Haunted [ part 11]

बच्चों की भूत काका से दोस्ती भी हो गयी और आज अपने साथ -साथ उन्हें भी शाकाहारी भोजन करवाया। काका देखा ,ये खाना कैसा स्वादिष्ट था ? आप पता नहीं ,कहाँ से ,ये सब लेकर आते हो ? 

हाँ बच्चों !ये तो हमारी इच्छा पर निर्भर करता है कि हम कैसा खाना खाना पसंद करते हैं ? वैसे ये ''भूत लोक ''है ,यहाँ भूतों को ऐसा खाना ,उनके दंड स्वरूप दिया जाता है ,ताकि उन्हें एहसास हो ,उन्होंने इंसानी रूप में क्या -क्या गलत कर्म किये ? ऐसा स्वादिष्ट भोजन मिलने लगे ,तो सभी भूत बनना चाहेंगे। कुछ लोग भूत बनकर भी अच्छे भूत बने रहते हैं। 

जैसे कि आप..... 


और कुछ भूत अपना शैतानी रूप धरकर लोगों को परेशान करते हैं। तुम अभी नए -नए भूत  बने हो ,जब यहाँ रहने लगोगे ,तब यहाँ कि हवा तुम्हें भी बदल देगी। 

नहीं काका ,हम नहीं बदलेंगे किन्तु काका एक बात बताइये ,क्या यहाँ हमारे रिश्तेदार भी मिल सकते हैं ?

ये तो मैं नहीं कह सकता ,अब तो दिन निकलनेवाला है ,कल समय से ही अपने रिश्तेदारों को ढूंढने का प्रयत्न करना ,यहाँ भूतों की इतनी भीड़ है ,उन्हें ढूँढना आसान नहीं। जितने भी सुनसान ,खंडहर ,और शमशान हैं ,वे वहीँ मिलेंगे। 

काका ! हम तो अभी बच्चे हैं फिर हमें किस बात की सजा मिली ?जो हम भूत बने। 

बच्चों तुमने कोई पाप नहीं किया किन्तु तुम्हारी मौत का अभी समय नहीं आया था ,इसे असामयिक मौत कह सकते हैं ,जो किसी दुर्घटना के कारण हो गयी ,अब जितनी भी तुम्हारी उम्र होगी ,उसे तुम्हें इस योनि में ही पूर्ण करना होगा। अच्छे भूत बनकर रहोगे तो आगे दूसरे लोक में चले जाओगे।

यानि हमारी तरक्की होगी '' नरक लोक ''में तो नहीं जायेंगे ,रोहित ने पूछा। 

नहीं ,ऐसा नहीं बोलते ,'नरक लोक 'की अग्नि तो तुम बर्दाश्त ही नहीं कर पाओगे। 

अब चलो जाओ !सो जाओ !कल मिलते हैं ,देखो मंदिर के घंटों की आवाज आने लगी ,शंख बजने लगे जाओ !किसी सुनसान में पहुंच जाओ !

पांचों बच्चों ने ,एक सुनसान जगह देखी और उधर ही चले गए। यार ......  ये क्या  बात है ?हम इंसानों के बीच क्यों नहीं रह सकते ? अफ़रोज ने पूछा। 

रह सकते हैं ,किन्तु तब इंसान हमसे डरेंगे क्योंकि उन्हें हम दिखेंगे तो है नहीं। 

हाँ ,ये तो है ,वैसे एक बात है ,इंसानो को डराने में मज़ा आएगा टॉम बोला। 

हाँ यार.... उनके पीछे -पीछे जाकर ,उन्हें डराकर देखेंगे और आज जाकर अच्छा सा खाना भी खाएंगे ,अब चलो ,सो जाओ !सम्पूर्ण रात्रि जागना है। 

रात को जब सभी बच्चे उठे ,तो आलस्य में भरे थे ,निम्मी ने डांटा ,चलो उठो !खाना भी खाना है और अन्य भूतों की भीड़ में ,अपने रिश्तेदारों से भी मिलना है। जब वो लोग काका से मिलने जा रहे थे ,तब उन्होंने कुछ भूतों को उड़ते देखा ,ये तो बहुत अच्छा है ,क्या हम भी उड़ने का प्रयास करें ?निम्मी ने पूछा। 

हम भी तो हवा के ही झोंके की तरह हैं ,हम भी उड़ सकते हैं ,तभी एक हवा चली और वो लोग उड़ने लगे वाह !कितना अच्छा लग रहा है ? खुले आकाश में तारों के नीचे उड़ना कितना अच्छा लग रहा है ?

काका ओ काका !हमें खाना दो !

काका नहीं है ,अब तुम अपने भोजन का इंतजाम खुद करो ! यहाँ हर किसी को अपना इंतजाम खुद करना होता है। खरगोश खाओ ,हिरण खाओ !कोई भी जानवर लो, मारकर खा जाओ !

उस भूत की बातें सुनकर पांचों बच्चे उदास हो गए ,भूखे बच्चे खाने की तलाश में ,सुनसान सड़क पर घूम रहे थे। तभी उन्हें एक ढाबा खुला दिखाई दिया किन्तु वो बल्ब की रौशनी उनकी आँखों में चुभ रही थी। उस दुकान से अच्छी सी महक आ रही थी ,पांचों की भूख बढ़ गयी ,वो दुकान  के  बंद होने की प्रतीक्षा में बैठे रहे किन्तु अफरोज और टॉम जंगल में अंदर चले गए वहां एक खरगोश दिखा ,दोनों ने उसे मारकर खाया ,उसका खून भी पिया ,दोनों ने ही तय किया उन तीनों को कुछ भी नहीं बताएंगे। वे तीनो बैठे देख रहे थे कि लोग कैसे आ जा रहे हैं ?,तब निम्मी ने देखा ,थोड़े अँधेरे में दो लोग बैठे खाना खा रहे हैं ,उन्होंने ,समोसे ,पकौड़े और भी स्वादिष्ट सामान मंगवाए थे। अँधेरे का लाभ उठा निम्मी ने एक पकौड़ा उठा लिया। दोनों व्यक्ति ही दारू भी पी रहे थे। उनमें से एक ने अपने सामने पकौड़े को हवा में उड़ते देखा ,उसकी आश्चर्य से आँखें फैल गयीं। 


तब वो दूसरे से बोला -यार.... देख !पकौड़ा उड़ रहा है ,इससे पहले कि वो देखता ,निम्मी ने पकौड़ा खा लिया। 

दूसरा बोला -क्या बात करता  है ?कहाँ उड़ रहा है ?मुझे लगता है ,तुझे दारू चढ़ गयी है।

 निम्मी ने रोहित और तन्मय को भी बताया ,वो पकौड़ा कैसे खाकर आई है ?तब रोहित और तन्मय भी गए ,उन्होंने एक -एक समोसा उठाया। तब पहला वाला बोला -तेरा तो समोसा भी उड रहा है ,अरे मेरा ही नहीं तेरा समोसा भी उड़ रहा है ,जब तक दोनों अपने -अपने समोसों को पकड़ते ,समोसे गायब हो चुके थे बच्चों को इस तरह खाने में मजा आया और उन आदमियों का मुँह देखकर हंसने लगे।तब दोनों ने वेटर को बुलाया और डांटा -क्या यार.... कैसा समोसा ला रहा है ?जो हवा में उड़ रहा है ,जब हम उसे पकड़ते हैं तो ग़ायब हो जाता है। 

ये कैसे हो सकता है ?वेटर आश्चर्य से बोला -मुझे लगता है ,आप लोगों को ज्यादा चढ़ गयी। 

क्या बात करता है ?हमने अभी पी ही कहाँ है ?एक -एक पैग ही तो लगाया है ,एक पैग में क्या नशा होता है ? तू ही ये उड़ने वाले समोसे ला रहा है और हमारी गलती बता रहा है। 

भाई ,समोसे भी उड़ते हैं क्या ?अभी तो बनकर रखे हैं। 

तो क्या, हम झूठ बोल रहे हैं ? 

उन लोगों को काफी देर तक झगड़ते देखकर ,ढ़ाबेवाला भी वहां आ गया और उसने उन लोगों से पूछा -क्या हुआ ?

देखिये ,साहब ! ये लोग कह रहे हैं ,मैं ऐसे समोसे लाया हूँ जो उड़ रहे हैं और ग़ायब हो रहे हैं ,अब आप ही बताओ समोसे के कोई पंख हैं क्या ? वो कैसे उड़ सकता है ?

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post