Kashmakash

 तुमसे कहनी थी, कुछ दिल की बात .... 

अधरों तक आते ठहर जाती, दिल की बात !

 शायद, समझ सके न कोई , दिल की बात!

 क्यों कहनी है ? तुमसे ,मुझे दिल की बात !

शायद पर आ ,अटक जाती, दिल की बात !



 भावों भरा ,नाजुक सा दिल ! कुछ कहता। 

 सामने तुम हो ,देख तुम्हें , कहना चाहता। 

 पत्थर बन जाता,कह न पाता ,दिल की बात !

 जिद करता , मासूम दिल की 'क़शमक़श'। 

कहे किससे, क्यों कहनी?मुझे दिल की बात !

मत उड़ेल ! भाव मन के ,समझाता ।

ये भाव , मोहब्बत !प्यार !विश्वास से बंधे !

इंतहां , इनकी हर कोई न समझ पाता।

 परखते तुम्हें , भाव और घना हो जाता।  

 घबराता कही, जो तुमसे , दिल की बात ! 

 ह्रदय में संजो लेता ? क्या दिल तुम्हारा !

कही जो मैंने ,तुमसे ,अपने दिल की बात ! 

  झूठी हमदर्दी ! झूठे लोग ! 

 समझे न कोई, दिल की बात !

 शब्दों ,भावों का अंजाम सोच !,

 कही जो, उससे दिल की बात !

 दर्द सह लेता,छल न सह पाता।

 आते -आते ,अधरों पर ठहर जाती। 

अंजाम सोच ,कह सका न, दिल की बात !  


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post