Jail [part 82 ]

अमृता  अपनी मस्ती में थी ,वो आज की पार्टी की शान बनी हुई थी ,तभी उसे जैसे झटका लगा ,उसने अपनी गर्दन को झटका दिया और पुनः उस तरफ देखा। हाँ ,वही तो है ,उसके दिल ने पुकारा। उस छवि को देखते ही ,उसका दिल जोरों से धड़कने लगा। वो उस तरफ गयी और उस व्यक्ति के करीब जाकर खड़ी हो गयी। 

क्या ,मुझे ही देख रही हो ? 

तुम्हें क्या लगता है ?अमृता ने प्रश्न किया।

हाँ ,मैं ही खड़ा हूँ ,इधर और तो कोई नहीं। 

तुम इतने बेदर्दी निकलोगे ,ये मैंने सपने में भी नहीं सोचा था ,बेवफा..... !

एक्सक्यूज़्मी ! क्या मैं आपको जानता हूँ  ?


ये तो मर्दों की फ़ितरत है ,मतलब निकल जाने के पश्चात ,भूल जाया करते हैं। मिस्टर यश ! अमृता ने देखा, लोगों की नजरें उस ओर आ टिकी हैं ,वो जानती है ,प्रेस को तो मसाला चाहिए ,कुछ भी उन्हें ,उसके और यश के बीच लगा ,वे तो नमक -मिर्च लगाकर इस खबर को छाप देंगे ,जो उसके कैरियर के लिए सही नहीं होगा ,और यहाँ कुछ भी नहीं ,बहुत कुछ है। नजरें घुमाकर बोली -कभी आकर मिलो ! कहते हुए ,उसने अपनी मैनेजर की तरफ इशारा किया। वो भी तुरंत अपने कार्य में जुट गयी। अब अमृता का उस पार्टी में मन नहीं लग रहा था। वो अपने घर जाना चाहती थी ,जिसकी तलाश में ,न जाने उसने कितने आँसू बहाये ?उसके धोखे पर मन ही मन अपने को कोसा ,जो उसकी ज़िंदगी में एक हलचल बनकर आया और उसे तूफानों के हवाले छोड़कर चला गया। एक बार भी मुड़कर नहीं देखा कोई उसकी प्रतीक्षा में रातों को तारे  गिनता है। 

उफ्फ्फ्फ...... कितना सताया है ?उसने....... सोचा था -जब कभी भी वो दिखेगा ,पहचानूँगी ही  नही ,बराबर से निकल जाऊँगी ,वो मेरे करीब आना चाहेगा ,तो बात ही नहीं करूंगी। जीवन में लड़के तो बहुत आये किन्तु दिल तो इसी पर आया था धोखा खाने  के लिए ,उसने तो मेरी तनिक भी परवाह नहीं की। फिर आज अचानक उसे देखकर ,मैं क्यों बौरा गयी ?क्यों नहीं जाकर ?उसके मुँह पर वो ड्रिंक दे मारा। क्यों उससे पहचान बढ़ाने लगी ? जब मैं इतनी प्रसिद्ध हो गयी ,तब भी उसने मुझसे मिलने का प्रयास क्यों नहीं किया ?अपनी गलती का भी उसे एहसास नहीं था। धारावाहिक में देखकर ,तो मुझसे मिलने का प्रयास कर सकता था। तभी अमृता को स्मरण हुआ ,उसकी तो शादी हो गयी थी ,शायद अपनी पत्नी के प्रति ईमानदारी दिखला रहा हो। यही.... यही सब तो मुझे उससे पूछना था ,कैसे वो मेरे साथ एक रात्रि बिताकर चला गया ?और फिर कभी मिलने का प्रयास नहीं किया। क्या उसे मुझसे प्यार नहीं था ?तब मेरे जीवन में क्यों आया ?न जाने कब उसे सोचते -सोचते नींद ने घेर लिया। 

सुबह उठी ,तब उसकी मैनेजर आती है ,उसे देखते ही अमृता को फिर से वही बातें स्मरण हो आईं। रूही से पूछा - क्या तुमने उससे बात की ?

हाँ ,मैडम !मैंने उससे कहा ,'मैडम आपसे मिलना चाहती हैं। 

तब वो लापरवाही से बोला -क्यों ? मुझे क्या मालूम ? 

ये तो मैडम ही बता सकती हैं।तब मैंने उससे उसके घर का पता और फोन नंबर माँगा। 

तब क्या उसने अपना नंबर या घर का पता दिया ,अमृता उत्सुकता से बोली। 

नहीं मैडम ! उसने ही आपका  पता और फोन नंबर माँग लिया ,बोला -मैं ही कभी ,आपकी मैडम से मिलता हूँ। अजीब आदमी है ,उसने आपसे मिलने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई ,वरना लोग तो खुश होते हैं अपना भाग्य समझते हैं कि उन्हें आपसे मिलने का मौका मिला।आख़िर  कौन है ?वो ! जो आपके कहने पर भी आपसे मिलने में इतने नखरे दिखा रहा है। 

अमृता  प्रसन्न होकर ,पूछना चाहती थी -कि वो कब मिलने आने वाला है ?किन्तु रूही के प्रश्न से ,उसने अपनी जिज्ञासा को छिपा लिया ,अब तो वो और भी बेहतर कलाकार बन गयी है ,अपने जज़्बातों को छुपाना उन पर काबू करना भी सीख़ गयी है। 

इस बात को तीन  दिन हो गए ,किन्तु यश नहीं आया ,प्रतिदिन उसके इस रूखे व्यवहार के  पश्चात भी उसकी प्रतीक्षा करती ,आज वो जिस मुक़ाम पर है ,एक से एक रईस इंसान , अमृता का साथ पाना चाहता है किन्तु वो यश के लिए पागल  हो रही है ,उसका मन उससे पूछता है -ऐसा उस यश में क्या है ?जो तुम उसके लिए पागल हो किन्तु अमृता के पास कोई जबाब नहीं है। 

 मैडम !वो साहब आ गए ,अपने मैनेजर की आवाज से अमृता की तंद्रा टूटी ,अपनी प्रसन्नता को छुपाते हुए बोली -अच्छा  ,बिठाओ उन्हें ,मैं अभी आती हूँ। कहकर वो अपने कमरे में नाचने लगी ,ख़ुशी से आँखों में आंसू भर आये ,तब अपने को संयत कर ,अपनी  खूबसूरत सी ड्रेस निकाली और तैयार होकर बाहर  आ  गयी। उसे इस तरह तैयार देखकर ,रूही समझ गयी कोई विशेष व्यक्ति ही है , उसने नाश्ता रखवाया और सभी नौकरों को  किसी न किसी काम से बाहर भेज दिया। 

यश को देखकर ,अमृता को लगा जैसे दोनों ही एक -दूसरे से अपरिचित हैं ,इतना परायापन तो उसे ,उससे पहली बार मिलने में भी नहीं लगा था। कैसे हो ?उसे नाश्ता करते देख बोली। 

यश ने ,नजर उठाकर ,नजरभरकर उसे देखा और बोला -ठीक हूँ ,नाश्ता कर रहा हूँ ,जो तुमने भिजवाया है। उसकी बातों से ,उसके मिलने से अमृता को तनिक भी नहीं लगा ,जैसे  वो भी उससे मिलने को उत्सुक है। वैसे तुम पहले से भी अधिक सुंदर हो  गयी हो। 

क्या ?सच में ! चलो !तुमने इतना नोटिस तो किया।


 क्यों ?और लोग तुम्हारी प्रशंसा नहीं करते। 

करते हैं ,किन्तु वो बात ,वो सुकून नहीं मिलता। ख़ैर ये सब छोडो ! एक बात बताओ ! क्या तुम मुझे जानते हो ? 

ये क्या बात हुई ?तुम्हें मैं ही क्या ?देश का बच्चा -बच्चा जानता है। 

 फिर तुमने मुझसे मिलने का प्रयास क्यों नहीं किया ?

मैं गरीब तुमसे मिलकर , क्या करता ?तुमसे तो बड़े -बड़े लोग मिलने आते होंगे। 

क्या तुम मुझे ताना दे रहे हो ? 

मैं कौन होता हूँ ? तुम्हें ताना देने वाला। 

 मुंबई में कब से हो ?

जबसे तुमने देखा !

ये क्या गोल -मोल बातें बना रहे हो ?तुम तो ऐसे व्यवहार कर रहे हो जैसे मुझे जानते ही नहीं। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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