Sawarg ka darshan

 मन से  ही स्वर्ग है ,मन से ही नर्क !

स्वर्ग बनता अपने कर्म से ,

बनाता ,स्वयं इंसान ! 


तंगी में, एक दूजे के संग रह ,

प्रेम से करता...  सब कुर्बान !

धन  के लालच में पड़ ,

छीना -झपटी कर....  ,

मात -पिता दुश्मन बने ,

जीवन अपना जटिल बना ,

घर में बैठा , जब शैतान !

कोई ,रिश्तों को रोता ,

कोई ,भूखा सोता ,

बच्चे करें ,तकरार ,

तब पूछे ,वो उससे !

कैसा ?तेरा ये संसार !

'समभाव' में जीना सीख़ ले ,

जीवन का यही है ,सार !

यही जीवन का है ,आधार !


नजर आता है...... 


बड़े प्रेम से ,तेरे आग़ोश में ,

तेरी बांहों के झूले में ,

मुझे ,स्वर्ग नजर आता है.... 

भुला दूँ ,मैं इस जहाँ को ,

तेरे संग रहना है , मुझे ,

तुझमें मेरा, चाँद नजर आता है।

बीते संग तेरे, ज़िंदगानी मेरी , 

तेरे प्रेम में ही मुझे ,

अपना ,स्वर्ग नजर आता है..... 

 इन धड़कनों से कह दूँ ,

धड़कती रहना तुम..... !

तेरे संग ही ,जीवन नजर आता है। 



laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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