टॉम ,निम्मी ,अफ़रोज ,रोहित और तन्मय पांचों भूतों की टोली में पहुंच जाते हैं। किन्तु वो भूतों के नियम मानना नहीं चाहते थे ,तभी एक बेहद ख़तरनाक भूत नाराज हो जाता है और तब एक शांत भूत ,उन बच्चों को उससे बचाकर खाना खाने के लिए कहता है। पांचों बच्चे अच्छे -अच्छे खाने की कल्पना कर रहे थे। तभी उन्होंने देखा उनके सामने रक्त और मांस के टुकड़े रखे गए है ,जिसको खाने से उन लोगों ने इंकार कर दिया। अफ़रोज बोला -यार..... मैं तो खा भी लेता किन्तु ये पका हुआ तो होता।
रोहित और तन्मय तो जैसे ज़िद पर अड़ गए ,नहीं ,हमने आज तक कभी मांस नहीं खाया और अब भी नहीं खाएंगे।
तब तुम्हारे लिए क्या लाया जाये ?वो चिंतित होते हुए बोले।
पिज्जा ,बर्गर ,चाउमीन ,कॉर्न रोल ,आइसक्रीम ,रबड़ी फलूदा निम्मी झट से बोली।
वो शांत भूत आश्चर्य से उनका मुँह देखने लगा ,ये सब क्या है ?उसने पूछा।
क्या ?????आपने आजतक ऐसा खाना नहीं खाया।
नहीं ,मैं तो जब जिन्दा था ,दाल -रोटी और छाछ और आम का अचार ,वाह...... क्या स्वाद था ?माँ जब चूल्हे पर गेहूं चने की रोटी वो भी पानी के हाथ की बनाती थी ,उस पर लोनी घी........ वो स्वाद !!!!मैं इतने बरसों बाद भी नहीं भूला। बच्चे देख रहे थे ,उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी थी ,वो अपनी माँ की स्मृतियों में खो गया था।
आप ये सब खाना खाते थे ,आपको भूत बने ,कितने बरस हो गए ?
यही कोई दो सौ बरस.......
तब तो आपकी माँ भी यहीं होगी। अपनी माँ के हाथों का बनाया खाना क्यों नहीं खाते ?
नहीं मेरी माँ मुझे नहीं मिली ,वो बहुत अच्छी थी इसीलिए वो किसी ओर लोक में चली गयी ,उनकी कोई इच्छा नहीं थी।
ओह...... दुखभरे शब्दों में बच्चों ने कहा।
ख़ैर ये सब छोडो !तुमने जो खाना बताया ,वो खाने में कैसा लगता है ?
बहुत ही यम्मी...... आजकल के बच्चों की पहली पसंद है ,और भी बहुत सारी चीजें हैं ,हमने तो कम ही चीजें गिनाई हैं।
अच्छा..... मुझे भी बरसों हो गए ,तुम्हारी तरह का भोजन किये ,वैसे उस समय पर तो ये सब नहीं होता था ,अब ये नया भोजन कहाँ से आ गया ?
आपको नहीं पता ,आजकल हम बच्चे ये ही भोजनकरते हैं ,ये विदेशी भोजन है।
क्या तुम लोग विदेश भी गए हो ?
नहीं ,काका अपने देश में ही सब मिलता है ,आजकल की मम्मी भी तेज हो गयीं हैं ,वो सब बना लेती हैं।
क्या सच में ?काका !! क्या तुमने मुझे काका कहा वो तन्मय की तरफ देखते हुए बोला।
हाँ ,आप हमसे बड़े हैं ,और काका की तरह ही हमें समझाया और उस डरावने भूत से बचाया भी......
उसकी बात सुनकर वो हंसा और बोला - जबसे भूतलोक में आया हूँ ,मेरा काम नए मेहमानों के भोजन की व्यवस्था करना होता है।आज तुम लोगों ने मुझे नए -नए भोजन से अवगत कराया ,वरना मैं तो अपने इस काम के सिवा कुछ जान ही नहीं पाता। ऊपर से ,ये जो ख़तरनाक भूत हैं उससे भी ड़र बना रहता है। मैंने ''भूत पुलिस ''से भी शिकायत की किन्तु सभी ''भूलोक ''से ही तो आये हैं। ये लोग उन्हें घूस दे देते हैं और बच जाते हैं।
''घूस '',मतलब !!!
यानि रिश्वत !वो भूत काका मुस्कुराते हुए बोले।
काका यदि आप ''भूलोक ''में जा सकते तो ,हम आपको वहां के इन खानों से परिचित कराते।
लो ,ये भी क्या बात हुयी ?हम लोग ''भूलोक ''पर अपना शरीर ही तो छोड़कर आये हैं किन्तु आज भी हम अपनी आत्मा द्वारा ''भूलोक ''में ही जा सकते हैं और लोग हमें देख भी नहीं सकते। सम्पूर्ण रात्रि हम लोग वहीँ घूमते हैं। कई बार तो जब हम लोगों को अपनी कोई इच्छा पूरी करनी होती है ,तब किसी नास्तिक के तन को अपने वश में भी कर लेते हैं ,तब अपनी इच्छा से कुछ भी कर सकते हैं या उससे करवा सकते हैं।
क्या ???ऐसा हो सकता है ,टॉम ने पूछा।
हाँ ,ऐसा ही होता है किन्तु ये शक्ति उन भूतों को ही मिलती है ,जो आगे अपनी शक्तियां बढ़ाना चाहते हैं ,या फिर उन्हें इस योनि में रहते हुए ,कई सौ बरस हो जाते हैं ,तब उन भूतों में ही ऐसी शक्ति आती है।
तभी एकाएक रोहित बोला -तब तो आपमें वो शक्तियां होंगी ,आप उनका उपयोग करते होंगे।
नहीं मैंने कभी भी ,उन शक्तियों का प्रयोग नहीं किया ,मैंने अपनी प्रसन्नता के लिए ,कभी दूसरों को दुखी करना नहीं चाहा। न ही मुझे मालूम है ,मुझमें वो शक्तियां हैं भी या नहीं।
उनकी बातें जो एक अन्य भूत सुन रहा था ,वो बोला तुम्हें तो इतने बरस हो गए ,अवश्य ही ,तुममें वो शक्ति होगी।
हुई भी तो ,मुझे उस शक्ति से क्या करना है ?
आप समझे नहीं ,भूत काका !आप हमारे लिए ऐसा खाना मँगा सकते हैं।
नहीं -नहीं ,मुझे अभी तक अपनी शक्ति का प्रयोग करना नहीं आता।
अपने लिए न सही ,हम बच्चों के लिए तो इतना कर ही सकते हैं। किसी की जीव हत्या के पाप से भी बच सकते हैं और हमारा पेट भी भर जायेगा ,प्लीज अपनी शक्ति का प्रयोग करिये।
ठीक है ,मैं कोशिश करके देखता हूँ। वो क्या -क्या नाम बताये थे ?
पिज्जा ,बर्गर ,चाउमीन ,क्रीम रोल ,पैटीज !!!
अच्छा -अच्छा ,रुको तो सही ,मैं इतने नए नाम भूल जाऊंगा ,तब वो अपने नेत्र बंद करके सभी सामानो का नाम लेता है ,और कहता है -ये सभी सामान आ जाये ,आ जाये किन्तु कोई सामान नहीं आया। लो देख लो !मुझमें कोई शक्ति नहीं।
ऐसा कैसे हो सकता है ?आप तो दो सौ साल पुराने भूत हैं ,फिर से कोशिश कीजिये पांचों बच्चे बोले।
तभी कुछ सोचते हुए ,उस भूत ने कहा ,हो सकता है ,तुमने वो सामान देखा नहीं ,सिर्फ नाम से ही पुकार रहे हो ,उनकी तस्वीर भी तुम्हारी नजरों में दिखनी चाहिए।
इस बात से सभी सहमत हुए ,तब बच्चों ने बताया चाउमीन कैसा होता है ?रोल कैसा होता है ,बच्चों ने उन्हें समझाया। तब उस भूत काका ने फिर से कल्पना करके सामान मंगवाया। पहले तो कुछ नजर नहीं आया ,तभी कुछ देर पश्चात हवा में ,समोसे ,रसगुल्ला ,गेहूं चने की रोटी ,बर्गर तैरते हुए आ गए ,पीछे से एक कटोरा नूडल्स से भरा भी आ गया।
बच्चे कुछ सामान देखकर खुश भी हुए और निराश भी हुए ,रसगुल्ला किसने मंगवाया ?तन्मय ने पूछा।
वो..... मैंने बहुत सालों से रसगुल्ला नहीं खाया था ,जब मैं ये मंगा रहा था ,तभी उसका भी ध्यान आ गया।
ओह..... और ये समोसे !
तुमने ही तो बताया था कि पैटिज में अंदर कुछ भरा होता है और तिकोना होता है।
और ये रोटी !!!
रोटी नहीं ,ये पिज्जा है। उन काका की बात सुनकर ,बच्चों ने अपना माथा पीट लिया और बहुत हँसे। कहने लगे -काका आप इतने बरस के हो गए ,आपको अभी बहुत कुछ सीखना बाक़ी है। कहते हुए बच्चे भोजन पर टूट पड़े ,आज तो काका ने भी ,उनके साथ ही शाकाहारी भोजन किया और वो रोटी जैसा ,पिज्जा भी खाया।

