर शक़ करने लगे जैसे मैंने कोई गुनाह कर दिया हो।
नहीं अम्मी ! मैं झूठ नहीं बोल रहा हूँ ,मैंने सच में ,तुम्हारी फोटो दीवार पर चिपकी देखी।
तू अपना खाना खा ,कुछ ज्यादा ही बोलने लगा है। कहते हुए ,उसके मुँह में एक गस्सा ठूंस दिया।
याकूब ने सलमा की तरफ देखा, तब वो उससे नजरें चुराने लगी , मरजानिये ! क्या गुल खिला आई ?जो तेरी फोटो तक छप गयीं ,मैं न कहती थी -कि इसके लक्षण मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहे ,न जाने कहाँ घूमती रहती है ? कुछ बताती ही कहाँ है ? अम्मी तो अपने मन की जैसे सारी भड़ास निकाल देना चाहती थीं।
तभी याकूब बोला -रोटी तो खा लें ,पहले बाहर जाकर देखना होगा ,फोटो इसी की है या किसी और की ,कभी हमारे इस लौंडे को ही कोई गलतफ़हमी हो गयी हो।
नहीं ,अब्बू मैं झूठ नहीं बोल रहा ,वो अम्मी ही है ,उस पर कुछ लिखा भी था किन्तु अंग्रेजी में लिखा था जो मैं समझ नहीं सका।
तेरा खाना हो गया ,याकूब ने अपने उसी बेटे से पूछा।
जी अब्बू !
जा..... और जाकर वो पोस्टर उतार ला।
मैं तो तभी उतार लाता किन्तु कोई देख लेता और पूछता- ये क्यों छुटा रहा है ?तब क्या कहता ?
कोई कुछ नहीं कहेगा ,तू चुपचाप उतारना जब किसी की नजर उधर न हो।
ठीक है कहकर वो बाहर की तरफ चल देता है ,तभी याकूब उसे रोककर कहता है ,कोई देख भी ले और पूछे तो उसे कुछ मत बताना। जी ,अब्बू !
सलमा की धड़कनें जैसे, उसकी पसलियां तोड़कर बाहर आ जाएंगीं ,वो अपने बचाव का उपाय सोच रही थी ,उसकी तस्वीर हुई तो वो याकूब को कैसे समझायेगी ? रोटी उसके सामने रखी थीं किन्तु ड़र के कारण एक निवाला भी मुँह तक न गया। कुछ देर में ही ,लड़का उसे दरवाजे पर खड़ा दिखा और अपने अब्बू से बातें करता दिखा। ड़र भी था और जानना भी चाह रही थी कि क्या हुआ ?तभी अम्मी भी बाहर की तरफ जाती दिखीं ,उनकी आवाज तो पहले से ही तेज है ,बोलीं -क्या हुआ ?
सलमा को अंदर ही सब सुनाई पड़ रहा था ,उसने बताया ,उस फोटो के ऊपर किसी और ने दूसरा कोई इश्तिहार चिपका दिया।
ये सुनकर सलमा ने राहत की साँस ली। बाहर के हालात देखते हुए ,सलमा ने अब घर से बाहर न निकलने का फैसला लिया। दूसरी तरफ मन में ,बस एक और बलि और सभी संकट दूर किन्तु यदि आज याकूब को उसकी करतूतों के विषय में पता चल जाता ,वो नहीं जानती वो उसके साथ क्या सुलूक करता ? हो सकता है ,उसे पीटता और घर से बाहर भी कर देता। मैं ये सब इन्हीं लोगों के लिए ही तो कर रही हूँ किन्तु ऐसे दुःख में कोई साथ खड़ा नहीं दीखता। पैसों पर तो सभी हक़ जतलाने लगेंगे। किसी तरह एक दिन बिता अगले दिन दोपहर बाद ,उनका पड़ोसी दरवाजा पीटता नजर आया। सलमा ने खिड़की में से देखा तो जैसे उसे बिजली का तेज करंट लगा हो , वो ऊपर से नीचे तक काँप गयी। पड़ोसी अकेला नहीं था साथ में पुलिस भी थी। ऐसे में सलमा को लग रहा था कि जमीन फट जाये और वो उसमें धंस जाये।
पड़ोसी था कि दरवाजा पीटे जा रहा था ,तब सलमा ने ,अंदर जाकर अपने बेटे को भेजा ,जा जरा पूछना ,क्या चाहते हैं ? मुझे पूछें तो कह देना अम्मी नहीं हैं ,बाहर गयी हैं।
अरे चच्चाजान आप !किन्तु वो तो जैसे आपे में नहीं थे ,न ही कुछ सुनना चाहते थे ,तपाक से बोले -सलमा कहाँ है ?उसे बाहर बुलाओ !
अम्मी तो यहाँ नहीं हैं ,जैसे सलमा ने कहा था ,वही कह दिया।
कैसे नहीं है ?अंदर ही होगी ,बुलाओ उसे बाहर ,सलमा बेग़म ! जरा इधर तो आइये ,वो स्वयं ही आवाज लगाने लगे। अंदर से कोई आवाज न पाकर ,उनका क्रोध और भी बढ़ गया और इंस्पेक्टर साहिबा से बोले -यहीं है ,वो बच्चा चोर ! आप ज़नानख़ाने में जाकर उन्हें लिवा लाइए। उसने हमें बेऔलाद कर दिया ,उसे किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं है।
तभी पीछे से अम्मी भी आ गयीं ,आते ही बोलीं -ये हमारे पीछे हमारे घर में क्या हो रहा है ?ये क्या तरीका है ?बहु -बेटी वाले घर इस तरह कौन घुसता है ?
मैं तुम्हारा पड़ोसी और ये पुलिस साहिबा जी हैं उसने जैसे परिचय दिया।
वो तो ठीक है ,किन्तु मेरे घर में क्या कर रहे हो ?
तुम्हारी बहु सलमा से मिलना है ,एक बात और मैं कोई ऐरा -ग़ैरा नहीं ,तुम्हारा पड़ोसी ही नहीं ,रिश्तेदार भी हूँ।
तो..... तू रिश्तेदार है ,तो क्या ?इस तरह घर में घुसने की इजाज़त तुझे किसने दी ?

